हाथरस की चर्चित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना के पीड़ित परिवार के पुनर्वास को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है. हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार को सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल में बसाने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए. इसके लिए नोएडा या गाजियाबाद जैसे शहरों में पुनर्वास पर विचार करने को कहा गया है. सरकार को आदेश के अनुपालन के लिए तीन महीने का समय दिया गया है.

हाथरस कांड के बाद पीड़ित परिवार की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर हाईकोर्ट लगातार निगरानी कर रहा है. हाईकोर्ट ने पहले भी परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुरूप सरकारी या सरकारी उपक्रम में नौकरी देने और परिवार को हाथरस से बाहर बसाने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया था. लेकिन लंबे समय बाद भी पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई.

अड़ियल रवैया नहीं चलेगा कोर्ट

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठने सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए साफ किया कि कोर्ट के आदेशों का अनुपालन टालने वाला रवैया स्वीकार नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने परिवार की सुरक्षा और सामान्य जीवन जीने के अधिकार को गंभीरता से लेते हुए सरकार को पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए. कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि परिवार के सदस्यों को सुरक्षा कारणों से रोजमर्रा के कामों में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. सीआरपीएफ जवान उनकी सुरक्षा में साथ चलते हैं, जिससे बाजार जाने, डॉक्टर को दिखाने और बच्चों को स्कूल ले जाने तक की गतिविधियां सामान्य नहीं रह गई हैं.

2022 में ही दिया था बाहर बसाने का आदेश

हाथरस कांड के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2022 में परिवार के पुनर्वास को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे. कोर्ट ने सरकार से परिवार को हाथरस से बाहर प्रदेश में किसी उपयुक्त स्थान पर बसाने और परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुरूप रोजगार देने पर विचार करने को कहा था.

इसके बावजूद जुलाई 2024 में भी हाईकोर्ट को बताया गया था कि परिवार का दूसरे स्थान पर पुनर्वास नहीं हो सका है. कोर्ट ने तब भी अपने पुराने आदेश के अनुपालन की समीक्षा करने की बात कही थी.

सुरक्षा के साये में गुजर रही जिंदगी

हाथरस की घटना के बाद परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. पहले भी सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने परिवार और गवाहों की सुरक्षा के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी थी. परिवार के घर के आसपास पुलिस और पीएसी की तैनाती के साथ निगरानी के अन्य इंतजाम भी किए गए थे. लेकिन कोर्ट के सामने परिवार की ओर से लगातार यह चिंता सामने आती रही है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद वे अपने पुराने माहौल में सहज और सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में अब हाईकोर्ट ने पुनर्वास के मुद्दे को फिर से गंभीरता से उठाया है.

सरकार के सामने तीन महीने में समाधान की चुनौती

हाईकोर्ट के ताजा रुख के बाद अब राज्य सरकार के सामने परिवार के पुनर्वास को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने की चुनौती है. नोएडा या गाजियाबाद जैसे शहर में परिवार को बसाने का विकल्प इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे परिवार को हाथरस से बाहर सुरक्षित माहौल मिल सकता है और शिक्षा, रोजगार तथा अन्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच भी संभव होगी.

क्या है हाथरस घटना

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 14 सितंबर, 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की कथित घटना सामने आई थी, घटना के करीब दो सप्ताह बाद दिल्ली के एक अस्पताल में युवती की मौत हो गई थी. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने बयान में पीड़िता ने चार आरोपियों पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था. यह भी आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना रात में पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया था. हालांकि, पुलिस ने इस दावे को गलत बताया था.