
नई दिल्ली; देश के अलग-अलग हिस्सों में यूपीआई पेमेंट पर MDR चार्ज को लेकर विरोध देखने को मिल रहा है. जबकि सरकार का कहना है कि आम आदमी पर एक रुपया का बोझ नहीं डाला जाएगा. केवल बड़े ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ज्यादा पर बड़े मर्चेंट को 0.40 फीसदी MDR लगेगा. यानी 3000 रुपये के UPI पर मर्चेंट को 12 रुपये का MDR लगेगा.
दरअसल, देश के कई हिस्सों में सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है, कुछ लोगों में MDR के नियम को लेकर भी कंफ्यूजन है. इस बीच मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि वे 16 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा की पेट्रोल-डीजल की खरीद पर UPI भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे.
पेट्रोल पंप पर UPI पेमेंट लेने से इनकार
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बयान जारी कर कहा कि अगर सरकार MDR वापस नहीं लेती है, तो संगठन के सदस्यों ने 16 अक्टूबर से अपने पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपये से ज्यादा का यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है. केवल कैश पेमेंट होगा.
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष की मानें तो नई व्यवस्था के तहत एक पेट्रोल पंप को हर महीने करीब 17,700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। क्योंकि पहले ही हमारा मार्जिन कम है, इसलिए हम इस अतिरिक्त खर्च को वहन नहीं कर सकते हैं.
बता दें, 15 अक्टूबर से कारोबारी को किए जाने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की MDR फीस लागू हो जाएगी. इस MDR फीस का भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा, इसका भुगतान कारोबारी करेंगे. 2000 रुपये से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल या सीएनजी की खरीद पर 5 रुपये का फिक्स एमडीआर लगेगा. इसलिए कारोबारी UPI से भुगतान स्वीकार करने पर MDR फीस वसूले जाने के खिलाफ हो गए हैं.
जरूरी सेवाओं के लिए अलग दरें
रेलवे टिकट, पेट्रोल पंप, बीमा और टेलीकॉम जैसी आवश्यक सेवाओं पर प्रतिशत के आधार पर चार्ज लगाने के बजाय सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR तय किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप 2,000 रुपये से अधिक का कोई भी पेमेंट (चाहे 2500 रुपये का पेट्रोल भरवाएं या 50,000 रुपये की बीमा प्रीमियम भरें) UPI से करते हैं, तो मर्चेंट पर केवल 5 रुपये का फिक्स्ड चार्ज लगेगा.
बड़े कारोबारियों को राहत देने के लिए 75,000 या उससे अधिक के भारी-भरकम पेमेंट्स पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. चाहे लेन-देन 1 लाख रुपये का हो या 5 लाख रुपये का, चार्ज 300 रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता.
छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों की सुरक्षा
सब्जी बेचने वाले, चाय दुकान वाले, छोटे किराना दुकानदार और ऑटो ड्राइवर बड़े पैमाने पर QR कोड का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है. जिन छोटे दुकानदार और वेंडर्स की UPI QR कोड के जरिए महीने की कुल डिजिटल भुगतान 1 लाख रुपये तक है, उन्हें P2PM श्रेणी में रखा गया है. इन दुकानदारों के लिए सभी ट्रांजेक्शन पर MDR पूरी तरह शून्य (0%) रहेगा, चाहे ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से ऊपर का ही क्यों न हो.
आंकड़ों के मुताबिक भारत में UPI से होने वाले कुल मर्चेंट पेमेंट्स में से 96% से ज्यादा ट्रांजेक्शन 2,000 या उससे कम के होते हैं. सरकार का तर्क है कि देश के 95% से अधिक छोटे और मध्यम व्यापारी इस MDR चार्ज के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे.



