South Korea ETF Crash: शेयर बाजार में कम समय में पैसा दोगुना या तीन गुना करने का लालच बहुत भारी पड़ सकता है. साउथ कोरिया के बाजार से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरी दुनिया के छोटे निवेशकों को हिलाकर रख दिया है. वहाँ आम लोगों ने कंप्यूटर चिप बनाने वाली दो बड़ी कंपनियों पर भारी दांव लगाया था. नतीजा ये हुआ कि सिर्फ कुछ ही महीनों में उनके 14 हजार करोड़ रुपये पूरी तरह डूब गए.

साउथ कोरिया के सांसद चोई यूनसियोक के ऑफिस से मिली जानकारी के मुताबिक, 27 मई से 14 अगस्त के बीच 10 बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों के ग्राहकों को ये बहुत बड़ा घाटा हुआ है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। ये सभी लोग ‘लेवरेज्ड ईटीएफ’ नाम के एक खास प्रोडक्ट में पैसा लगा रहे थे. जब तक बाजार ऊपर गया, सब खुश थे. जैसे ही बाजार गिरा, लोगों की जेबें खाली हो गईं.

लेवरेज्ड ईटीएफ का गणित

लेवरेज्ड ईटीएफ को समझना बहुत आसान है. ये ऐसा फंड होता है जो किसी शेयर के एक दिन के मुनाफे को दो गुना या तीन गुना करने का वादा करता है. अगर शेयर आज 2% बढ़ा, तो ये फंड आपको 4% या 6% का फायदा देगा. सुनने में ये बहुत अच्छा लगता है, लेकिन इसमें एक बहुत बड़ा पेंच छिपा होता है.

मिंट की एक खबर के मुताबिक, ब्लू एस्टर कैपिटल और क्रेबाको ग्लोबल के हेड सिद्धार्थ सोगानी जैन बताते हैं कि ये फंड हर एक दिन के हिसाब से काम करते हैं. इसे ‘डेली रिसेट’ कहते हैं. यानी हर शाम को इसका हिसाब बंद हो जाता है और अगले दिन नए सिरे से गिनती शुरू होती है. अगर आप इसे लंबे समय के लिए खरीदकर बैठ जाएंगे, तो ये आपको महीने के अंत में दोगुना मुनाफा नहीं देगा.

इसे एक बहुत ही सीधे उदाहरण से समझिए. मान लीजिए कोई शेयर 10 दिनों तक लगातार एक दिन 5% ऊपर चढ़ता है और अगले दिन 5% नीचे गिरता है. 10 दिन पूरे होने पर वो शेयर अपनी पुरानी कीमत से सिर्फ 1.2% नीचे रहेगा. यानी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. लेकिन अगर आपने 2x वाला ईटीएफ लिया था, तो वो करीब 4.9% नीचे चला जाएगा. अगर 3x वाला फंड लिया था, तो वो लगभग 11% टूट जाएगा. शेयर वहीं का वहीं रहा, लेकिन तीन गुना वाले फंड ने नौ गुना ज्यादा पैसा डुबो दिया.

इस नुकसान की भरपाई करना तो और भी ज्यादा मुश्किल है. अगर कोई फंड गिरकर 82% टूट जाता है, तो उसे अपनी पुरानी जगह पर वापस आने के लिए 456% ऊपर चढ़ना पड़ेगा. बाजार में इतनी बड़ी बढ़त मिलना लगभग नामुमकिन जैसा होता है.

साउथ कोरिया में कैसे हुआ इतना बड़ा नुकसान

साउथ कोरिया में लोगों के सिर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बुखार चढ़ा हुआ था. वहाँ के छोटे निवेशकों ने इन जोखिम भरे फंड्स में करीब 9.4 बिलियन डॉलर लगा दिए थे. सबसे बड़ी गलती ये हुई कि इस पूरे पैसे का 92% हिस्सा सिर्फ दो कंपनियों में लगा था सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स. लोगों को लगा कि चिप बनाने वाली ये कंपनियां कभी नहीं गिरेंगी.

