SIR से नर्वस क्यों हैं ममता बनर्जी? 1 करोड़ वोटों का ‘गणित’ बिगाड़ देगा TMC का खेल!!


एसआईआर बिहार में हुआ, राजस्‍थान- यूपी में हुआ, तम‍िलनाडु से लेकर कई राज्‍यों में हुआ, लेकिन उतना हंगामा नहीं मचा, ज‍ितना पश्च‍िम बंगाल में हो रहा है. बिहार में सियासी बवाल जरूर हुआ, क्‍योंक‍ि वहां चुनाव सिर पर थे, लेकिन बंगाल में तो चुनाव में अभी वक्‍त है, फ‍िर मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी इतनी नर्वस क्‍यों हैं? कहीं इसके पीछे वोट सरकने का खेल तो नहीं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस एसआईआर को लेकर आक्रामक हैं. बंगाल में तो लड़ाई लड़ ही रही हैं, सुप्रीम कोर्ट में भी इसे घसीट रही हैं. बार-बार इसे अलग अलग तरीके से पेश क‍िया जा रहा है. हालत यहां तक आ पहुंची क‍ि सोमवार को सीजेआई को यहां तक कहना पड़ा क‍ि क्या हमारे पास बंगाल के अलावा और कोई काम नहीं? ममता का सीधा आरोप है कि बीजेपी चुनाव आयोग और और केंद्रीय एजेंसियों के कंधे पर बंदूक रखकर वोट चोरी की साजिश रच रही है. लेकिन इस घबराहट के पीछे का असली कारण केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि वे आंकड़े हैं जो बंगाल की सत्ता के समीकरण को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं.

TMC के सूत्रों और चुनाव आयोग को लिखी गई चिट्ठी के अनुसार, बंगाल एसआईआर में अब तक लगभग 63.66 लाख लोगों के नाम वोटर ल‍िस्‍ट से या तो हटाए जा चुके हैं या फ‍िर उन पर आपत्ति जताई गई है. पार्टी का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह संख्या 40 लाख और बढ़ सकती है. यदि कुल 1 करोड़ वोट कट जाते हैं, तो यह बंगाल के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर होगा. बंगाल की राजनीति‍ पर पकड़ रखने वाले जानकारों का मानना है क‍ि इनमें से बहुसंख्यक वोट TMC के पारंपरिक वोट बैंक से जुड़े हैं.

हर सीट पर 23,000+ का झटका
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं. यदि 1 करोड़ वोट कटते हैं, तो औसतन हर विधानसभा सीट पर लगभग 34,000 वोट कम हो जाएंगे. वहीं लोकसभा के लिहाज से देखें तो हर सीट पर औसतन 2.38 लाख वोट गायब हो सकते हैं.

बंगाल में हार-जीत का अंतर अक्सर बहुत कम होता है. ऐसे में हर सीट पर हजारों वोटों का कम होना ममता बनर्जी के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है. विशेषकर उन सीटों पर जहां मुस्लिम आबादी या शरणार्थी आबादी अधिक है, वहां असर सबसे घातक होने की संभावना है.

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