मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति का संसद में इकबाल काफी कम हो जाएगा. जिस बेबाकी के साथ तक ट्रंप अभी तक फैसले ले रहे थे, वो अब नहीं ले सकेंगे. उम्मीद अब इस बात की भी की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में ट्रंप ईरान से चल रहे वॉर को पूरी तरह से खत्म करने की दिशा में भी बढ़ जाएंगे. अगर ऐसा हुआ तो आने वाले 100 दिन सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि भारत और बाकी दुनिया के लिए भी काफी अहम होंगे.

जानकारों की मानें तो अमेरिकी चुनावों के नतीजों के बाद अगले 100 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में 20 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल सकती है. जी हां, ईरान के साथ वॉर खत्म होते ही कच्चे तेल की सप्लाई में तेजी देखने को मिलेगी, होमुर्ज संकट खत्म हो जाएगा. वहीं दूसरी ओर महंगाई का असर कम होने के बाद सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी भी देखने को मिल सकती है. यहां एक बार अहम है. महंगाई अभी भी लोगों के लिए परेशान करने वाली है.

दिसंबर के महीने में दुनिया के तमाम बड़े सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं. ऐसे में सोने और चांदी की कीमतों में प्रेशर देखने को मिल सकता है. उसके बाद भी सोने के दाम मौजूदा लेवल से 20 फीसदी और चांदी में 45 फीसदी तक की तेजी देखने को मिल सकती है. वैसे इंटरनेशनल बाजारों में सोना और चांदी के दाम में तेजी देखने को मिल रही है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आने वाले 100 दिनों में कच्चे तेल के दाम और सोनचांदी की कीमतों में किस तरह का लेवल देखने को मिल सकता है.

अगले 100 दिन 80 डॉलर से नीचे आएगा तेल

अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इकबाल कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने की पूरी संभावना बन गई है. जानकारों का अनुमान है कि अगले 100 दिनों में ब्रेंट क्रूड के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने की संभावना है. इसका मतलब है किे मौजूदा लेवल से करीब 25 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट देखने को मिल सकती है. ब्लूमबर्ग के अनुसार मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड के दाम 104 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिल रहे हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही है. ऐसे में अगले 100 दिन में अमेरिकी तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे देखने को मिल सकती है.

कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने की प्रमुख वजह

  1. ईरान वॉर में कमी आने की संभावना: अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अमेरिकी संसद में बहुमत ना होने की वजह से फैसले लेने की पॉवर कम होगी. ऐसे में ईरान का वॉर का ज्यादा दिनों चलना संभव नहीं है. आने वाले दिनों में ईरान के साथ वॉर खत्म होने की संभावना है. जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों में दिखाई देगा.
  2. होर्मुज स्ट्रेट का फुल फ्लैश खुल जाना: ईरान के साथ वॉर खत्म होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट का खुलना तय माना जा रहा है. ऐसे में दुनिया 20 फीसदी से ज्यादा की सप्लाई करने वाला रास्ता खुलेगा. जिससे दुनिया भर की शिपमेंट में कोई दिक्कत और परेशानी नहीं होगी. शिपमेंट का रास्ता खुल जाने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में कमी देखने को मिलेगी.
  3. सप्लाई में तेजी आना: होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और अमेरिकी और ईरानी सेना के पीछे हटने के कारण समुद्री सप्लाई में देखी गई रुकावट खत्म हो जाएगी. जिसकी वजह से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में इजाफा होगा. दुनिया के बाजारों में बेहतर सप्लाई होने की वजह से कच्चे तेल के दाम तमाम देशों में कम होंगे.
  4. प्रोडक्शन का बढ़ जाना: मिडिल और दुनिया के बाकी तेल प्रोड्यूसर्स की ओर से पहले से ही प्रोडक्शन बढ़ाया हुआ है. लेकिन आने वाले दिनों में इसमें और ज्यादा बढ़ोतरी देखने को​ मिल सकती है. जानकारों की मानें तो ओपेक और नॉन ओपेक देश अब अपने प्रोडक्शन को और बढ़ा सकते हैं. ताकि कीमतों में लगाम लगाई जा सके. साथ ही वॉर के नुकसान की भरपाई जल्द से जल्द कर सके.
  5. मिडिल ईस्ट की रिफाइनरीज का दोबारा शुरू होना: वॉर की वजह से कतर से लेकर यूएई और सऊदी अरब की कई रिफाइनरीज को काफी नुकसान पहुंचा है. जिन्हें ठीक करने को लेकर तेजी के साथ काम शुरू हो गया है. अगले 100 दिनों में खराब हुई कई रिफाइनरीज दोबारा शुरू होने की संभावना है. जिसकी वजह से गैस और तेल की की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें कम होंगी.
  6. ईरानी तेल से प्रतिबंधों में छूट की संभावना: ये एक बड़ा सवाल है. भले ही अमेरिकी संसद में ट्रंप का इकबाल कम हुआ हो, लेकिन डेमोक्रेट्स के लिए भी ईरान की छवि कुछ खास बेहतर नहीं है. उसके बावजूद ईरानी तेल पर से कुछ समय के लिए प्रतिबंध हटने की संभावना इसिलए है, ताकि अमेरिका और दुनिया के बाकी हिस्से में महंगाई को कम किया जा सके.

