साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास की आने वाली फिल्म ‘फौजी’ का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। इसके बाद फिल्म को लेकर विवाद शुरू हो गया है। प्रभास की यह फिल्म 19 मार्च 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। ‘फौजी’ युद्ध और इतिहास की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म है। इसे हनु राघवपुड़ी ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में प्रभास मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।

फिल्म के टीजर को लेकर सबसे ज्यादा सवाल नेताजी सुभाष चंद्र बोस और हिटलर की कथित मुलाकात को दिखाने के तरीके पर उठ रहे हैं। इसके अलावा, फिल्म के काल्पनिक मुख्य किरदार को ऐतिहासिक नेता नेताजी के साथ किस तरह जोड़ा गया है, इसे लेकर भी विवाद हो रहा है।
‘फौजी’ के टीजर में क्या दिखाया गया?
विवाद तब शुरू हुआ, जब फिल्म के टीजर में कथित तौर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को फिल्म के मुख्य किरदार से मिलवाते हुए दिखाया गया। फिल्म में प्रभास मुख्य भूमिका में हैं और बताया जा रहा है कि टीजर में नेताजी इस किरदार को हिटलर से मिलवाते हैं।
इस चित्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इससे फिल्म के काल्पनिक किरदार को ज्यादा बड़ा दिखाने और नेताजी की ऐतिहासिक अहमियत को कम करने की कोशिश तो नहीं की गई।
सांसद ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी टीजर में स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथित चित्रण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी की तुलना एडोल्फ हिटलर या दूसरे बदनाम लोगों से करना सही नहीं है और यह देश के हित में भी नहीं है।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा, “नेताजी की छवि को लेकर इस तरह की सोच फैलाना देश के खिलाफ है। पूरी दुनिया जानती है कि नेताजी किस तरह के नेता थे और उन्हें कितना सम्मान मिलता था।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी तुलना हिटलर या बदनाम लोगों से करना सही नहीं है। यह न देश के हित में है और न ही राष्ट्र के हित में।”
नेताजी के परपोते ने भी मांगी माफी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने भी फिल्म के निर्देशक की आलोचना की है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी और हिटलर की मुलाकात से जुड़े इतिहास को कथित तौर पर गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया है।
आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने फिल्म बनाने वालों से भारत के लोगों से माफी मांगने की मांग की। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि रचनात्मक आजादी के नाम पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
चंद्र कुमार बोस ने कहा, “राष्ट्रीय नायकों के बारे में तथ्यों को बदलना और कहानी में कल्पना जोड़ना, मेरे हिसाब से गलत है।” उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में नेताजी और हिटलर की मुलाकात को गलत तरीके से पेश किया गया है, जिससे स्वतंत्रता सेनानी की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि फिल्म बनाने वालों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और उसके नेताओं पर फिल्म बनाने की पूरी आजादी है, लेकिन ऐतिहासिक लोगों और घटनाओं को दिखाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
चंद्र कुमार बोस बोले नेताजी फासीवाद के खिलाफ थे
नेताजी और हिटलर की मुलाकात के ऐतिहासिक संदर्भ के बारे में चंद्र कुमार बोस ने कहा कि नेताजी ने भारत की आजादी की लड़ाई के लिए मदद हासिल करने के मकसद से जर्मनी और जापान का रुख किया था। उन्होंने कहा, “उस समय नेताजी जानते थे कि जर्मनी के हिटलर और जापान के हिदेकी तोजो भारत की आजादी की लड़ाई में मदद कर सकते हैं।”
चंद्र कुमार बोस ने इस बात पर भी जोर दिया कि नेताजी फासीवाद के विरोधी थे और लोकतंत्र में विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा, “वह फासीवाद के सख्त विरोधी थे और लोकतंत्र तथा लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास रखते थे।”
उनके मुताबिक, भारत की आजादी के लिए मदद मांगते समय नेताजी ने हिटलर के साथ किसी अधीन व्यक्ति की तरह नहीं, बल्कि बराबरी के स्तर पर बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि हिटलर ने नेताजी की देशभक्ति को पहचाना और उनकी मदद के लिए तैयार हुआ। इसमें वह पनडुब्बी भी शामिल थी, जिसने नेताजी को दक्षिणपूर्व एशिया पहुंचने में मदद की।
हिटलर की भारत को लेकर सोच पर भी उठाए सवाल
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि हिटलर की किताब ‘माइन काम्फ’ में भारत को लेकर व्यक्त विचारों से पता चलता है कि वह भारत के इतिहास, विरासत और संस्कृति को सही तरह से नहीं समझता था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में दोनों नेताओं का मकसद अपनेअपने देशों की आजादी हासिल करना था, लेकिन बाद में हिटलर एक तानाशाही सोच रखने वाला व्यक्ति बन गया।
निर्देशक पर इतिहास को सनसनीखेज बनाने का आरोप
चंद्र कुमार बोस ने ‘फौजी’ के निर्देशक पर नेताजी और हिटलर की मुलाकात को सनसनीखेज तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि विवाद पैदा करने के बजाय फिल्म में इस ऐतिहासिक घटना का सही संदर्भ दिखाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि नेताजी की “बहुत बड़ी शख्सियत” थी और उन्हें इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए, जिससे उनकी छवि या अहमियत कम हो।



