Tata Sons Controversy: टाटा ग्रुप के भीतर टॉप लेवल पर खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की रीअपॉइंटमेंट के खिलाफ अपना मोर्चा और कड़ा कर लिया है. नोएल टाटा ने एक बार फिर बोर्ड के उस प्रस्ताव की वैधता को चुनौती दी है, जिसके तहत चंद्रशेखरन को अगले पांच साल का नया कार्यकाल दिया गया है. इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा देखे गए 26 अक्टूबर के एक लेटर के मुताबिक, नोएल टाटा ने बोर्ड की प्रक्रिया, वोटिंग के नियमों के पालन न होने और हितों के संभावित टकराव जैसे गंभीर मुद्दे उठाए हैं.

नोएल टाटा शुरू से ही चंद्रशेखरन के दोबारा चुने जाने के अलावा टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की योजना के खिलाफ रहे हैं. दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन और टाटा संस के डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन समेत अन्य लोग इस योजना के समर्थन में हैं. 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में नोएल टाटा के कड़े ऐतराज के बावजूद बोर्ड ने ये दोनों बड़े फैसले मंजूर कर लिए. इस प्रस्ताव के जरिए चंद्रशेखरन को 21 फरवरी 2027 से अगले पांच साल के लिए भारी मैनेजमेंट पावर के साथ फिर से नियुक्त किया गया है.
मंत्रालय में फाइलिंग के बाद बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले में ताजा विवाद तब भड़का जब टाटा संस ने एक मौजूदा डायरेक्टर के ऐतराज के बावजूद कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में चंद्रशेखरन की रीअपॉइंटमेंट की पुष्टि करने वाली फाइलिंग कर दी. इसी कदम से नाराज होकर नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय को नया लेटर लिखा. इसमें उन्होंने अपने 30 सितंबर व 8 अक्टूबर के पुराने पत्रों का भी जिक्र किया, जिनमें उन्होंने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग के ड्राफ्ट मिनट्स पर आपत्ति जताई थी. सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस ने उनके 30 सितंबर वाले लेटर का कोई जवाब ही नहीं दिया था.
नोएल टाटा ने आरोप लगाया कि दो बार लिखित में मांगने के बाद भी कंपनी ने उन्हें 17 सितंबर की मीटिंग की ऑडियोवीडियो रिकॉर्डिंग नहीं दी है. उन्हें अभी तक प्रस्ताव की सर्टिफाइड कॉपी या मीटिंग के फाइनल साइन किए हुए मिनट्स भी नहीं मिले हैं. उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी से मीटिंग की रिकॉर्डिंग, फाइनल मिनट्स, वोटिंग रिकॉर्ड के साथ रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जमा किए गए दस्तावेज सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है. उनका कहना है कि मीटिंग की कार्यवाही की जांच करने के लिए ये रिकॉर्डिंग बेहद जरूरी हैं, ताकि ये पता चल सके कि ड्राफ्ट मिनट्स पर उनकी आपत्तियों का समाधान हुआ या नहीं.
एजेंडे में हेरफेर के साथ नियमों की अनदेखी का आरोप
नोएल टाटा ने मीटिंग के एजेंडे पर भी सीधे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि मीटिंग के शुरुआती या बदले हुए एजेंडे में कहीं भी एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की रीअपॉइंटमेंट के प्रस्ताव का साफ जिक्र नहीं था. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। शुरुआती एजेंडे में इसे नॉमिनेशन व रेम्युनरेशन कमेटी की एक सामान्य जानकारी के तौर पर दिखाया गया था. वहीं, बाद में बदले गए एजेंडे में भारतीय रिजर्व बैंक के 11 सितंबर के एक लेटर पर चर्चा को जोड़ा गया.
उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 118 के तहत कोई सिलेक्शन कमेटी ही नहीं बनाई गई. इसके अलावा आर्टिकल 118 व 121 के तहत जरूरी मंजूरी वाले वोट भी नहीं लिए गए. नोएल टाटा ने कंपनी से साफ कहा है कि वो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को सूचित करे कि इस प्रस्ताव की वैधता विवादों में है. साथ ही जब तक मीटिंग का रिकॉर्ड पूरी तरह तय नहीं हो जाता, तब तक इस दिशा में कोई भी अगला कदम न उठाया जाए.
वेणु श्रीनिवासन के कारोबारी रिश्तों पर उठे सवाल
इस लेटर का एक बहुत बड़ा हिस्सा हितों के टकराव से जुड़ा है. ये मामला वेणु श्रीनिवासन और चंद्रशेखरन के बीच टाटा संस से अलग चल रहे कथित कारोबारी रिश्तों से जुड़ा है. नोएल टाटा ने ‘हानो वन वेयरहाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े खुलासों पर सवाल उठाए हैं. बताया जाता है कि इस कंपनी पर चंद्रशेखरन की पत्नी व बेटे का नियंत्रण है. इस कंपनी के टीवीएस मोटर कंपनी के साथ कारोबारी रिश्ते की बात सामने आई है, जहां वेणु श्रीनिवासन चेयरमैन एमेरिटस हैं.
नोएल टाटा ने आरोप लगाया कि हितों के इस संभावित टकराव के बावजूद श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की रीअपॉइंटमेंट से जुड़ी चर्चा में हिस्सा लिया और वोटिंग भी की. उन्होंने इस मामले से जुड़े सभी खुलासों, बातचीत के रिकॉर्ड के साथ इस बात की जानकारी मांगी है कि बोर्ड ने इस मुद्दे पर कैसे विचार किया. इसके अलावा उन्होंने 3 सितंबर को हुई नॉमिनेशन व रेम्युनरेशन कमेटी की मीटिंग के रिकॉर्ड व रीअपॉइंटमेंट पर ली गई कानूनी राय का ब्योरा भी मांगा है.
नोएल टाटा ने मांग की है कि सिलेक्शन कमेटी के गठन के अलावा आरबीआई व टाटा ट्रस्ट्स के पत्रों पर विचार करे. उन्होंने रीअपॉइंटमेंट से जुड़े तमाम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है. लेटर के अंत में उन्होंने साफ लिखा कि कंपनी के सही गवर्नेंस के लिए ये मुद्दे बेहद अहम हैं, इसलिए उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब की उम्मीद है. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस खत को प्रस्ताव की वैधता की स्वीकृति बिल्कुल न समझा जाए. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अब टाटा संस की ऑडिट कमेटी नोएल टाटा के इस लेटर पर विचार कर सकती है.



