नई दिल्ली/टोक्यो। भारत में सेमीकंडक्टर और अन्य हाईटेक फैक्ट्रियां स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के दौरान घोषणा की कि विशेष मशीनों और उपकरणों के लिए BIS प्रमाणन संबंधी अड़चनों को कम करने के लिए नया ढांचा तैयार किया जाएगा।

टोक्यो में जापानी सेमीकंडक्टर और एआई कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में गोयल ने कहा कि सरकार कंपनी, उद्योग, उत्पाद या किसी खास परियोजना के स्तर पर छूट देने की व्यवस्था पर काम करेगी। इसका मकसद हाईटेक विनिर्माण इकाइयों के लिए जरूरी उपकरणों और कलपुर्जों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

सेमीकंडक्टर कंपनियों को कैसे होगा फायदा?

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाने के लिए बड़ी मात्रा में विशेष मशीनरी और अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत होती है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि अनिवार्य प्रमाणन और जटिल प्रक्रियाओं के कारण कई बार उपकरणों की आपूर्ति में देरी होती है। प्रस्तावित ढांचे से इन बाधाओं को कम करने और निवेश परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

60 दिनों में नियमों में बदलाव की तैयारी

जापान दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने यह भी संकेत दिया कि सेमीकंडक्टर और ऑटो कंपोनेंट निर्माण क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए करीब दो महीने के भीतर नियमों में बदलाव और नए प्रावधान लाए जा सकते हैं।

भारतजापान साझेदारी पर जोर

भारत और जापान को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वाभाविक साझेदार बताते हुए गोयल ने कहा कि भारत के पास विशाल बाजार और इंजीनियरिंग प्रतिभा है, जबकि जापान सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री, विशेष रसायन और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत क्षमता रखता है। भारत की सेमीकंडक्टर मांग 2032 तक करीब 150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

बड़ी तस्वीर

सरकार का फोकस केवल चिप फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन विकसित करने पर है। मंजूरी और प्रमाणन प्रक्रियाओं में राहत मिलने से विदेशी निवेश आकर्षित करने, उत्पादन शुरू करने में लगने वाला समय घटाने और ‘मेक इन इंडिया’ को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।