.लखनऊ में बांग्लादेशी महिला के 10 और मददगार’ सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर, फर्जी आधार कार्ड गिरोह का हो सकता है खुलासा!

लखनऊ से गिरफ्तार की गई बांग्लादेशी महिला के 10 और मददगार सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं। वहीं, फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह तक पहुंचने की कोशिश सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं।

Lucknow News

लखनऊ: राजधानी लखनऊ से गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेशी महिला के 10 और संदिग्ध मददगारों को सुरक्षा एजेंसियों ने रडार पर ले लिया है। सुरक्षा एजेंसियों को गिरोह के बारे में कई अहम जानकारियां मिली हैं। एटीएस के साथ ही पुलिस के खुफिया तंत्र ने भी छानबीन तेज कर दी है। इस मामले में जल्द ही वजीरगंज से दबोचे गए एक बांग्लादेशी से पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है।

ठाकुरगंज इलाके से 29 नवंबर को एटीएस ने एक महिला को पकड़ा था। जिसकी पहचान नरगिस अख्तर उर्फ निर्मला देवी उर्फ जैस्मीन के रूप में हुई है। एटीएस के सब इंस्पेक्टर रवि प्रकाश ने ठाकुरगंज थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था। पूछताछ में महिला ने कबूल किया कि वह बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। अपनी राष्ट्रीयता छिपाने के लिए जाली भारतीय पहचान पत्र बनवाए थे। वह ठाकुरगंज में किराए के मकान में निर्मला देवी बनकर रह रही थी। उससे मिले इनपुट के बाद एटीएस ने गोसाईजगंज के रसूलपुर बेगरिया निवासी हरिओम आनंद को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा है। उस पर महिला का जाली आधार कार्ड तैयार करवाने का आरोप है।

ल रूप से बलिया जिले के रहने वाले हरिओम ने दस्तावेज़ों में हेरफेर किया था। उस पर जाली पहचान पत्र बनाने वाले एक बड़े गिरोह से जुड़े होने का संदेह है। सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क में शामिल लोगों ने कई अवैध प्रवासियों के लिए जाली भारतीय दस्तावेज बनवाए हैं, इसीलिए एजेंसियां गिरोह के बारे में गहन छानबीन कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो गैंग से जुड़े 10 और लोगों को संदेह के आधार पर राडार पर लिया गया है। इन लोगों से जल्द ही पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है। छानबीन में सामने आया है कि नरगिस अख्तर के पास से तीन फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं।

सिंडिकेट की छानबीन कर रहीं एजेंसियां

छानबीन में सामने आया है कि नरगिस अख्तर के पास से तीन फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं। उसने बताया कि उसके पिता फजलुल खान पश्चिम बंगाल के झालोकाटी में रहते हैं, जबकि उसका ननिहाल बांग्लादेश के एक अन्य जिले में है। उसने दावा किया कि वह कुछ महीने पहले वह अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुई थी। लखनऊ पहुंचने पर उसकी मुलाकात हरिओम आनंद से हुई थी, उसी ने रुपये लेकर जाली दस्तावेजों मुहैया करवाए थे।

ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *