सरकारी तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही में भारी नुकसान हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं, लेकिन इसके बावजूद कंपनियां लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम कीमत पर बेचती रहीं. हालांकि, रिफाइनरी कारोबार से कंपनियों को अच्छी कमाई हुई, लेकिन ईंधन बेचने में हुए नुकसान ने इस मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया. इसी कारण दोनों कंपनियां इस तिमाही में घाटे में पहुंच गईं.

HPCL को 12,265 करोड़ रुपये का नुकसान
HPCL ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. वहीं केवल कंपनी के मुख्य कारोबार के आधार पर देखें तो 11,526 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले 4,371 करोड़ रुपये का लाभ मिला था. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। हालांकि, कंपनी की कुल आय बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है. यानी बिक्री तो बढ़ी, लेकिन बढ़ती लागत के कारण कंपनी को फायदा नहीं मिल सका.
BPCL को हुआ 3,962 करोड़ रुपये का घाटा
BPCL भी अप्रैलजून तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये के घाटे में रही. यह कंपनी का लगातार 15 तिमाहियों के बाद पहला नुकसान है. पिछले साल इसी तिमाही में BPCL ने 6,124 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. कंपनी की कुल आय बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल यह 1.35 लाख करोड़ रुपये थी। यानी कारोबार बढ़ा, लेकिन मुनाफा नहीं बच सका.
क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?
इस साल वेस्ट एशिया में बढ़े तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आ गया. आमतौर पर जब कच्चा तेल महंगा होता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जाती हैं. लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए. बाद में मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल के दाम 7.50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा साथ ही घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ाई गई, लेकिन तब तक कंपनियों को काफी नुकसान हो चुका था.



