Agra Railway Land Dispute: देशभर में यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रेलवे लगातार अपने नेटवर्क और संसाधनों का विस्तार कर रही है। लेकिन कई बार रेलवे की भूमि पर स्वामित्व को लेकर ऐसे विवाद सामने आ जाते हैं, जिनमें वर्षों से बसे लोगों और व्यापारियों की आजीविका दांव पर लग जाती है। ऐसा ही एक मामला उत्तर मध्य रेलवे के आगरा रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन क्षेत्र से सामने आया है।

रेलवे प्रशासन ने स्टेशन परिसर से सटी करीब 36 वर्ग मीटर भूमि को अपनी संपत्ति बताते हुए वहां वर्षों से व्यापार कर रहे 40 दुकानदारों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि 15 दिनों के भीतर भूमि खाली करें, अन्यथा रेलवे प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
आजादी से पहले का बाजार, चार पीढ़ियों का कारोबार
जिस बाजार को खाली कराने की कार्रवाई शुरू हुई है, उसे व्यापारी आजादी से पहले का बाजार बताते हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि उनके परिवार की चार पीढ़ियां इसी स्थान पर व्यापार करती आ रही हैं। ऐसे में अचानक नोटिस मिलने से उनके सामने रोजीरोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
व्यापारियों का दावा— यह रेलवे नहीं, छावनी बोर्ड की जमीन
प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि संबंधित भूमि रेलवे की नहीं बल्कि आगरा छावनी बोर्ड की है। उनका दावा है कि उनके पास छावनी बोर्ड द्वारा जारी रसीदें मौजूद हैं, जिनके आधार पर वे वर्षों से शुल्क जमा करते रहे हैं। कुछ व्यापारियों का यह भी कहना है कि उनके पास संबंधित संपत्ति की रजिस्ट्री भी उपलब्ध है। ऐसे में रेलवे द्वारा भूमि पर अपना दावा जताते हुए नोटिस जारी करना उनकी समझ से परे है।
250 परिवारों की आजीविका पर संकट
नव भारत से बातचीत में व्यापारियों ने भावुक होकर कहा कि यह केवल 40 दुकानों का मामला नहीं है। प्रत्येक दुकान से कई कर्मचारी जुड़े हुए हैं। यदि दुकानों को हटाया गया तो करीब 200 से 250 परिवार, यानी लगभग 4 से 5 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।
रेलवे का पक्ष भी स्पष्ट
इस पूरे मामले में जब नव भारत ने रेलवे अधिकारियों से बातचीत की तो उनका स्पष्ट कहना था कि संबंधित की है और न्यायालय के माध्यम से रेलवे अपने अधिकार स्थापित कर चुका है। अधिकारियों के अनुसार अब व्यापारियों को हर हाल में भूमि खाली करनी होगी और रेलवे अपनी संपत्ति वापस लेकर ही रहेगा।
अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर
एक ओर व्यापारी अपने दस्तावेजों के आधार पर भूमि पर अपना अधिकार जता रहे हैं, तो दूसरी ओर रेलवे का हवाला देकर कब्जा हटाने की तैयारी में है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान निकलता है या फिर यह विवाद एक बार फिर न्यायालय की चौखट तक पहुंचता है।



