MP Patwari News Today: मध्य प्रदेश में ग्रामीण इलाकों की संपत्तियों का मालिकाना हक देने के लिए चलाई जा रही स्वामित्व योजना को लेकर राज्य सरकार और पटवारियों के बीच विवाद गहरा गया है। दरअसल, प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पट्टे की जमीनों की सरकारी खर्च पर रजिस्ट्री की जानी है। हालांकि, कानूनी पचड़ों के डर से पटवारियों ने निष्पादक की भूमिका में हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है और आंदोलन की राह चुन ली है। पटवारियों का तर्क है कि भविष्य में कोई विवाद होने पर उन्हें बेवजह पक्षकार बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद पटवारियों के रुख में नरमी नहीं आई है।

कड़ा रुख: 27 पटवारी बर्खास्त, 26 निलंबित

पटवारियों के हड़ताल और काम में टालमटोल पर राज्य प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार के निर्देशों की अवहेलना करने पर अब तक कुल 53 पटवारियों के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है। इनमें से 27 पटवारियों को सीधे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि 26 को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा नर्मदापुरम में 133, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। वहीं रतलाम में 12 पटवारियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए गए हैं।

रीवा में एक साथ 15 पटवारी सस्पेंड

सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा जिले में देखने को मिली है, जहां रीवा कलेक्टरेट के निर्देश पर संबंधित एसडीएम ने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वाले 15 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित होने वालों में बृजेश गुप्ता, अभिनव तिवारी, सौरभ सिंह, आशीष पांडेय, मधुर सिंह, कौशल कोल, इकबाल, प्रकाश सोनी, योगेश डाबर, निशांत नागवंशी, पुष्पराज सिंह, नम्रता साहू, प्रशांत त्रिपाठी, अजय पटेल और योगिता सिंह शामिल हैं। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इस त्वरित और कठोर कार्रवाई के बाद से पूरे प्रदेश के राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

क्या है स्वामित्व योजना?

मध्य प्रदेश सरकार ने ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 50 लाख निजी संपत्तियों के मुफ्त पंजीकरण का लक्ष्य रखा है। केंद्र सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को उनकी जायदाद के वैध कानूनी दस्तावेज प्रदान करना है, ताकि संपत्ति से जुड़े विवादों को खत्म किया जा सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके। इस मामले में सरकार ने साफ किया है कि इस लोकहितकारी योजना के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।