
ईरान और अमेरिका के बीच लगभग छह सप्ताह से जारी युद्ध फिलहाल रुक गया है, लेकिन इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल रहने के बाद स्थायी शांति की संभावनाएं अभी भी अधर में लटकी हुई हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए साफ चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। ट्रंप की नई धमकी में होर्मुज जलमार्ग पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी लगाने का भी जिक्र है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। ट्रंप की यह चेतावनी पुरानी रणनीति को दोहराती नजर आ रही है। कुछ महीने पहले चीन के खिलाफ भी उन्होंने इसी तरह का दबाव बनाया था, जब उन्होंने चीनी निर्यात पर भारी कटौती और 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। अब ईरान के मामले में भी ट्रंप बातचीत के लिए दबाव बनाने का वही तरीका अपना रहे हैं।
ईरान ने चीन की राह अपनाई
ईरान भी चीन के पुराने रुख की तर्ज पर जवाब दे रहा है। जब अमेरिका ने चीन पर शुल्क लगाए थे, तब चीन ने इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे अमेरिका को अपना रुख कुछ हद तक नरम करना पड़ा था। चीन दुनिया का लगभग 90 प्रतिशत दुर्लभ धातुओं का उत्पादन करता है। इनमें 17 ऐसे तत्व शामिल हैं जो रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका के पास इनकी केवल एक खदान है और वह ज्यादातर आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर रहा है। अब ईरान होर्मुज पर अपने नियंत्रण को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। तेहरान इसे अमेरिका के खिलाफ अपना सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार मानता है और वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर बातचीत में दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी संकरे जलमार्ग से होता है।
गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था। ईरान कभी-कभी जहाजों को परेशान करता था, लेकिन पूर्ण नियंत्रण की कोशिश नहीं करता था। युद्ध के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब ईरान टैंकरों की आवाजाही को प्रभावी रूप से नियंत्रित कर रहा है और तय कर रहा है कि कौन से जहाज गुजर सकते हैं और किन शर्तों पर। साथ ही, सुरक्षित मार्ग देने के बदले जहाजों से शुल्क वसूलने की भी कोशिश कर रहा है।
तेल बाजार में हलचल
होर्मुज में जारी गतिरोध का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिख रहा है। ट्रंप की नाकाबंदी वाली धमकी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 8 प्रतिशत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं। मार्केट एक्सपर्ट आगे और तेज उछाल की आशंका जता रहे हैं। ईरान का रोजाना लगभग 20 लाख बैरल तेल निर्यात वैश्विक आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। किसी भी तरह की रुकावट से आपूर्ति घट सकती है और कीमतें और बढ़ सकती हैं।
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दूसरी ओर ईरानी नेताओं ने साफ संदेश दिया है कि वे आर्थिक दबाव झेलने को तैयार हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि पेट्रोल की मौजूदा कीमत का आनंद लीजिए… जल्द ही आपको 4 से 5 डॉलर प्रति लीटर पेट्रोल की याद आएगी। वहीं, सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी, ईंधन की लागत महंगी होगी और आम उपभोक्ताओं पर बोझ और बढ़ेगा।