हैदराबाद : तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। यहाँ एक बस कंडक्टर के लिए उसकी ‘असाधारण लंबाई’ ही सबसे बड़ी दुश्मन बन गई। करीब 6 फीट 6 इंच लंबे अमीन अहमद अंसारी को बसों के भीतर काम करने में ऐसी शारीरिक यातनाएं झेलनी पड़ीं कि अब विभाग को उनके लिए नियम बदलने पड़े हैं।

गर्दन और पीठ के गंभीर दर्द से जूझ रहे इस कर्मचारी को विभाग ने अब बस की गैलरी से हटाकर ऑफिस की कुर्सी सौंप दी है।

बस की ‘छत’ बनी अमीन के लिए काल

मेहदीपट्टनम डिपो में तैनात कंडक्टर अमीन अहमद अंसारी का कद लगभग 198 सेंटीमीटर यानी करीब 6 फीट 6 इंच है। आम तौर पर लोग अच्छी लंबाई की तमन्ना करते हैं, लेकिन अमीन के लिए यह अभिशाप साबित हुई। तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (TGSRTC) की बसों के अंदर का ढांचा और छत की ऊंचाई अमीन के कद के सामने बहुत छोटी थी। यात्रियों के बीच टिकट काटने और बस में आवाजाही के दौरान उन्हें हर पल सिर झुकाकर चलना पड़ता था।

पीठ और गर्दन के दर्द ने किया बेहाल

अमीन की इस शारीरिक पीड़ा को देखते हुए निगम ने पहले उन्हें एक साल के लिए ‘आउट ऑफ डिजिग्नेशन’ (OD) ड्यूटी पर तैनात किया था, जहाँ उन्हें बसों में नहीं जाना पड़ता था। लेकिन 28 अप्रैल को जैसे ही उनकी यह विशेष ड्यूटी समाप्त हुई, उन्हें फिर से बसों में भेज दिया गया। कुछ ही दिनों की ड्यूटी के बाद अमीन की गर्दन और पीठ में भयानक दर्द शुरू हो गया। झुककर चलने की मजबूरी ने उनकी रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया, जिससे वह चलने-फिरने में भी लाचार महसूस करने लगे।

अधिकारियों ने दिखाई संवेदनशीलता, मिला नया पद

अमीन की खराब सेहत की खबर जब मुख्यालय पहुंची, तो अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। 5 मई को निगम ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए अमीन अहमद अंसारी को दोबारा ओडी (OD) ड्यूटी पर भेज दिया है। अब उन्हें बस के अंदर खड़े होकर टिकट नहीं काटना होगा। नई जिम्मेदारी के तहत अब वे बस पास सेक्शन, प्रशासनिक कार्य या एयरपोर्ट सेक्शन में अपनी सेवाएं देंगे, जहाँ उन्हें झुककर काम करने की जरूरत नहीं होगी।

सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘हाइट’ वाली बहस

यह खबर वायरल होते ही सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। यूजर्स का कहना है कि हमारे सार्वजनिक परिवहन और कार्यस्थल केवल ‘औसत’ लंबाई वाले लोगों के हिसाब से बनाए जाते हैं, जिससे अमीन जैसे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने टीजीएसआरटीसी के इस मानवीय फैसले की सराहना की है कि उन्होंने अपने कर्मचारी की तकलीफ को समझा और उसे राहत प्रदान की।

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