पौराणिक काल में शंखनाद से युद्धारम्भ की घोषणा होती थी और उत्साहवर्धन किया जाता था। वहीं आध्यात्मिक कार्यों में भी शंख ध्वनि का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं अगर इसका वैज्ञानिक पक्ष देखें तो नियमित शंख ध्वनि का श्रवण करने से हृदय घात, हृदय अवरोध नहीं पड़ता। शंखनाद करने से व्यक्ति के फेफड़े भी शक्तिशाली होते हैं। क्योंकि शंख फूंकने पर पहले फेफड़ों में हवा जमा होती है, इस प्रोसेस से श्वास नली और फेफड़ों को शक्ति मिलती है।

वहीं शंखनाद से आसपास की निगेटिव एनर्जी का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंखनाद करने से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है। पूजाअर्चना आदि और सभी तरह के मांगलिक कार्यक्रमों में शंखनाद की ध्वनि की विशेष महत्ता है। धार्मिक मान्यता है कि शंख ध्वनि विजय के मार्ग को प्रशस्त करती है, पूजन के दौरान पूजा की पूर्णता पर किए जाने वाले शंखनाद की ध्वनि से भक्त के मन को शांति मिलती है।
इसके साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह सिद्ध है कि नियमित शंखनाद करने से इसके पॉजिटिव प्रभाव से वातावरण में व्याप्त हानिकारक सूक्ष्म जीवाणुओं का नाश होता है। विद्वानों का मानना है कि शंखनाद के दौरान वायुमंडल में कुछ विशेष तरह की तरंगे उत्पन्न होती है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जोकि ब्रह्मांड की कुछ तरंगों के साथ मिलकर अल्प क्षणों में ही समग्र ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लेती है। ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हुए जब किसी एक तरंग को जब दूसरी अनुकूल तरंगे मिलती हैं, तो दोनों तरंगों के मिलने से मनुष्य को प्रेरणा देने वाली, शोक से रक्षा करने वाली, आत्मबल देने वाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली तरंगे उठती हैं। वहीं व्यक्ति अपने कार्य के उद्देश्य में जल्द ही सफलता प्राप्त करता है।
बता दें कि यह तरंगे इतनी अधिक सूक्ष्म होती हैं कि उसका प्रभाव सरलता से द्रष्टिगोचर नहीं हो पाता है। निरंतन शंखनाद के प्रयोग से ही इन तरंगों के प्रभाव को समझ सकते हैं। वहीं तमाम शोधों में भी यह सिद्ध हो चुका है कि जिस तरह से वाद्यों और ध्वनियों का छोटेबड़े सभी जीवों पर गहरा असर होता है, ठीक उसी तरह से जड़चेतन पर शंख ध्वनि का प्रभाव भी पड़ता है।



