इस साल फेस्टिव सीजन में कारों की खरीदारी को लेकर ग्राहकों का उत्साह अच्छा रहने की उम्मीद है. बुकिंग भी अच्छी चल रही है, लेकिन डीलरशिप पर पर्याप्त गाड़ियां नहीं होने से कंपनियों के लिए बढ़ी हुई मांग को पूरा करना मुश्किल हो सकता है. देश की टॉप 5 कार कंपनियों की बाजार में 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है और इन कंपनियों के सामने भी स्टॉक बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है.

फेस्टिव सीजन का दूसरा बड़ा दौर 11 अक्टूबर से नवरात्रि के साथ शुरू होकर 10 नवंबर तक दिवाली तक चलेगा. इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान कारों की मांग अच्छी रह सकती है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। हालांकि, अगर कंपनियों के पास पर्याप्त गाड़ियां उपलब्ध नहीं हुईं, तो वे इस मांग का पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगी. ऑटो कंपनियों के लिए अक्टूबरनवंबर का यह समय काफी अहम होता है. पूरे साल में बिकने वाली करीब एकतिहाई कारें इसी फेस्टिव पीरियड में बिकती हैं. ऐसे में इस दौरान कारों की उपलब्धता बिक्री के लिए बड़ी भूमिका निभा सकती है.
मारुति सुजुकी के पास 2 लाख से ज्यादा पेंडिंग बुकिंग
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी के पास इस समय 2 लाख से ज्यादा कारों की बुकिंग पेंडिंग है. यानी बड़ी संख्या में ग्राहक कार बुक कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी डिलीवरी का इंतजार है. इसके मुकाबले कंपनी के डीलर नेटवर्क के पास करीब 16 दिन की बिक्री के बराबर ही कारों का स्टॉक है.
आमतौर पर फेस्टिव सीजन के दौरान मारुति सुजुकी के डीलर्स के पास करीब एक महीने का स्टॉक रहता है. कंपनी के मार्केटिंग और सेल्स विभाग के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर Partho Banerjee ने बताया कि वित्त वर्ष की शुरुआत में कंपनी के पास सिर्फ 13 दिन का स्टॉक था. अब यह बढ़कर 16 दिन हुआ है, लेकिन पेंडिंग बुकिंग 2 लाख से ज्यादा हो चुकी है.
उन्होंने कहा कि कंपनी को दिसंबर से पहले एक महीने का स्टॉक तैयार होने की उम्मीद नहीं है. मारुति सुजुकी की नई ऑटोमेटेड प्रोडक्शन लाइन को भी दिसंबर तक पूरी तरह स्थिर होने की उम्मीद है. इसके बाद उत्पादन और गाड़ियों की उपलब्धता में सुधार आ सकता है.
इस साल मारुति की सेल में 35% की बढ़ोतरी
चालू वित्त वर्ष में अब तक Maruti Suzuki की बिक्री करीब 35 फीसदी बढ़ी है. वहीं, अप्रैल से अगस्त के बीच पूरी ऑटो इंडस्ट्री की ग्रोथ करीब 30 फीसदी रही. कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में गाड़ियों की उपलब्धता काफी अहम रहने वाली है. फेस्टिव सीजन के दौरान प्रोडक्शन के लिए उपलब्ध दिन भी कम हो जाते हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
एक दूसरी बड़ी कार कंपनी के अधिकारी ने कहा कि फेस्टिव सीजन की पूरी कैपेसिटी का फायदा उठाने के लिए कंपनियों को पहले अपना स्टॉक बढ़ाना होगा. हालांकि, इस साल ऐसा करना चुनौती बन गया है. सामान्य महीनों में भी मांग के हिसाब से गाड़ियों की सप्लाई करना मुश्किल हो रहा है.
उनके मुताबिक, अगस्त और सितंबर में बिक्री बेहतर रही है, लेकिन में कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में इस फेस्टिव सीजन में पिछले साल के मुकाबले कारों की बिक्री में सिर्फ कुछ फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
इस बार फैले हुए हैं त्योहार
इस साल त्योहारों का कैलेंडर पिछले साल की तुलना में ज्यादा फैला हुआ है. अगस्त में ओणम, सितंबर में गणेश चतुर्थी और अक्टूबरनवंबर में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली पड़ रही है. वहीं, पिछले साल नवरात्रि, दशहरा और दिवाली का बड़ा हिस्सा अक्टूबर में ही था. इसलिए इस साल की बिक्री की तुलना सीधे पिछले साल से करना थोड़ा मुश्किल होगा.
Hyundai को दूसरी छमाही से 56% इंडस्ट्री ग्रोथ की उम्मीद
Hyundai Motor India के पास फेस्टिव सीजन के दूसरे हिस्से में जाने से पहले करीब 4 से 5 हफ्तों का स्टॉक मौजूद है. कंपनी महाराष्ट्र के Talegaon प्लांट में तीसरी शिफ्ट शुरू करने की तैयारी भी तेज कर रही है. यह कदम अगले महीने आने वाली एक मिडसाइज SUV के लॉन्च से पहले उठाया जा रहा है.
Hyundai Motor India के मैनेजिंग डायरेक्टर Tarun Garg के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इंडस्ट्री की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है. उनका अनुमान है कि ऊंचे बेस के कारण दूसरी छमाही में इंडस्ट्री करीब 56 फीसदी की दर से बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि कंपनी अपने दो नए मॉडल की मदद से बाजार से तेज ग्रोथ हासिल करने की उम्मीद कर रही है.
टाटा मोटर्स को भी बिक्री बढ़ने की उम्मीद
Tata Motors Passenger Vehicles को भी इस फेस्टिव सीजन में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रिटेल बिक्री की उम्मीद है. हालांकि, कंपनी का मानना है कि बिक्री की ग्रोथ प्रतिशत में कमी आ सकती है.
Tata Motors Passenger Vehicles के चीफ कमर्शियल ऑफिसर Amit Kamath के मुताबिक, कंपनी फेस्टिव सीजन को लेकर सकारात्मक है और पिछले साल से ज्यादा रिटेल बिक्री की उम्मीद कर रही है. लेकिन 22 सितंबर 2025 से लागू हुई GST दर में कटौती के कारण पिछले साल बिक्री का बेस काफी ऊंचा था. इसलिए इस साल सालाना ग्रोथ का प्रतिशत कम दिखाई दे सकता है.
इलेक्ट्रिक कारों की सप्लाई पर ज्यादा दबाव
डीलर्स के मुताबिक, स्टॉक की समस्या खास तौर पर बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कारों में ज्यादा दिखाई दे रही है. ईरानअमेरिका संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में तेजी आई है. ऐसे में कंपनियों के सामने EV की बढ़ी हुई मांग पूरी करने की चुनौती भी बढ़ गई है.Federation of Automobile Dealers Associations के अध्यक्ष Sai Giridhar ने कहा कि फेस्टिव सीजन की शुरुआत अच्छी रही है. डीलर्स ने ओणम, रक्षाबंधन और गणेश चतुर्थी के दौरान मजबूत बुकिंग की जानकारी दी है.
फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दशहरा से दिवाली के बीच कारों की रिटेल बिक्री में रिकॉर्ड 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. इस साल पिछले साल की मजबूत बिक्री के कारण ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम रह सकती है. हालांकि, कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अक्टूबर और नवंबर में ग्राहकों की मांग के मुताबिक पर्याप्त कारें उपलब्ध कराना होगी.



