भारतीय परिवारों के लिए सोना निवेश और त्योहारों पर खरीदारी के लिए हमेशा से पसंदीदा रहा है. दशहरा, दिवाली और शादीब्याह के सीजन में इसकी मांग आमतौर पर बढ़ जाती है. हालांकि, सोने की ऊंची कीमतें लोगों के खरीदारी के तरीके को बदल रही हैं. कुछ परिवार अब हल्के गहने चुन रहे हैं, जबकि कुछ लोग सोने के सिक्के, बार या गोल्ड एक्सचेंजट्रेडेड फंड की ओर रुख कर रहे हैं. सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आई है, इसलिए खरीदार यह देख रहे हैं कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है या फिर कीमतों में और गिरावट आ सकती है.

मंगलवार को सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आई. इसके पीछे एक कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना था. निवेशक 2728 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर नजर रखे हुए हैं, जिससे ब्याज दरों की भविष्य की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं. विदेशी बाजारों में स्पॉट गोल्ड 0.1 फीसदी बढ़कर 4,145.22 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.1 फीसदी बढ़कर 4,164.70 डॉलर पर पहुंच गया.

यह सुधार जनवरी 2026 के रिकॉर्ड स्तर से 26% से अधिक की गिरावट के बाद आया है. CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के अनुसार, ट्रेडर्स को 82% उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. वहीं, दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 89 फीसदी बनी हुई है. आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव डालती हैं क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जिससे इसे अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है. दूसरी ओर, डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है.

पीएल कैपिटल में कमोडिटीज के हेड आशीष राजोदिया ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि हाल के उतारचढ़ाव के बाद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और ट्रेजरी यील्ड में कमी ने सोने को सहारा दिया है. उन्होंने कहा कि फेड का पॉलिसी स्टेटमेंट और आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े अहम साबित होंगे. वहीं, अगर तेल की कीमतों में फिर से तेजी आती है या फेड की ओर से सख्त रुख देखने को मिलता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है.

गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड में तेजी

अगस्त में गोल्ड ETF में 2,596.70 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो आया, जो जुलाई के 1,559 करोड़ रुपए से अधिक है. यह लगातार तीसरा महीना है जब इसमें पॉजिटिव इनफ्लो देखा गया है. 121.3 टन सोने के साथ, इसके तहत मैनेज की जाने वाली संपत्ति बढ़कर लगभग 1.91 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जबकि साल की शुरुआत से अब तक कुल इनफ्लो 4.22 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

जून से अगस्त के बीच डिजिटल गोल्ड की खरीदारी औसतन 2,500 करोड़ रुपए प्रति माह रही. अगस्त में इसमें पिछले साल के मुकाबले 110 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. गोल्ड फ्यूचर्स ट्रेडिंग में भी तेजी आई. MCX पर औसत दैनिक टर्नओवर पिछले महीने के मुकाबले 38 फीसदी बढ़कर लगभग 29,500 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक है.

दूसरी ओर, फिजिकल डिमांड में कमजोरी आई है. अगस्त में भारत का सोने का इंपोर्ट घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जो जुलाई के मुकाबले 45 फीसदी और पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 58 फीसदी कम है. घरेलू कीमतें ‘इंपोर्ट पैरिटी’ से नीचे रहीं. 11 सितंबर तक डिस्काउंट बढ़कर 78 डॉलर प्रति औंस हो गया, जिसका एक कारण यह भी रहा कि ग्राहकों ने पुराने गहनों के बदले नए गहने खरीदे.

इस दशहरा और दिवाली पर भारतीय क्या कर रहे हैं?

कीमतों में करेक्शन के बावजूद, भारत में त्योहारों के दौरान सोना खरीदना एक अहम परंपरा बनी हुई है. हालांकि, ऊंची कीमतों का असर परिवारों के बजट पर पड़ रहा है. कुछ लोग अब हल्के गहने खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग सोने के सिक्कों, बार और ETF की ओर रुख कर रहे हैं.

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड, राजीव शरण ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि त्योहारों की शुरुआत के समय 24 कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर कारोबार कर रहा था. उन्होंने कहा कि परिवारों ने अपना बजट तो लगभग उतना ही रखा है, लेकिन वे वजन के हिसाब से कम गहने खरीद रहे हैं. वहीं, निवेश के मकसद से सोना खरीदने का चलन बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है, वह सोने के प्रति भारतीयों के लगाव में नहीं, बल्कि इसे खरीदने के तरीके में आया है.

शरण के अनुसार, यह बदलाव दिखाता है कि लोग पारंपरिक गहनों के साथसाथ अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने पर भी ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों की वजह से सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल आने की संभावना कम है, और कीमतें लगभग 5 फीसदी के दायरे में ही ऊपरनीचे होती रहेंगी. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ खरीदार हाल ही में आई कीमतों में गिरावट को खरीदारी का अच्छा मौका मान रहे हैं.

क्या दिवाली तक सोने के दाम फिर बढ़ेंगे?

सोने की कीमतों का भविष्य भारत में त्योहारों और शादियों की मांग, तथा ग्लोबल फैक्टर्स के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा.

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के CEO, विकास गुप्ता का मिंट की रिपोर्ट में कहना है कि बाजार की आम राय के अनुसार, लंबे समय के लिए सोने का आउटलुक पॉजिटिव है. हालांकि, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की उम्मीदें इस आउटलुक को थोड़ा जटिल बना सकती हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली खरीदारी मांग को सहारा देगी, जबकि अन्य निवेशकों द्वारा की जाने वाली बिकवाली कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित कर सकती है.

गुप्ता ने कहा कि अगले 23 वर्षों के लिए सोने को लेकर आम राय यही है कि कीमतें ऊपर जाएंगी. इसी अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों के भी बढ़ने का अनुमान है. हालांकि, ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं.

गुप्ता को उम्मीद है कि भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन घरेलू स्तर पर सोने की कीमतों को कुछ सहारा देगा, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव डाल सकती है. उनके आकलन के अनुसार, त्योहारी सीजन के दौरान भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है, जिसके बाद वे स्थिर हो सकती हैं.

PL कैपिटल के राजोदिया ने कच्चे तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड को भी महत्वपूर्ण कारक बताया है. उन्होंने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से महंगाई की चिंताएं कम हो सकती हैं, जबकि यील्ड घटने से सोने जैसी उन संपत्तियों को फायदा मिल सकता है जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता. इसके विपरीत, अगर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं या फेड का रुख ज्यादा सख्त हो जाता है, तो रिकवरी की प्रक्रिया उलट सकती है.

भारतीय खरीदारों के लिए, सोने की रिकॉर्ड तेजी के बाद हालिया गिरावट से कुछ राहत मिली है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आगे भी लगातार तेजी बनी रहेगी. त्योहारी मांग से निकट भविष्य में घरेलू कीमतों को सहारा मिल सकता है, जबकि ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, करेंसी में उतारचढ़ाव और वैश्विक घटनाक्रम ऐसे मुख्य कारक हैं जिन पर नजर रखना जरूरी होगा.