कितनी है कच्चे तेल की कीमत

अगर बात मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों की करें तो खाड़ी देशों का तेल ब्रेंट क्रूड 0.14 फीसदी की तेजी के साथ 103.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. वैसे 28 अक्टूबर के बाद से कच्चे तेल की कीमत में 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी क्रूड के दाम 96.19 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिल रहे हैं. इसमें ​भी 11 फीसदी की गिरावट देखी जा चुकी है. नवंबर के महीने में इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिल रही है. जबकि अक्टूबर में ये आंकड़ा 119 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिला था. इसका मतलब है कि इंडियन बास्केट में करीब 12 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

अगले 100 दिनों में कहां होगा सोना और चांदी?

अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति ट्रंप के इकबाल कम होने का असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों पर ही नहीं बल्कि सोना और चांदी की कीमतों में भी देखने को मिलेगा. इंटरनेशनल मार्केट के साथ भारत के वायदा बाजार में इसका असर दिखना शुरू हो गया है. दोनों बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिल रही है. कमोडिटी के जानकारों के अनुसार जियो पॉलिटिकल टेंशन कम होने की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलेगी. अगले 100 दिनों जहां सोने की कीमतों में 20 फीसदी का इजाफा देखने को मिल सकता है. वहीं दूसरी ओर चांदी के दाम करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

विदेशी बाजारों में कहां तक ज सकते हैं सोने और चांदी के दाम

  1. जानकारों की मानें तो विदेशी बाजारों में अगले 100 दिनों में सोने के दाम 4500 से 4800 डॉलर प्रति ओंस तक पहुंच सकते हैं.
  2. इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से सोने की कीमतों में 500 से 800 डॉलर प्रति ओंस की तेजी देखने को मिल सकती है.
  3. मौजूदा समय में अमेरिका के न्यूयॉर्क मार्केट में गोल्ड स्पॉट के दाम करीब 92 डॉलर प्रति ओंस की तेजी के साथ 4,021.46 डॉलर प्रति ओंस पर हैं.
  4. वहीं दूसरी ओर कॉमेक्स मार्केट में गोल्ड फ्यूचर 98 डॉलर प्रति ओंस की तेजी के साथ 4,037.50 डॉलर प्रति ओंस पर देखने को मिल रही है.
  5. अगर बात चांदी की करें तो उसमें आने वाले 100 दिनों में 45 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिल सकता है.
  6. इसका मतलब है कि विदेशी बाजारों में सिल्वर स्पॉट के दाम 72 से 75 डॉलर प्रति ओंस तक जा सकते हैं. यानी मौजूदा लेवल से दाम 25 डॉलर प्रति ओंस से ज्यादा देखने को मिल सकते हैं.
  7. मौजूदा समय में न्यूयॉर्क के स्पॉट मार्केट में सोने के दाम 3.68 फीसदी की तेजी के साथ 52 डॉलर प्रति ओंस के करीब है.
  8. जबकि कॉमेक्स के बाजार में चांदी के दाम 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 51.83 डॉलर प्रति ओंस पर कारोबार कर रहा है.

भारत में सोने और चांदी पर कितना पड़ेगा असर

वहीं बात भारत की करें तो सोने और चांदी की कीमतों में अच्छा खासा देखने को मिल सकता है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। अगर मान लिया जाए तो भारत के वायदा बाजार में सोने की कीमतों में 20 फीसदी की तेजी देखने को मिल सकती है तो सोने के दाम अगले 100 दिनों में 1.65 से 1.70 रुपए प्रति 10 ग्राम देखने को मिल सकते हैं. मंगलवार को वायदा बाजार में सोने के दाम 1,39,452 रुपए देखने को मिले थे. जबकि बुधवार को सोने की कीमत में करीब 3100 रुपए की तेजी देखने को मिली है और दाम 1,42,550 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गए हैं.

वहीं चांदी की कीमतों में अगले 100 दिनों में 45 फीसदी की तेजी देखने को मिलती है तो कीमतें मंगलवार के क्लोजिंग प्राइस 1,79,698 रुपए प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2.60 से 2.80 लाख रुपए के बीच पहुंच सकते हैं. मौजूदा समय में चांदी के दाम में 7,502 रुपए की तेजी देखने को मिल चुकी है और दाम 1.87 लाख रुपए के करीब पहुंच गए हैं.

क्या कहते हैं जानकार?

टीवी9 हिंदी डिजिटल से एक्सक्लूसिवली बात करते हुए केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि अगले 100 दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ सकती है. लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ऑयल रिजर्व 40 साल के लोअर लेवल पर है. जिसे भरने के लिए जमकर खरीदारी होगी. लेकिन दूसरी ओर प्रोडक्शन बढ़ा हुआ है और आने वाले दिनों में और प्रोडक्शन बढ़ सकता है. उन्होंने सोना और चांदी की कीमतों पर बोलते हुए कहा कि तेजी देखने को मिलेगी, लेकिन महंगाई की वजह से दिसंबर में फेड के अलावा कई देश ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं. जिससे थोड़ा प्रेशर बना रह सकता है. उसके बाद भी सोने और चांदी का आउटलुक बेहतर बना हुआ है.