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राजस्थान के जैसलमेर के पास बसा कुलधरा गांव आज भी अपने रहस्य और वीरानी के लिए जाना जाता है. कभी यहां चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन अब यही जगह सुनसान पड़ी है. इसे राजस्थान के कथित ‘भूतिया गांवों’ में गिना जाता है. यहां की रहस्यमयी कहानी ऐसी है कि कई लोग दिन के उजाले में भी इस जगह पर जाने से डरते हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। कहा जाता है कि एक ताकतवर मंत्री की जिद और धमकी के बाद गांव के लोगों ने रातों-रात अपना घर छोड़ दिया था.

कुलधरा की सबसे हैरान करने वाली बात यहां मौजूद पुराने मकान और मंदिर हैं. रेगिस्तान के बीच बने ये घर आज भी काफी खूबसूरत नजर आते हैं. कई जगहों को देखकर ऐसा लगता है जैसे कुछ देर पहले तक यहां लोग रहते रहे हों. गलियां मौजूद हैं, मकान खड़े हैं और मंदिर भी दिखाई देते हैं, लेकिन इन सबके बीच इंसान नजर नहीं आता.

कहां है कुलधरा और कैसा दिखता है?

कुलधरा जैसलमेर शहर से करीब 17 से 20 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है. चारों तरफ फैले थार के रेगिस्तान के बीच बना यह गांव आज पूरी तरह आबाद नहीं है. यहां पुराने पत्थर के मकानों के अवशेष, संकरी गलियां, मंदिर और टूटे हुए ढांचे देखे जा सकते हैं. कभी यहां पालीवाल ब्राह्मण समुदाय के लोग रहते थे. कठिन रेगिस्तानी इलाके में रहने के बावजूद उन्होंने खेती और पानी बचाने के बेहतर तरीके विकसित किए थे. इसी वजह से यह इलाका लंबे समय तक समृद्ध माना जाता था.

कब बसाया गया था कुलधरा?

राजस्थान पर्यटन से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, कुलधरा की स्थापना करीब 1291 में हुई थी. यह अकेला गांव नहीं था, बल्कि जैसलमेर इलाके में बसे करीब 84 पालीवाल गांवों के समूह का हिस्सा था. ऐतिहासिक विवरणों में कुलधरा की आबादी काफी बड़ी बताई गई है. एक समय यहां लगभग 400 से 600 मकान और करीब 1,500 से 1,600 लोग रहते थे. लेकिन 19वीं सदी की शुरुआत तक यहां आबादी कम होने लगी थी. करीब 1815 तक लगभग 800 लोगों के रहने की बात सामने आती है.

आखिर गांव छोड़कर क्यों चले गए लोग?

instagram-@bhushanmj

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कुलधरा के खाली होने को लेकर सबसे ज्यादा मशहूर कहानी जैसलमेर रियासत के मंत्री सलीम सिंह से जुड़ी है. कहा जाता है कि उसकी नजर गांव के मुखिया की बेटी पर थी और वह उससे शादी करना चाहता था. गांव वालों ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया. लोककथा के अनुसार, इसके बाद सलीम सिंह ने ग्रामीणों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी. इसके बाद कुलधरा और आसपास के पालीवाल गांवों के लोगों ने एक साथ यहां से जाने का फैसला किया. कहानी के मुताबिक, लोग रातों-रात अपने घर छोड़कर चले गए. जाते समय उन्होंने कथित तौर पर श्राप दिया कि इस जमीन पर दोबारा कोई आबाद नहीं हो पाएगा.

क्या सच में एक रात में गायब हो गए थे लोग?

यही सवाल कुलधरा के रहस्य को सबसे ज्यादा बढ़ाता है. हालांकि, इतिहास में रातों-रात पूरा गांव खाली होने की कहानी को पुख्ता तौर पर साबित करने वाले पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिलते. कुछ इतिहासकार मानते हैं कि गांव का खाली होना अचानक हुई एक घटना के बजाय लंबे समय तक चले बदलावों का नतीजा हो सकता है. आर्थिक स्थिति खराब होना, पानी की समस्या, करों का बढ़ना और व्यापारिक रास्तों में बदलाव जैसे कारणों ने लोगों को दूसरे इलाकों में जाने के लिए मजबूर किया होगा.

कुलधरा को भूतिया गांव क्यों कहा जाता है?

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सालों से खाली पड़े मकान, सुनसान रास्ते और गांव से जुड़ी श्राप वाली कहानी ने कुलधरा को ‘भूतिया गांव’ की पहचान दे दी. कई लोग दावा करते हैं कि यहां रात में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं और लोगों को असामान्य अनुभव होते हैं. हालांकि, इन दावों का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. आसपास रहने वाले कई लोगों ने भी ऐसी किसी डरावनी घटना की बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि कुलधरा को भूतिया बताने वाली बातें मुख्य रूप से लोककथाओं और लोगों की मान्यताओं पर आधारित हैं.

अब कुलधरा में क्या होता है?

आज कुलधरा एक संरक्षित विरासत स्थल के रूप में देखा जाता है. यहां पर्यटक पुराने घरों, मंदिरों और गलियों को देखने पहुंचते हैं. इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के अलावा फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता भी इस जगह की ओर आकर्षित होते हैं. कुलधरा की खासियत यही है कि यहां इतिहास और रहस्य दोनों साथ दिखाई देते हैं. करीब दो सदियों से वीरान खड़ा यह गांव आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर इसके लोग किन परिस्थितियों में अपना सब कुछ छोड़कर चले गए थे.