2026 में ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में 23% की बढ़ोतरी होने की संभावना है. मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि अनाज की आपूर्ति में रुकावट और ‘अलनीनो’ के कारण खाद्य असुरक्षा के और गंभीर होने का खतरा बढ़ गया है.

विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी नवीनतम ‘कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक’ रिपोर्ट में यह बात कह कि तेल का भंडार कम हो जाने से दुनिया के सामने सप्लाई से जुड़े और झटके लगने का खतरा बढ़ गया है. अनुमान है कि 2027 में कमोडिटी की कीमतों में कुल मिलाकर 7 फीसदी की गिरावट आएगी.

विश्व बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट और ‘प्रॉस्पेक्ट्स ग्रुप’ के निदेशक, आयहान कोसे ने कहा कि कमोडिटी बाजारों को एक साथ कई बड़े झटके लग रहे हैं. उन्होंने बताया कि ऊर्जा की बढ़ती कॉस्ट और व्यापार में रुकावटों के कारण कई तरह की वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं. इससे महंगाई, खाद्य असुरक्षा और इकोनॉमिक ग्रोथ की स्थिति और खराब हो सकती है.

ऊर्जा की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर

अनुमान है कि 2026 में ऊर्जा की कीमतों में 32 फीसदी की वृद्धि होगी, जो पिछले तीन वर्षों की गिरावट को पलट देगी. इसके बाद 2027 में कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है. इस साल ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो 2025 में 69 डॉलर थी. 2027 में इसके घटकर 79 डॉलर प्रति बैरल होने का अनुमान है.

2026 में ग्लोबल तेल सप्लाई में 5.2% की गिरावट आने का अनुमान है. 2020 की ग्लोबल मंदी को छोड़ दें, तो पिछले चार दशकों से भी अधिक समय में यह सबसे बड़ी गिरावट होगी. तेल की खपत में भी 2.5 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है. 2020 और 1980 के बाद यह रिकॉर्ड पर तीसरी सबसे बड़ी सालाना गिरावट होगी. तेल का उत्पादन अभी भी खपत से कम है, जिसके कारण तेल के भंडार से और अधिक निकासी करनी पड़ रही है.

एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ऊर्जा और खाद की कीमतों में भारी उछाल आया है. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लगभग बंद कर दिया है, जो तेल, गैस और खास के ट्रांसपोर्टेशन का एक प्रमुख मार्ग है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विश्व बैंक के ये नए अनुमान, अप्रैल में लगाए गए अनुमानों की तुलना में काफी अधिक हैं.

खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 2026 में लगभग 10 फीसदी और 2027 में 7 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो कुल मिलाकर 18 फीसदी की बढ़ोतरी है. विश्व बैंक का कहना है कि संघर्ष के कारण अनाज की सप्लाई बाधित हो रही है, ‘अल नीनो’ से फसलों को खतरा है, और फ्यूल तथा खाद की ऊंची कीमतों के कारण खेती की कॉस्ट बढ़ रही है. साल की शुरुआत में यूरिया की कीमतों में भारी उछाल आया था, जो बाद में कुछ कम हो गया. अब 2026 में खास की कीमतों में 14 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है. उम्मीद है कि 2027 तक ये कीमतें वापस 2025 के स्तर पर आ जाएंगी.

खाद्य संकट का खतरा

इन अनुमानों में यह मानकर चला गया है कि वस्तुओं की सप्लाई को प्रभावित करने वाले संघर्ष और अधिक गंभीर नहीं होंगे. अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ता है और रूस के तेल इंफ्रा को नुकसान पहुंचना जारी रहता है, तो ऊर्जा की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं. विश्व बैंक के अनुसार, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, काला सागर के रास्ते होने वाले अनाज के शिपमेंट पर हमले और बहुत तीव्र ‘अल नीनो’ मिलकर खाद्य संकट पैदा कर सकते हैं. इससे 2010 के दशक की शुरुआत की तरह ही, और अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में जा सकते हैं. ऐसी खराब स्थिति में, 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. साथ ही, खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी बेसलाइन अनुमान से 12 फीसदी अधिक हो सकती हैं, जो 2022 के स्तर को भी पार कर जाएंगी.

मेटल की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर

2026 में मेटल्स की कीमतों में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिसमें एल्युमीनियम, तांबा और टिन सभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. विश्व बैंक का कहना है कि ऐसा रिन्युएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटरों से आ रही भारी मांग, तथा इस साल सप्लाई में आई रुकावटों के कारण हो रहा है. 2027 में धातुओं की कीमतों में 3% की गिरावट आने की उम्मीद है. कीमती धातुओं की कीमतों में 2026 तक 40 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है, क्योंकि भूराजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में इनकी मांग बनी हुई है. 2027 में इनमें कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन फिर भी ये 201519 के औसत से तीन गुना से अधिक बनी रहेंगी.

गरीब देशों के लिए मदद

विश्व बैंक ग्रुप ने अपने मौजूदा साधनों के जरिए 50 अरब डॉलर से 60 अरब डॉलर की राशि उपलब्ध कराई है, जिसमें 25 अरब डॉलर की पहले से तय फंडिंग भी शामिल है. इससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को फंड मिल सकता है, वित्तीय क्षमता बढ़ सकती है, और कंपनियों तथा कृषि क्षेत्रों को वर्किंग कैपिटल और नकदी उपलब्ध कराई जा सकती है. मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद से, वर्ल्ड बैंक ने कमजोर देशों को 8.7 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता प्रदान की है.

कोसे ने कहा कि सबसे गरीब लोगों की सुरक्षा करना और कम आय वाले उन देशों की मदद करना प्राथमिकता होनी चाहिए, जो “पहले से ही भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी देखा गया है कि कमोडिटी मार्केट आपस में कितने गहराई से जुड़े हुए हैं. इसमें पाया गया कि आर्थिक या बाजार के तनाव के समय कीमतों में उतारचढ़ाव के बीच आपसी संबंध और मजबूत हो जाते हैं. ऐसा मध्यपूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद भी देखा गया है. औसतन, औद्योगिक धातुओं में होने वाला उतारचढ़ाव अन्य कमोडिटी समूहों पर सबसे ज्यादा असर डालता है. संघर्ष शुरू होने के बाद तेल की कीमतों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है.