World Zoonoses Day Awareness: दुनिया भर में हर साल 6 जुलाई को ‘वर्ल्ड जूनोसिस डे’ मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के प्रति जागरुकता फैलाना होता है।

बता दें कि फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुइस पाश्चर ने 6 जुलाई 1885 को कुत्तों से फैलने वाली बीमारी रेबीज का पहला टीका लगाया था। उन्हीं की याद में हर साल ‘जूनोसिस डे’ सेलिब्रेट किया जाता है। हैरानी की बात यह है कि अब भी बड़ी जनसंख्या ऐसी हैं, जिन्हें जानवरों से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों के बारे में जानकारी नहीं है।
क्या होते हैं जूनोसिस रोग
जूनोटिक रोग उन रोगों को कहते हैं जो ऐसे रोगाणुओं की वजह से फैलते हैं, जो जानवरों और लोगों के बीच पनपते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मताबिक, ऐसा कोई भी रोग या संक्रमण जो वर्टिब्रेट जानवरों से मनुष्यों में या मनुष्यों से जानवरों में फैलता हो, जुनोसिस कहलाता है। मनुष्यों को संक्रमित करने वाले रोगाणुओं में करीब 61% जुनोटिक होते हैं। कई बार जानवरों से खतरनाक वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट और फंजाई इंसानों तक पहुंच जाते हैं और संक्रामक बीमारियां फैल जाती हैं।
इसके अलावा कई बार इंसानों से जानवरों में भी इस तरह के बैक्टीरिया या वायरस पहुंच जाते हैं। कई बार स्वस्थ दिखने वाले पशुओं में इस तरह के वायरस हो सकते हैं। दुनिया भर में जूनोटिक रोग बहुत आम हैं। हर 10 संक्रामक रोगों में से 6 से अधिक जानवरों से फैलते हैं।
जूनोटिक डिजीज से कैसे करें बचाव?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने जूनोटिक रोगों से बचाव के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं
- आप पेट्स को छूने के बाद आप साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं।
- इसके अलावा आप सैनिटाइजर से हाथ साफ कर सकते हैं।
- जानवरों से उचित दूरी बनाए रखें।
- कोशिश करें कि उनके सीधे संपर्क में ना आएं।
- मच्छर, मक्खी या किसी तरह के कीड़ों से खुद का बचाव करें और जानवरों का भी।
- खानेपीने के सामानों को लेकर सावधानी बरतें।
- इसके अलावा जूनोटिक डिजीज के बारे में जागरूक रहें।
कौनकौन से जूनोटिक रोग फैलते हैं
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रेबीज
रेबीज दुनिया की सबसे घातक और सबसे ज्यादा स्पीड में फैलने वाली ज़ूनोटिक बीमारियों में से एक है। वायरस से फैलने वाली यह बीमारी संक्रमित जानवरों की लार या इंफेक्टेड स्किन के संपर्क में आने से फैलता है। यह आमतौर पर रैकून, स्कंक, लोमड़ियों और चमगादड़ जैसे जंगली जानवरों के काटने से फैलता है। यह वायरस किसी संक्रमित जानवर के मूत्र या मल के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। रेबीज के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, भ्रम और दौरे शामिल हैं। यदि इसका समय रहते उपचार न किया जाए तो रेबीज जानलेवा हो सकता है।
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लाइम बीमारी
लाइम बीमारी बोरेलिया बर्गडोरफेरी नामक बैक्टीरिया से फैलता है, जो संक्रमित टिक्स के काटने से फैलता है। लाइम रोग के लक्षणों में बुखार, थकान, जोड़ों का दर्द और तंत्रिका संबंधी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। यदि समय रहते इलाज नहीं किया जाता है, तो लाइम रोग से गठिया, हृदय और मस्तिष्क की सूजन और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
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ब्रुसेलोसिस
ब्रुसेलोसिस बैक्टीरिया ब्रुसेला एबॉर्टस के कारण होता है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों या उनके अपशिष्ट उत्पादों के संपर्क में आने से फैलता है। यह मनुष्यों में बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों के साथसाथ जोड़ों में का कारण बन सकता है। ब्रुसेलोसिस से प्रजनन संबंधी विकार या फिर मृत्यु तक हो सकती है।
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टोक्सोप्लाज्मोसिस
टोक्सोप्लाज्मोसिस, टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक के कारण होता है। यह संक्रमित बिल्लियों और उनके अपशिष्ट उत्पादों से फैलता है। टोक्सोप्लाज्मोसिस के लक्षणों में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सूजन लिम्फ नोड्स और सिरदर्द शामिल है। समय पर इलाज न होने पर अंधापन या मस्तिष्क संबंधी बीमारी हो सकते हैं।
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हंतावायरस
हंतावायरस संक्रमित कृंतकों जैसे चूहों या चुहियों के संपर्क में आने से फैलता है। हंतावायरस के लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, मतली, उल्टी और पेट दर्द शामिल हो सकते हैं। हंतावायरस से श्वसन संबंधी विकार हो सकते हैं। यह इतना अधिक घातक है कि कई मामलों में मृत्यु का कारण बन सकता है।



