आईवीएफ के दौरान महिलाओं को कुछ हार्मोन वाली दवाएं दी जाती हैं. इसलिए कई लोगों को लगता है कि ये दवाएं बाद में दूध बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, आईवीएफ में दी जाने वाली हार्मोन दवाएं केवल इलाज के शुरुआती चरण तक ही काम करती हैं. प्रेगनेंसी कंसीव होने बाद इन्हें धीरेधीरे बंद कर दिया जाता है. बच्चे के जन्म तक इन दवाओं का शरीर पर कोई असर नहीं रहता और न ही ये दूध बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं.

आईवीएफ का चलन आज काफी बढ़ गया है. बढ़ती उम्र में मां बनने का सपना पूरा करने वाली इस टेक्निक को लेकर कई सवाल भी उठते हैं. डिलीवरी के बाद क्या ब्रेस्टफीडिंग में प्रॉब्लम आती है? एक्सपर्ट से जानें…

एक्सपर्ट ने क्या कहा

आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. सुतापा सेन बताती हैं कि बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान पूरी तरह शरीर के प्राकृतिक हार्मोन पर निर्भर करता है. प्लेसेंटा बाहर आने के बाद गर्भावस्था वाले हार्मोन कम हो जाते हैं और प्रोलैक्टिन हार्मोन दूध बनने में मदद करता है. जब बच्चा दूध पीता है, तब ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है, जिससे दूध आसानी से बाहर आता है. ये प्रोसेस नेचुरली प्रेगनेंट होने और आईवीएफ यानी दोनों में बिल्कुल एक जैसी होती है.

कई शोध बताते हैं कि स्तनपान की सफलता इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि मां और बच्चे को जन्म के बाद कैसी देखभाल मिलती है, न कि गर्भधारण किस तरीके से हुआ. जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना, मां और बच्चे का त्वचा से त्वचा का संपर्क , सही तरीके से बच्चे को स्तन से लगाना, मां और बच्चे का साथ रहना तथा बारबार स्तनपान कराना, ये सभी सफल स्तनपान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

क्या ब्रेस्टफीडिंग में आती है प्रॉब्लम

एक्सपर्ट बताती हैं कि आईवीएफ से प्रेगनेंट होने वाली कुछ महिलाओं को स्तनपान में दिक्कत हो सकती है, लेकिन इसका कारण ये नहीं होती. अक्सर इसकी वजह उम्र अधिक होना, सीसेक्शन से डिलीवरी, जुड़वां गर्भ, समय से पहले प्रसव, गर्भावस्था में मधुमेह या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां होती हैं. ये समस्याएं स्तनपान शुरू होने में देरी कर सकती हैं, लेकिन IVF इसका कारण नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि बच्चे के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कर देना चाहिए और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए. मां का दूध बच्चे को पूरा पोषण देता है और संक्रमण, दस्त तथा आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम करता है. वहीं, मां को भी जल्दी रिकवरी, कुछ प्रकार के कैंसर और मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम में कमी जैसे लाभ मिलते हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

डॉक्टर सलाह देते हैं कि IVF से गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ही अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ, फर्टिलिटी विशेषज्ञ या स्तनपान सलाहकार से स्तनपान की योजना पर चर्चा करनी चाहिए. यदि दूध कम बन रहा हो, बच्चा सही से दूध न पी रहा हो या स्तनों में दर्द हो, तो समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेने से समस्या का समाधान आसानी से हो सकता है.