इसमें कोई डाउट नहीं मैडम… चीफ जस्टिस ने ऐसा क्या कहा, ममता बनर्जी ने जोड़ लिए हाथ!


शायद देश के इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर खुद जिरह की. हां, आज सुप्रीम कोर्ट में गहमागहमी कुछ ज्यादा थी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एसआईआर पर अपना पक्ष रखने के लिए पेश हुई थीं. उन्होंने कहा कि बंगाल को टारगेट किया जा रहा है. SIR की प्रक्रिया सिर्फ नाम डिलीट करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है. इसी दौरान एक मौका ऐसा आया जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ ऐसा कहा कि सभी हंस पड़े. सीएम ममता ने भी खुद हाथ जोड़ लिए.

दरअसल, कोर्ट में वकीलों की भारी भीड़ थी. ममता अपनी पार्टी के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी के साथ एक छोर पर खड़ी थीं. ममता ने विनम्रता के साथ कहा कि क्या मैं एक्सप्लेन कर सकती हूं सर? क्योंकि मैं उस राज्य से ताल्लुक रखती हूं. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पर किसी को डाउट नहीं होना चाहिए मैडम… यह सुनते ही सभी हंस पड़े.

ममता ने आगे कहा कि नो सर, मैं आपकी बहुत आभारी हूं. मैं आपकी दयालुता के लिए आभारी हूं. यह कहते हुए ममता ने हाथ जोड़ लिए. वीडियो में दाहिनी तरफ कोने में देखिए.

सबका आभार जताकर फिर बोलीं ममता
बंगाल की सीएम ने बाकायदे पहले चीफ जस्टिस बाकी दोनों जस्टिस और अपने सामने खड़े वकीलों के प्रति भी आभार व्यक्त किया. ममता ने कहा, सर प्रॉब्लम यह है कि हमारे वकील केस के लिए फाइट करते हैं और वे शुरू से फाइट कर रहे हैं. हम भी…लेकिन जब सब कुछ खत्म कर दिया गया है. हमें इंसाफ ही नहीं मिल रहा है. दरवाजे के भीतर इंसाफ कराह रहा है… मैं रवींद्र नाथ टैगोर को कोट कर रही हूं तब हमें लगता है कि हमें कहीं भी जस्टिस नहीं मिल रहा है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच के सामने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उन्होंने इलेक्शन कमीशन को 6 बार लेटर लिखे, जिसमें सारी डीटेल दी गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

ममता के साथ रहे कल्याण बनर्जी ने क्या बताया
पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर ममता के साथ मौजूद रहे TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने बाद में पत्रकारों को बताया कि ममता बनर्जी की रिट याचिका पर सुनवाई हुई और ममता बनर्जी ने अपना पक्ष रखा. कुछ मुद्दों पर बहस हुई और कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो उन्हें अपने मामलों पर बहस करने के लिए और समय दिया जाएगा. एक बात महत्वपूर्ण है. याचिका में ही दो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर विचार करने और फैसला लेने की जरूरत है.

ममता बनर्जी ने इन मुद्दों पर बहस की

1) सिर्फ नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है और 4 महीनों से नाम जोड़ने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है.
2) माइक्रो-ऑब्जर्वर और रोल ऑब्जर्वर नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। रोल ऑब्जर्वर SDM रैंक के नहीं हैं, वे कोल इंडिया, RBI वगैरह से आ रहे हैं. सभी माइक्रो-ऑब्जर्वर BJP शासित राज्यों से लाए गए हैं और यह तर्क दिया गया कि सिर्फ 2-3 मामलों में (जहां गैर-BJP सरकार है) प्रक्रिया जल्दबाजी में चल रही है लेकिन BJP शासित राज्यों में, प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है.

कल्याण बनर्जी ने कहा कि जहां तक तार्किक विसंगति की बात है, उन्होंने कहा है कि बहुत छोटी-छोटी गलतियों को भी बहुत गंभीरता से लिया गया है…EC से इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है. कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा है कि वे सुनवाई के लिए समय बढ़ा सकते हैं क्योंकि सिर्फ 4 दिन बचे हैं…कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सोमवार तक के लिए रखा है और उनसे अपना जवाब देने के लिए कहा है. EC ने एक मुद्दा उठाया कि पश्चिम बंगाल में इतने सारे SDM उपलब्ध नहीं हैं…अब, कोर्ट ने पूछा है कि क्या ग्रेड 2 के अधिकारियों को उनकी मदद के लिए दिया जा सकता है. ममता बनर्जी ने हां कहा है.

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