लेकिन जुलाई के महीने में हवा उल्टी बहने लगी. एसके हाइनिक्स का शेयर करीब 35% टूट गया और सैमसंग का शेयर लगभग 21% नीचे आ गया. आम शेयर में ये गिरावट फिर भी संभाली जा सकती थी, लेकिन दोगुनेतिगुने वाले फंड्स में तो कोहराम मच गया. 29 जुलाई आतेआते एसके हाइनिक्स से जुड़ा सबसे बड़ा 2x फंड अपने जून के उच्चतम स्तर से 82% नीचे गिर गया. देखते ही देखते लोगों की गाढ़ी कमाई हवा हो गई.

नुकसान के बाद जागे सरकारी अधिकारी

जब पानी सिर के ऊपर से निकल गया, तब साउथ कोरिया के बाजार अधिकारियों की नींद खुली. उन्होंने इन प्रोडक्ट्स में पैसा लगाने के नियम कड़े कर दिए. पहले जहाँ 10 मिलियन वॉन जमा करके ट्रेडिंग शुरू की जा सकती थी, उस सीमा को बढ़ाकर 30 मिलियन वॉन कर दिया गया. साथ ही नए निवेशकों के लिए ट्रेनिंग लेना और नकली सौदों से सीखना जरूरी कर दिया गया.

नियम सख्त होने से ट्रेडिंग तो कम हो गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अगस्त के महीने में अकेले एक महीने के अंदर सैमसंग और एसके हाइनिक्स के इन फंड्स से करीब 1 बिलियन डॉलर बाहर निकल गए. सिद्धार्थ सोगानी जैन का कहना है कि नियम हमेशा तब बनते हैं जब लोगों का नुकसान पहले ही हो चुका होता है.

बड़ीबड़ी वित्तीय कंपनियां इन फंड्स का इस्तेमाल सिर्फ दोतीन दिनों के लिए करती हैं. वे अपने कुल पैसे का बहुत छोटा हिस्सा इसमें लगाती हैं और हर मिनट स्क्रीन पर नजर रखती हैं. ये प्रोडक्ट्स तब सबसे ज्यादा जानलेवा बन जाते हैं जब:

  1. लोग इन्हें महीनों तक अपने पास रखकर बैठ जाएं
  2. जब शेयर बहुत ज्यादा चढ़ चुका हो और तब इन्हें खरीदा जाए
  3. जब उधार का पैसा लेकर इनमें लगाया जाए
  4. जब कोई अपनी सारी जमापूंजी सिर्फ इन्हीं में लगा दे
  5. सीधा नियम ये है कि अगर आप हर रोज अपनी स्क्रीन पर नजर नहीं रख सकते, तो आपको ये चीजें खरीदनी ही नहीं चाहिए.

भारतीय निवेशकों के लिए बड़ी सीख

ये कहानी सिर्फ साउथ कोरिया की नहीं है, भारत के निवेशकों को भी इससे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है. भारत में लोग फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ठीक इसी तरह का दांव लगाते हैं. वहां भी थोड़ा पैसा लगाकर बड़ा सौदा किया जाता है, जिसे लेवरेज कहते हैं.

सेबी की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में भारत के 91% से ज्यादा डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स को भारी नुकसान हुआ. एक ही साल में इन लोगों का कुल घाटा 41% बढ़कर करीब 1.06 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इसके अलावा आजकल कई भारतीय एप्स आ गए हैं, जिनसे लोग अमेरिका के ऐसे खतरनाक फंड्स में भी पैसा लगाने लगे हैं.

सिद्धार्थ सोगानी जैन साफ कहते हैं कि अगर आपको लगता है कि एआई या चिप बनाने वाली कंपनियां बहुत आगे जाएंगी, तो भी ऐसे दोगुनेतिगुने फंड्स में पैसा मत लगाइए. अगर लंबी अवधि में पैसा बनाना है, तो सीधे अच्छी कंपनियों के शेयर खरीदिए या सामान्य म्यूचुअल फंड्स में रहिए. रोज़रोज़ रिसेट होने वाले इन फंड्स के चक्रव्यूह में फंसेंगे, तो मूल पूंजी भी गंवानी पड़ जाएगी.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.