Retirement planning: अपनी पहली नौकरी के साथ ही रिटायरमेंट के बारे में सोचना ज्यादातर लोगों को अजीब लगता है. अक्सर हम सोचते हैं कि बुढ़ापे के लिए पैसा जमा करने में अभी बहुत वक्त है, पहले जीवन की दूसरी जरूरतें पूरी कर लें. लेकिन अगर आप भी यही सोचकर रिटायरमेंट प्लानिंग टाल रहे हैं, तो यह आपकी जिंदगी की सबसे बड़ी वित्तीय भूल साबित हो सकती है. निवेश के एक साधारण से कैलकुलेशन ने यह साबित किया है कि अगर आप 25 साल के बजाय 45 की उम्र में रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करते हैं, तो आपकी हर महीने की SIP की रकम 233 फीसदी तक बढ़ जाती है. यानी जिस उम्र में आप अपनी जिम्मेदारियों से सुकून ढूंढ रहे होंगे, उस वक्त आपकी जेब पर निवेश का एक भारीभरकम बोझ आ गिरेगा.

25, 35 या 45… उम्र के साथ कैसे बढ़ता है निवेश का बोझ?

इसे एक बेहद आम उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आज के समय में आपके घर का महीने का खर्च 1 लाख रुपये है. अगर हम 7 प्रतिशत की महंगाई दर, 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट और 85 साल तक के जीवनकाल का अनुमान लगाएं, साथ ही निवेश पर 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मान लें, तो आंकड़े चौंकाने वाले आते हैं.

अगर आप 25 साल की उम्र से ही निवेश शुरू कर देते हैं, तो इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आपको हर महीने केवल 43,994 रुपये की SIP करनी होगी. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। वहीं, अगर आप 10 साल की देरी करते हैं और 35 की उम्र में शुरुआत करते हैं, तो यह मासिक निवेश 74 प्रतिशत बढ़कर 76,550 रुपये हो जाएगा. लेकिन असली झटका तब लगता है जब कोई 45 की उम्र में रिटायरमेंट के लिए जागता है. 20 साल की इस देरी के कारण मासिक SIP का बोझ सीधे 233 प्रतिशत बढ़कर 1.46 लाख रुपये प्रति माह पर पहुंच जाता है.

क्यों इतनी तेजी से बड़ा हो जाता है SIP का आंकड़ा?

इसका जवाब है, ‘कंपाउंडिंग’ यानी चक्रवद्धि ब्याज की ताकत. जब आप 25 की उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो आपके पैसों को बढ़ने और कंपाउंड होने के लिए पूरे 35 साल का लंबा समय मिलता है. वहीं, 45 की उम्र में शुरुआत करने वाले के पास इसी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए महज 15 साल बचते हैं.

फिनोवेट की सहसंस्थापक नेहल मोता इस गणित को समझाते हुए कहती हैं, “25 साल के युवा के पास रिटायरमेंट से पहले निवेश के लिए 35 साल होते हैं, जिससे हर महीने की SIP की रकम काफी छोटी और आसान लगती है. 45 साल के व्यक्ति के पास सिर्फ 15 साल होते हैं. इसलिए अगर 60 की उम्र में सुकून की जिंदगी चाहिए, तो बड़ी सैलरी आने का इंतजार मत कीजिए, बल्कि आज और अभी से निवेश शुरू कर दें.”

दिलचस्प बात यह है कि 7 प्रतिशत महंगाई दर के हिसाब से 60 साल की उम्र में 25 साल वाले निवेशक का मासिक खर्च 10.68 लाख रुपये होगा. वहीं, 45 साल वाले निवेशक के लिए यह 2.76 लाख रुपये प्रति माह होगा. भविष्य में कम पैसों की जरूरत होने के बावजूद, निवेश के लिए समय कम बचने के कारण 45 साल वाले व्यक्ति को आज ज्यादा बड़ी SIP करनी पड़ती है.

आपके मौजूदा खर्च के हिसाब से समझिए देरी का नुकसान

यह गणित सिर्फ 1 लाख रुपये खर्च वालों पर लागू नहीं होता, बल्कि हर तरह की लाइफस्टाइल में देरी का नुकसान बराबर होता है. अगर आपका मौजूदा मासिक खर्च 50,000 रुपये है, तो 25 की उम्र में आपको केवल 21,997 रुपये महीने की SIP चाहिए. लेकिन 45 की उम्र में यही रकम बढ़कर करीब 73,000 रुपये महीना हो जाएगी. इसी तरह, अगर आपका खर्च 1.5 लाख रुपये है, तो 25 की उम्र में आपकी SIP 65,991 रुपये होगी, जो 45 की उम्र में देरी करने पर सीधे 2.20 लाख रुपये प्रति माह के विशाल आंकड़े को छू लेगी.

सबसे ज्यादा रिटर्न नहीं, समय है असली चाबी

इस पूरे गणित से एक बात साफ है कि एक सफल रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब शेयर बाजार में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड को खोजना नहीं है. असल जादू अपने पैसों को चक्रवृद्धि होने के लिए पर्याप्त समय देने में छिपा है. अपनी 20 से 30 वर्ष की उम्र के बीच शुरू की गई एक छोटी सी मासिक SIP भी आने वाले तीन दशकों में आपके लिए एक ऐसा विशाल रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकती है, जो बुढ़ापे में आपको किसी पर निर्भर नहीं रहने देगा.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.