नवजात को उठाकर छत पर ले गया बंदर, लोगों ने रोटियां उछालकर बमुश्किल बचाई जान.

यूपी के अमरोहा में डिडौली गांव में सोमवार दोपहर एक बंदर घर के आंगन में सो रहे डेढ़ माह के नवजात को उठाकर छत पर जा चढ़ा। करीब 20 मिनट तक मासूम की जान बंदर के चंगुल में फंसी रही और लोगों की सांसें अटकी रहीं।

यूपी के अमरोहा में डिडौली गांव में सोमवार दोपहर एक बंदर घर के आंगन में सो रहे डेढ़ माह के नवजात को उठाकर छत पर जा चढ़ा। करीब 20 मिनट तक मासूम की जान बंदर के चंगुल में फंसी रही और लोगों की सांसें अटकी रहीं। बाद में बंदर की ओर रोटियां उछालकर बच्चे को बमुश्किल छुड़ाया जा सका। गांव निवासी मुकेश कुमार की पत्नी रेखा का डेढ़ माह का बेटा आंगन में चारपाई पर सोया था। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। रेखा जैसे ही रसोई में गईं, बंदर आ धमका और बच्चे को लेकर छत पर चढ़ गया। मां की चीख सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने जब बंदर के हाथों में मासूम को देखा, तो सबके हाथ-पांव फूल गए।

बंदर को डराने पर बच्चे को नीचे गिराने का खतरा था। ग्रामीणों ने समझदारी दिखाई और बंदर की तरफ रोटियां फेंकनी शुरू कीं। यह देख बंदर मासूम को छत पर छोड़कर रोटियों को ओर लपका। इसी दौरान लोगों ने चुपके से छत पर चढ़कर बच्चे को बचा लिया। बच्चे को सुरक्षित पाकर परिजनों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों को पकड़ने की मांग की है। बीडीओ जोया लोकचंद आनंद ने बताया कि बंदरों को पकड़वाने के लिए वन विभाग को नामित किया गया है। जल्द ही बंदरों को पकड़वाकर लोगों को समस्या से स्थायी निजात दिलाई जाएगी।

डिडौली क्षेत्र में बंदरों का आतंक, आए दिन बच्चों व बुजुर्गों पर बोल रहे हमला

डिडौली क्षेत्र में आबादी बंदरों के खौफ तले बसर कर रही है। हालत यह है कि आए दिन बंदर आम लोगों पर हमला बोल रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों संग जनप्रतिनिधियों की फरियाद को भी जिम्मेदार अफसर अनसुना कर रहे हैं। हालांकि अब नींद से जागे अफसर इस ओर जल्द ही प्रभावी कार्रवाई करने का दावा जरूर कर रहे हैं। गांव निवासी हरिओम, पूरन सिंह, कैलाश, रामचंद्र, रोहित, मंगल सिंह, सुभाष, रोहिताश सिंह आदि का कहना है कि गांव में बंदर आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं।

हालत यह है कि बंदरों की वजह से छोटे बच्चों संग महिलाओं का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। छतों पर कपड़े सुखाने जाने वाली महिलाओं पर भी बंदर हमला कर देते हैं। पूर्व में कई बार ऐसी घटनाओं में छत से गिरकर बच्चे व महिलाएं चोटिल हो चुके हैं। स्कूल जाते समय भी बच्चों पर भी बंदरों के हमले का डर बना रहता है। बंदर बच्चों का बैग भी छीन लेते हैं। दहशतजदा बच्चे रोते-बिलखते घर पहुंचते हैं। वहीं बंदर दुकानदारों के लिए भी मुसीबत का सबब बने हैं, ठेले व दुकान आदि से सामान उठाकर भाग जाते हैं। ग्राम प्रधान महीपाल सिंह ने बताया कि बंदरों को पकड़वाए जाने को लेकर जिम्मेदार अफसरों से मांग कर चुके हैं पर सुनवाई नहीं हुई है।

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