अक्टूबर के महीने में वेनेजुएला से आने वाला कच्चा तेल रिकॉर्ड तोड़ सकता है. इसका कारण भी है. वेनेजुएला का कच्चा तेल काफी डिस्काउंट पर मिल रहा है. जिसकी वजह से रिलायंस जैसी कई कंपनियों की ओर से इस तेल की जमकर खरीदारी की जा रही है. वहीं दूसरी ओर रूसी तेल की सप्लाई महंगी होने के कारण डिमांड में कम हो गई है. यही वजह है कि वेनेजुएला के तेल की सप्लाई में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है. आपको बता दें कि रूस के मुकाबले में वेनेजुएला भारत के काफी नजदीक है. यहां तेल मंगाने पर शिपिंग कॉस्ट भी काफी कम लगता है. साथ ही वेनेजुएला की ओर से तेल पर डिस्काउंट भी ज्यादा मिल रहा है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह की रिपोर्ट सामने आई है.

7 साल में सबसे ज्यादा होगा इंपोर्ट
Kpler के अनुमान के मुताबिक, इस महीने भारत में वेनेजुएला से आने वाले कच्चे तेल की मात्रा सितंबर के 196,000 बैरल प्रति दिन से बढ़कर दोगुनी से भी ज्यादा यानी लगभग 465,000 बैरल प्रति दिन होने की उम्मीद है। अगर तय किए गए सभी शिपमेंट समय पर पहुंच जाते हैं, तो यह दिसंबर 2019 के बाद सबसे ज़्यादा मात्रा होगी। दक्षिण अमेरिकी उत्पादक देश से भारत आने वाले सभी शिपमेंट का डेस्टिनेशन सिक्का पोर्ट बताया गया है। इसी पोर्ट का इस्तेमाल रिलायंस अपनी जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के लिए करती है, जो दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है। अक्टूबर में असल सप्लाई में बदलाव हो सकता है, क्योंकि एनालिटिक्स फर्म के शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि कम से कम दो टैंकर 31 अक्टूबर को भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाले हैं। वैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
रूस से घट रही है सप्लाई
भारत ने लगभग एक साल के अंतराल के बाद फरवरी में वेनेजुएला से तेल खरीदना फिर से शुरू किया था। वास्तव में वेनेजुएला के पूर्व नेता निकोलस मादुरो के हटने के बाद अमेरिकी प्रतिबंध हटाए गए, जिससे सप्लाई में बढ़ोतरी हुई। साथ ही, रूस से होने वाला आयात घट रहा है क्योंकि कीमतें बढ़ रही हैं. बाल्टिक से लोड होने वाले रूस के मुख्य ‘यूराल्स ग्रेड’ तेल की कीमत युद्ध के समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। दक्षिण एशियाई देश में रिफाइनरी कंपनियां रूस से खरीद भी कम कर रही हैं क्योंकि अमेरिका के कड़े प्रतिबंध कानून के कारण नए दंडात्मक टैरिफ का खतरा बढ़ गया है। Kpler के डेटा के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल के आयात में मास्को की हिस्सेदारी जुलाई में 56 फीसदी तक थी, जो सितंबर में गिरकर लगभग 35% रह गई।
भारी डिस्काउंट पर वेनेजुएला का तेल
Kpler में मॉडलिंग के सीनियर मैनेजर सुमित रिटोलिया ने कहा कि साल की शुरुआत से ही वेनेजुएला का कच्चा तेल भारत के लिए सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने का एक अहम हिस्सा बन गया है। उन्हें उम्मीद है कि अक्टूबर में सप्लाई लगभग 350,000 बैरल प्रति दिन के आसपास होगी, क्योंकि हो सकता है कि कुछ जहाज महीने के आखिर तक अपना माल न उतार पाएं. वेनेजुएला का मुख्य ‘मेरे’ कच्चा तेल छूट पर बिक रहा है, जबकि शिपिंग लागत से पहले रूसी ‘यूराल्स’ तेल प्रीमियम पर बिक रहा है।
भारी डिस्काउंट की वजह से वेनेजुएला से लंबी दूरी की यात्रा और ‘मेरे’ क्रूड को प्रोसेस करने की चुनौतियों की भरपाई हो जाती है. ‘मेरे’ एक गाढ़ा और ज्यादा सल्फर वाला क्रूड है। रिलायंस का जामनगर कॉम्प्लेक्स ऐसे बैरल को प्रोसेस करने के लिए तैयार है। फिर भी, टैंकर के बढ़ते रेट की वजह से इंपोर्ट में हुई इस तेजी को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये बैरल प्रोसेस करने में मुश्किल और भारी होते हैं, और हर भारतीय रिफाइनरी इन्हें लगातार या बड़ी मात्रा में प्रोसेस नहीं कर सकती।



