एटा के अवागढ़ थाना क्षेत्र में वर्ष 2011 में हुए किसान सूरजपाल हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एससीएसटी न्यायालय ने हत्या के दोषी गिरीश चंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि मामले में दोषी पाए गए बलवीर, मनोज और जितेंद्र को पांचपांच वर्ष के साधारण कारावास की सजा दी है। अदालत ने गिरीश पर 15 हजार रुपये और अन्य तीन दोषियों पर पांचपांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

मामला थाना अवागढ़ क्षेत्र के गांव गदेसरा का है। गांव निवासी अनोखलाल ने 10 जनवरी 2011 को पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनके भाई सूरजपाल परिवार के लोगों के साथ खेत पर गए थे। वहां वे पशुओं को चारापानी दे रहे थे। इसी दौरान लाइसेंसी राइफल लेकर गिरीश चंद्र पुत्र जसराम अपने भाई बलवीर, मनोज और बलवीर के पुत्र जितेंद्र के साथ वहां पहुंचा। आरोपितों ने विवाद शुरू कर दिया और जातिसूचक शब्द कहे। इसके बाद उन्होंने मारपीट शुरू कर दी।
विवाद के दौरान गिरीश ने अपनी राइफल से फायर कर दिया। गोली सूरजपाल को लगी। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस घटना में अन्य लोग भी घायल हुए थे।
मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच पूरी होने के बाद 18 मार्च 2011 को ही आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया गया था। इसके बाद न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई, जिसके आधार पर अदालत ने शुक्रवार को सभी चार दोषियों को सजा सुनाई।
न्यायालय एससीएसटी कोर्ट ने गिरीश चंद्र को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, बलवीर, मनोज और जितेंद्र को पांचपांच वर्ष के साधारण कारावास के साथ पांचपांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वर्ष 2011 में हुए किसान सूरजपाल हत्याकांड में घटना के करीब 15 वर्ष बाद आए इस फैसले के साथ चारों दोषियों को उनके अपराध के लिए दंडित किया गया।



