सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड , इसके प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स किशोर लक्ष्मीनारायण बियानी और राकेश गोपीकिशन बियानी तथा अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. एफआईआर के अनुसार इन पर आरोप है कि उन्होंने फंड को इधरउधर करके, लेनदेन की जटिल परतें बनाकर और वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर करके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ 904.32 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है. यह FIR, SBI की 9 अक्टूबर की एक शिकायत के आधार पर 4 नवंबर को दर्ज की गई थी. एजेंसी ने इन लोगों पर पुरानी भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं, साथ ही ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया है. इसके बाद, CBI की टीमों ने मुंबई में प्रमोटर्स से जुड़ी कई जगहों पर तलाशी ली और कुछ दस्तावेज जब्त किए.

कब आया फ्रॉड सामने?

यह मामला BDO इंडिया LLP द्वारा किए गए एक फोरेंसिक ऑडिट के बाद सामने आया है, जिसमें 1 अप्रैल 2017 से 30 अप्रैल 2022 तक की अवधि को कवर किया गया था. FRL के लोन अकाउंट को 26 अप्रैल 2021 से ‘नॉनपरफॉर्मिंग एसेट’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जबकि SBI की ‘फ्रॉड आइडेंटिफिकेशन कमिटी’ ने 23 मार्च 2026 को इसे एक ‘फ्रॉड अकाउंट’ घोषित कर दिया. बैंक की शिकायत के अनुसार, फोरेंसिक ऑडिटर ने 13 ऐसी संबंधित entities की पहचान की है, जिन्हें FRL ने समीक्षा अवधि के दौरान कुल 5,878.28 करोड़ रुपए का नेट भुगतान किया था. इन entities को कुल 24,002.09 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जबकि उनसे 18,123.79 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे.

कैसे पता चला फ्रॉड?

ऑडिट में नौ ऐसी संबंधित entities को 1,263.68 करोड़ रुपए का नेट भुगतान किए जाने का भी पता चला है, जिनकी वित्तीय क्षमता और बताई गई आय, उन्हें मिली रकम के अनुपात में बहुत कम थी. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। शिकायत में एक और लेनदेन का जिक्र है, जो ग्रुप की कंपनी ‘सिंटेक्स ट्रेडिंग एंड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़ा है. वित्त वर्ष 2020 के दौरान, FRL ने सिंटेक्स को 606.60 करोड़ रुपए का लोन दिया था. बाद वाले के शॉर्ट टर्म लोन और एडवांस 31 मार्च, 2019 को 8.37 करोड़ रुपए से बढ़कर 31 मार्च, 2021 को 850.14 करोड़ रुपए हो गए. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इससे संकेत मिलता है कि FRL से प्राप्त फंड का इस्तेमाल वैध व्यावसायिक कार्यों के बजाय, समूह की दूसरी entities को और अधिक लोन और एडवांस देने के लिए किया गया हो सकता है.

ये भी पाई गई गड़बड़ियां

फोरेंसिक ऑडिट में FRL के अकाउंटिंग रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां पाई गईं. कंपनी द्वारा बताई गई सिक्योरिटी डिपॉजिट FY19 में 1,938.35 करोड़ रुपए से बढ़कर FY20 में 4,406.17 करोड़ रुपए हो गई, जबकि इसी दौरान इसके स्टोरों की संख्या 1,511 से घटकर 1,350 रह गई. सप्लायर को दिए गए एडवांस FY17 में 530.28 करोड़ रुपए से बढ़कर FY21 में 3,089.22 करोड़ रुपए हो गए, जबकि इसी अवधि में खरीदारी 13,212.92 करोड़ रुपए से घटकर 3,765.30 करोड़ रुपए रह गई थी.