मानसून में मौसम सुहावन हो जाता है लेकिन ये अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आता है. डेंगूमलेरिया के खतरे का बढ़ना नॉर्मल है लेकिन इसका हमारे पाचन से भी कनेक्शन होता है. बारिश के मौसम में हमारा पाचन नेचुरली कमजोर हो जाता है. इसके पीछे क्या कारण है चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं…

मानसून में पाचन का कमजोर होना डॉ. जतिंदर सिंह भोगल कहते हैं कि बारिश के मौसम में बहुत लोगों को लगता है कि उनका पेट अचानक कमजोर हो गया है. लेकिन असल में ज्यादातर बार ऐसा नहीं होता. इस मौसम में खाना थोड़ा धीरे पचता है और पेट में इंफेक्शन होने का चांस भी बढ़ जाता है, इसलिए पेट में गड़बड़ रहने लगती है.

हवा में नमी है वजह डॉक्टर कहते हैं कि बारिश में हवा में नमी ज्यादा होती है, तो शरीर की काम करने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है. इसका असर पेट पर भी पड़ता है और खाना पचने में ज्यादा समय लग सकता है. इसलिए नॉर्मल खाना खाने के बाद भी पेट बहुत भरा भरा, फूला हुआ, गैस वाला या अजीब सा लग सकता है.

ऑयली और जंक फूड खाना एक्सपर्ट के मुताबिक बारिश में चाय के साथ पकौड़े, समोसे, चाट या दूसरी तली भुनी, मसालेदार और तेल वाली चीजें भी ज्यादा खाई जाती हैं. ये चीजें वैसे ही पेट के लिए थोड़ी भारी होती हैं. इनसे एसिडिटी या रिफ्लक्स बढ़ सकता है. रिफ्लक्स मतलब पेट की जलन सीने या गले तक आने लगती है.

गंदगी बनती है बड़ा कारण बारिश का पानी और जगह जगह जमा पानी खाने और पीने के पानी को गंदा कर सकता है. इसमें बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स जैसे छोटे छोटे कीटाणु आ सकते हैं, जिनसे पेट में इंफेक्शन हो जाता है. फल और सब्जियां भी गंदे पानी के संपर्क में आ सकती हैं. जो खाना बाहर रखा हो या साफ सफाई से न बना हो, वो इस नम मौसम में जल्दी खराब हो सकता है. इसी वजह से इस समय दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़ और फूड पॉइजनिंग की दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है.

इन बातों का रखें ध्यान डॉक्टर ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि आपका पेट हमेशा के लिए कमजोर हो रहा है. बस इस मौसम में पेट को एक साथ कई चीजें झेलनी पड़ती हैं, खाना धीरे पचना, भारी खाना और कीटाणुओं के संपर्क में ज्यादा आना. इसलिए कोशिश करें कि ताजा बना हुआ, हल्का खाना खाएं और साफ पानी पिएं. इससे पेट की दिक्कत काफी हद तक कम हो सकती है.’