SBI FD Calculator: अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित जगह रखकर तय रिटर्न पाना हर छोटेबड़े निवेशक की पहली पसंद होती है. जब बचत और सुरक्षित निवेश की बात आती है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर लोगों का भरोसा सबसे ज्यादा रहता है. ज्यादातर लोग अपनी बचत को फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाना पसंद करते हैं, क्योंकि यहां शेयर बाजार जैसा कोई जोखिम नहीं रहता. लेकिन किसी भी बैंक में एफडी कराने से पहले ये समझना बहुत जरूरी है कि आपका पैसा कितने समय में कितना बढ़कर मिलेगा. मैच्योरिटी पर हाथ में आने वाली रकम पूरी तरह से बैंक की ब्याज दरों और आपके द्वारा चुनी गई निवेश की अवधि पर टिकी होती है. अगर कोई ग्राहक एसबीआई की रिटेल टर्म डिपॉजिट स्कीम में 1 लाख रुपये जमा करता है, तो अलगअलग समय में उसे कितना मुनाफा मिलेगा, आइए इसे आसान गणित से समझते हैं.

निवेश पर रिटर्न कितना बनेगा

सामान्य ग्राहकों के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अलगअलग समय सीमा के हिसाब से ब्याज दे रहा है. अगर कोई आम नागरिक 1 लाख रुपये की बचत को एसबीआई की एफडी में लगाता है, तो उसे मिलने वाला रिटर्न समय के हिसाब से बदलता जाता है.

  1. अगर आप 1 साल की अवधि के लिए एफडी कराते हैं, तो बैंक 6.25 फीसदी का सालाना ब्याज ऑफर करता है. इस हिसाब से 1 साल पूरा होने पर 1 लाख रुपये की मूल रकम बढ़कर लगभग 1,06,398 रुपये हो जाएगी. यानी एक साल में सीधे 6,398 रुपये का फायदा मिलेगा.
  2. अगर कोई निवेशक अपने पैसे को 3 साल के लिए जमा करता है, तो बैंक 6.30 फीसदी ब्याज देता है. 3 साल की मियाद पूरी होने पर ये जमा पूंजी बढ़कर लगभग 1,20,642 रुपये हो जाती है.
  3. वहीं 5 साल के निवेश पर बैंक 6.05 फीसदी की दर से ब्याज दे रहा है. 5 साल पूरा होने पर 1 लाख रुपये की ये रकम लगभग 1,34,982 रुपये बन जाती है.
  4. अगर कोई निवेशक पूरे 10 साल की लंबी अवधि के लिए अपनी पूंजी को बैंक में छोड़ देता है, तो उसे कंपाउंडिंग का बड़ा लाभ मिलता है. 10 साल बाद 1 लाख रुपये की रकम बढ़कर लगभग 1,82,400 रुपये के पास पहुंच जाती है.

सीनियर सिटीजन के लिए खास फायदा

वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैंक हमेशा अतिरिक्त लाभ देते हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 60 साल या उससे अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले 0.50 फीसदी ज्यादा ब्याज देता है. ब्याज की ये थोड़ी सी ज्यादा बढ़त लंबे समय में मैच्योरिटी अमाउंट पर बहुत बड़ा असर डालती है.

  1. 1 साल की एफडी कराने पर वरिष्ठ नागरिकों को 6.75 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है. इस हिसाब से 1 साल में 1 लाख रुपये का निवेश बढ़कर लगभग 1,06,920 रुपये हो जाता है.
  2. 3 साल की अवधि के लिए सीनियर सिटीजन को 6.80 फीसदी ब्याज मिलता है. 3 साल की अवधि पूरी होने पर ये जमा राशि बढ़कर लगभग 1,22,430 रुपये तक पहुंच जाती है.
  3. 5 साल की अवधि में वरिष्ठ नागरिकों को 7 फीसदी से ज्यादा यानी 7.05 फीसदी का शानदार ब्याज मिलता है. इस दर के हिसाब से 5 साल में 1 लाख रुपये की रकम करीब 1,41,680 रुपये हो जाती है.
  4. सबसे बड़ा फायदा 10 साल की लंबी अवधि में देखने को मिलता है. 10 साल पूरे होने पर वरिष्ठ नागरिकों का 1 लाख रुपये बढ़कर लगभग 2,01,000 रुपये के आंकड़े को पार कर जाता है. यानी लंबे समय में बुजुर्गों का पैसा दोगुने से भी ज्यादा हो जाता है.

ब्याज पर टैक्स देनदारी के नियम

अक्सर कई निवेशकों के मन में ये गलतफहमी रहती है कि एफडी में जमा पैसा और उससे मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. लेकिन सच्चाई ये नहीं है. इनकम टैक्स के मौजूदा नियमों के मुताबिक, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला पूरा ब्याज पूरी तरह से टैक्स योग्य होता है.

आपको अपनी एफडी के ब्याज पर कितना टैक्स चुकाना पड़ेगा, ये पूरी तरह आपकी कुल सालाना आय पर निर्भर करता है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा ये इस बात पर भी तय होता है कि आपने इनकम टैक्स का पुराना टैक्स स्लैब चुना है या फिर नया टैक्स स्लैब चुना है. आपकी कुल आय जिस टैक्स ब्रैकेट में आएगी, उसी हिसाब से एफडी ब्याज पर टैक्स की देनदारी बनेगी.

बैंक टीडीएस कटौती से जुड़े प्रावधान

एफडी के ब्याज पर बैंक एक तय सीमा के बाद स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस काटते हैं. निवेशकों को ये ध्यान में रखना चाहिए कि टीडीएस कोई अलग या अतिरिक्त टैक्स नहीं होता है.

जब आप वित्त वर्ष के अंत में अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं, तब आप इस कटे हुए टीडीएस को अपनी कुल टैक्स देनदारी के साथ आसानी से एडजस्ट कर सकते हैं. अगर आपकी कुल सालाना कमाई टैक्स छूट के दायरे में आती है और आपकी टैक्स देनदारी शून्य बनती है, तो आप आईटीआर फाइल करके बैंक द्वारा काटे गए टीडीएस को रिफंड के तौर पर वापस क्लेम कर सकते हैं.