कल यानी 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए रखा जाएगा। अहोई अष्टमी वाले दिन सभी माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं। पूरा दिन व्रत रखती हैं और शाम के समय तारों को देखकर अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

इस व्रत में पूजापाठ के साथ ही कुछ चीजों का होना विशेष महत्व माना जाता है, जैसे कि गन्ना और मूली। अहोई अष्टमी की पूजा में गन्ना और मूली जरुर रखी जाती है। क्या आप जानते हैं कि आखिर अहोई अष्टमी व्रत में मूली और गन्ना की पूजा क्यों की जाती है? आइए आपको इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और महत्व बताते हैं।

अहोई अष्टमी पर गन्ने की पूजा क्यों होती है?

अहोई अष्टमी की पूजा में गन्ना रखना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गन्ना मिठास, खुशहाली और समृद्ध का प्रतीक है। जैसे गन्ने में नेचुरल मिठास होती है, उसी तरह से माताएं कामना करती हैं कि उनकी संतान का जीवन भी हमेशा खुशियों और प्रेम से भरा हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अहोई माता को गन्ना अर्पित करने से संतान के जीवन में सुखसमृद्धि बनीं रहती है।

अहोई अष्‍टमी के दिन मूली की पूजा क्‍यों होती है ?

अहोई अष्टमी की पूजा में गन्ने के साथ ही मूली को भी रखना शुभ माना जाता है। असल में मूली को शुद्धता, स्वास्थ्य और अच्छी सेहत का प्रतीक माना जाता है। वैसे यह व्रत भी माताएं संतान के अच्छे स्वस्थ और जीवन में खुशहाली के लिए करती हैं। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। धार्मिक मान्यताएं के अनुसार, पूजा में मूली अर्पित करने से संतान की सेहत बेहतरीन रहती हैं और लंबी उम्र की कामना पूरी होती है। इसी कारण से अहोई अष्टमी के पूजन में मूली को भी जरुर शामिल किया जाता है।

अहोई अष्टमी पर इन चीजों को चढ़ाने से मिलता है शुभ फल

यह व्रत मां और संतान के बीच प्रेम और समर्पण के लिए जाना जाता है। इस दिन माता अहोई को प्रसन्न करने के लिए आप गन्ना और मूली के अलावा देवी को दूध और चावल खीर चढ़ा सकती हैं। वहीं, आप गुलगुले और मीठे पुए बनाकर देवी मां के चढ़ा सकते हैं। अहोई माता को हलवा पूरी का प्रसाद भी बेहद प्रिय है। फलों में सिंघाड़ा अहोई माता को पसंद है। वहीं देवी मां को 7 प्रकार के अनाज जैसे गेंहूं, चावल, मूंग, मसूर, जौ, चना और तिल आदि भी चढ़ा सकते हैं।