पश्चिम बंगाल का दुर्गा पूजा पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह पर्व अनूठी परंपरा, भक्ति, उल्लास और सौहार्द के लिए जाना जाता है। उत्तर भारत की शारदीय नवरात्रि से दुर्गा पूजा थोड़ा अलग होता है। दुर्गा पूजा की शुरूआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से होता है, तो वहीं शारदीय नवरात्रि की शुरूआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। दुर्गा पूजा में षष्ठी से लेकर महानवमी तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और दशमी के दिन सिंदूर खेला से दुर्गा विसर्जन होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि दुर्गा पूजा, महासप्तमी, सिंदूर खेला और दुर्गा विसर्जन कब है।

दुर्गा पूजा तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर की सुबह 03:25 मिनट से हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 17 सितंबर की सुबह 05:54 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर 16 अक्तूबर को आश्विन शुक्ल षष्ठी है। इसलिए 16 अक्तूबर से दुर्गा पूजा का शुभारंभ हो रहा है।
दुर्गा पूजा का पहला दिन और कल्पारंभ
आज यानी की 16 अक्तूबर को दुर्गा पूजा का पहला दिन है। आज कल्पारम्भ होता है। बता दें कि कोलाबोऊ पूजा से एक दिन पहले षष्ठी को कल्पारम्भ पूजा की जाती है। इसको बिल्व निमंत्रण भी कहा जाता है। मां दुर्गा को कलश में या बिल्व वृक्ष में निवास के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस दिन गणेशजी, देवी दुर्गा, कार्तिकेय और देवी सरस्वती की मूर्तियों का अनावरण होता है।
दुर्गा पूजा का दूसरा दिन महासप्तमी
वहीं दुर्गा पूजा का दूसरा दिन महासप्तमी को होता है। 17 अक्तूबर को नवपत्रिका पूजा या कोलाबोऊ पूजा की जाएगी। फिर मां दुर्गा के महास्नान के बाद महासप्तमी की पूजा होगी। इस दौरान प्राणप्रतिष्ठा करने के बाद षोडशोपचार पूजा की जाती है। साल 2026 में सप्तमी तिथि दो दिन पड़ रही है। ऐसे में 18 अक्तूबर को भी महासप्तमी रहेगी और दुर्गा पूजा का तीसरा दिन रहेगा।
दुर्गा पूजा का चौथा दिन और महाष्टमी
19 अक्तूबर 2026 को दुर्गा पूजा के उत्सव की महाष्टमी है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजाअर्चना होती है। वहीं अष्टमी तिथि के समापन और नवमी तिथि की शुरूआत पर संधि पूजा की जाती है। ऐसे में 19 अक्तूबर 2026 को संधि पूजा की जाएगी।
दुर्गा पूजा का पांचवा दिन और महानवमी
इस बार 20 अक्तूबर 2026 को दुर्गा पूजा की महानवमी पड़ रही है। इस दिन नवमी का हवन किया जाता है।
दुर्गा विसर्जन और सिंदूर खेला
वहीं 21 अक्तूबर 2026 को दुर्गा पूजा के समापन के साथ सिंदूर खेला होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं एकदूसरे को सिंदूर लगाती हैं और देवी दुर्गा को विदा करती हैं। इस दौरान ढोलनगाड़ों के थाप पर मां दुर्गा की विदाई होती है और उनका विसर्जन किया जाता है।



