Arah News: बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित पूर्व कस्टम अधिकारी रामकुमार सिंह हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. शुक्रवार तड़के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धोबहा के पास पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ में हत्याकांड का मुख्य शूटर पवन यादव गोली लगने से घायल हो गया. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में पवन यादव के दाहिने पैर में घुटने के नीचे गोली लगी है. घायल शूटर को पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है. घटना की जानकारी मिलते ही भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित और SDPO सुशील कुमार मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू की.

घायल शूटर की पहचान नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा हाउसिंग निवासी निर्मल यादव के 22 वर्षीय पुत्र पवन यादव के रूप में हुई है. वह रामकुमार सिंह पर पहली गोली चलाने वाला मुख्य शूटर था. SP अवधेश दीक्षित और SDPO सुशील कुमार ने बताया कि हिरासत में पूछताछ के दौरान पवन यादव ने हत्या में इस्तेमाल हथियार को छिपाने की जगह बताई थी. पुलिस टीम जब उसे लेकर हथियार बरामद करने पहुंची, तो उसने मौके का फायदा उठाकर छिपाए गए हथियार से पुलिस पर अचानक फायरिंग कर दी. पुलिस द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद जब पवन ने गोलीबारी जारी रखी, तो आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिससे गोली उसके पैर में लगी और उसे दबोच लिया गया.
15 अक्टूबर को हुई थी हत्या, 7 लाख में दी गई थी सुपारी
15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे आरा के नवादा थाना क्षेत्र स्थित कनकपुरी मोहल्ले में टहलने निकले रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर रामकुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपियों ने रामकुमार सिंह की हत्या के लिए करीब 7 लाख रुपये की सुपारी दी थी. हथियार और पिस्टल खरीदने के लिए पहली किश्त के रूप में 2 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे.
इस मामले में पुलिस पूर्व में 5 आरोपियों को जेल भेज चुकी है. जिनमें पिंटू कुमार , मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की , चंदन सिंह और अभिषेक कुमार और टीपू शामिल हैं.
14 कट्ठा जमीन का विवाद बनी हत्या की मुख्य वजह
SP अवधेश दीक्षित के अनुसार, हत्या के पीछे सिंगही स्थित 14 कट्ठा जमीन का विवाद है . रामकुमार सिंह के बेटे के नाम पर यह जमीन 2006 से थी और 2020 में उन्होंने बाउंड्री भी करवाई थी. विपक्षी गुट ने 2025 में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर अलगअलग लोगों के नाम रजिस्ट्री और म्यूटेशन करा दिया था. पुलिस अब इस बिंदु की भी जांच कर रही है कि जब रामकुमार सिंह का लंबे समय से कब्जा था, तो म्यूटेशन कैसे हुआ. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पवन यादव से मिली जानकारी के आधार पर वारदात में शामिल अन्य बाइक सवार शूटरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है.



