जब भी लैपटॉप अचानक धीमा होने लगता है, तो ज्यादातर लोग इसकी वजह कम रैम, पुराना प्रोसेसर या स्टोरेज की समस्या को मानते हैं। कई बार लोग नया लैपटॉप खरीदने या हार्डवेयर अपग्रेड करने तक का विचार बना लेते हैं। लेकिन असलियत यह है कि कई मामलों में लैपटॉप की धीमी स्पीड के पीछे बैटरी और पावर मैनेजमेंट सेटिंग्स भी जिम्मेदार होती हैं।
आज के मॉडर्न लैपटॉप को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ के बीच संतुलन बनाए रखें। यही वजह है कि सिस्टम कई बार बिजली बचाने के लिए अपने आप प्रोसेसर की स्पीड कम कर देता है। नतीजतन, लैपटॉप सुस्त महसूस होने लगता है और ऐप्स खुलने में ज्यादा समय लगने लगता है।
पावर सेविंग मोड क्यों बन जाता है परेशानी?

अधिकांश Windows लैपटॉप डिफॉल्ट रूप से ‘Balanced’ पावर मोड पर सेट होते हैं। यह मोड सिस्टम के काम के हिसाब से प्रोसेसर की स्पीड बढ़ाता या घटाता रहता है। जब आप वीडियो एडिटिंग, गेमिंग या मल्टीटास्किंग जैसे भारी काम करते हैं, तब प्रोसेसर अपनी पूरी क्षमता पर काम करने की कोशिश करता है।
हालांकि, स्पीड को बारबार एडजस्ट करने की इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। ऐसे में लैपटॉप कभीकभी धीमा और कम रिस्पॉन्सिव महसूस होने लगता है।
बेस्ट परफॉर्मेंस मोड कर सकता है कमाल
अगर आपका लैपटॉप अक्सर स्लो महसूस होता है, तो सबसे पहले पावर मोड की जांच करें। Windows की सेटिंग्स में जाकर ‘Power & Battery’ सेक्शन खोलें और ‘Best Performance’ विकल्प को चुनें।
इस सेटिंग को एक्टिव करने के बाद सिस्टम प्रोसेसर को अधिक आक्रामक तरीके से इस्तेमाल करता है और जरूरत पड़ने पर तेजी से स्पीड बढ़ाता है। इससे एप्लिकेशन जल्दी खुलते हैं और मल्टीटास्किंग का अनुभव बेहतर हो सकता है।
ज्यादा गर्मी भी घटा देती है लैपटॉप की स्पीड
कई बार समस्या सिर्फ पावर सेटिंग्स तक सीमित नहीं होती। जब लैपटॉप लंबे समय तक भारी काम करता है, तो उसका तापमान बढ़ने लगता है। अधिक गर्मी से हार्डवेयर को सुरक्षित रखने के लिए सिस्टम अपनी स्पीड अपनेआप कम कर देता है। इस प्रक्रिया को थर्मल थ्रॉटलिंग कहा जाता है।
थर्मल थ्रॉटलिंग की वजह से प्रोसेसर की क्षमता घट जाती है और लैपटॉप पहले की तुलना में काफी धीमा महसूस होने लगता है।
CPU की स्पीड थोड़ा कम करना भी हो सकता है फायदेमंद
सुनने में यह अजीब लग सकता है कि प्रोसेसर की स्पीड कम करने से परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है, लेकिन कई पुराने लैपटॉप में यह ट्रिक प्रभावी साबित होती है।
इसके लिए कंट्रोल पैनल में जाकर ‘Power Options’ खोलें और ‘Advanced Power Settings’ में प्रवेश करें। यहां ‘Processor Power Management’ सेक्शन में जाकर ‘Maximum Processor State’ को 99 प्रतिशत पर सेट किया जा सकता है।
इससे प्रोसेसर जरूरत से ज्यादा गर्म नहीं होता और बारबार होने वाली थर्मल थ्रॉटलिंग से बचा जा सकता है। परिणामस्वरूप, लैपटॉप अधिक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन देने लगता है।
मिनिमम प्रोसेसर स्टेट बढ़ाने से मिल सकती है तेजी
आप ‘Minimum Processor State’ को लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं। ऐसा करने से प्रोसेसर पूरी तरह पावरसेविंग मोड में नहीं जाता और जरूरत पड़ने पर तुरंत तेज स्पीड पर काम करना शुरू कर देता है।
यह सेटिंग उन लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है जो लगातार ब्राउजिंग, ऑफिस वर्क, वीडियो कॉलिंग और मल्टीटास्किंग करते हैं।
बदलाव करने से पहले रखें यह बात याद
पावर सेटिंग्स में बदलाव करने से लैपटॉप की स्पीड में सुधार जरूर आ सकता है, लेकिन इसका एक छोटा नुकसान भी है। हाईपरफॉर्मेंस मोड में बैटरी पहले की तुलना में तेजी से खत्म हो सकती है। इसलिए अगर आप अक्सर यात्रा करते हैं या लंबे समय तक बैटरी पर काम करते हैं, तो जरूरत के हिसाब से ही इन सेटिंग्स का इस्तेमाल करें।
कुल मिलाकर, लैपटॉप की धीमी स्पीड के लिए हर बार हार्डवेयर को दोष देना सही नहीं है। कई बार सिर्फ कुछ पावर सेटिंग्स में बदलाव करके आप अपने पुराने या सुस्त लैपटॉप को दोबारा तेज और रिस्पॉन्सिव बना सकते हैं।
डॉ. अनिमेष शर्मा



