खेल खेल में बिगड़ता बचपन! बच्चों में बढ़ती गेमिंग एडिक्शन बन रही है पैरेंट्स के लिए खतरे की घंटी!


आजकल के बच्चों के बीच मोबाइल फोन की मौजूदगी काफी ज्यादा बढ़ गई है जिस वजह से उनका बचपन अब डिजिटल होता जा रहा है. आज भारत में हजारों घरों में बच्चे घंटों मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं. ये लत बच्चों की पढ़ाई, रिश्तों से लेकर मानसिक सेहत तक पर गहरा असर डाल रही है. कई मामलों में इसके नतीजे बेहद दर्दनाक भी सामने आए हैं. ऑनलाइन गेम्स आजकल बच्चों को कलरफुल ग्राफिक्स, आसान जीत और रिवॉर्ड सिस्टम के जरिए बच्चों को बांधे रखते हैं. बच्चा एक लेवल जीतता है तो अगला लेवल खेलने की बेचैनी शुरू हो जाती है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। धीरे धीरे गेम उसके दिमाग का सबसे जरूरी हिस्सा बन जाता है और पढ़ाई, खेलकूद, दोस्तों से बातचीत सब पीछे छूटने लगते हैं.

गेमिंग की लत
ऑनलाइन गेमिंग की लत का सबसे बड़ा खतरा ये है आपका बच्चा असली दुनिया से कटने लगता है. वो अकेलापन महसूस करता है और छोटी छोटी बातों पर गुस्सा करने लग जाता है. जब फोन या गेम बंद कराया जाए तो बच्चा अपने से बड़ों पर चिड़चिड़ापन भी दिखाता है. कई बच्चों में नींद की कमी, आंखों में जलन, सिर दर्द और ध्यान न लगने जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. पेरेंट्स अक्सर इसे उम्र का असर या शरारत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है जो बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

गेमिंग है खतरनाक
भारत में भी पिछले कुछ सालों में गेमिंग एडिक्शन से जुड़े कई दुखद मामले सामने आए हैं. कुछ बच्चों और टीनएजर ने काफी दबाव, हार या मोबाइल छिनने जैसी स्थितियों में ऐसे कदम तक उठा लिए है जो कोई सोच भी नहीं सकता था. कई केस में बच्चों ने गेम की वजह से आत्महत्या भी कर ली है, पिछले कुछ सालों में लगातार आ रही ऐसी खबरों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. हालांकि बहुत से रिसर्च के अनुसार गेमिंग की लत बच्चों को इमोशनल रूप से कमजोर बना देती है और वो मुश्किल हालात से निपटने की क्षमता खोने लगते हैं.

बनाएं गेमिंग से दूरी
अगर आप भी अपने बच्चे की गेमिंग की लत से परेशान हैं तो जरूरी ये है कि बच्चों के साथ खुलकर बात करें. डांटने या फोन छीनने की जगह बच्चों को समझाएं कि कम समय तक गेम खेलना ठीक है लेकिन पूरा दिन उसी में डूबे रहना अच्छी बात नहीं है. बच्चों की डेली रूटीन में पढ़ाई के अलावा आउटडोर गेम, नॉवेल, पेंटिग, म्यूजिक जैसी चीजें भी ऐड करें जिससे उनका ध्यान फोन और लैपटॉप पर कम जाए.

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