अगर आप भी हर साल मानसून के आते ही डेंगू के खौफ में रहते हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। दरअसल, भारत को आखिरकार अपनी पहली डेंगू वैक्सीन मिल गई है।

बारिश का मौसम आते ही हम भारतीयों को सबसे ज्यादा डर मच्छरों और उनसे होने वाले डेंगू का सताता है, लेकिन अब इस खौफ को अलविदा कहने का वक्त आ गया है।

जी हां, भारतीय दवा नियामक ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दिखा दी है। यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। आइए, डिटेल में इस वैक्सीन से जुड़ी हर जरूरी बात को समझते हैं।

किसने किया है इस वैक्सीन को तैयार?

‘क्यूडेंगा’ असल में जापानी कंपनी ‘टाकेडा’ की खोज है, लेकिन हमारे लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन देश में ही होगा। इसके लिए टाकेडा ने हैदराबाद की जानीमानी फार्मा कंपनी ‘बायोलॉजिकल ई’ के साथ करार किया है। भारत में ही बनने की वजह से इसकी सप्लाई तेज और बिना किसी रुकावट के होगी।

आखिर यह इतनी खास क्यों है?

डेंगू के चार अलगअलग स्ट्रेन होते हैं। यह एक ‘टेट्रावेलेंट’ वैक्सीन है, जिसका सीधासा मतलब है कि यह डेंगू के इन चारों रूपों से डटकर मुकाबला कर सकती है।

पहले कुछ वैक्सीन्स के साथ यह शर्त होती थी कि वे केवल उन्हीं को लगाई जा सकती हैं, जिन्हें जिंदगी में कम से कम एक बार डेंगू हो चुका हो, लेकिन Qdenga के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर आपको पहले कभी डेंगू नहीं हुआ है, तब भी यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है।

क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजे बताते हैं कि इसे लेने वाले 90% से ज्यादा लोगों में एंटीबॉडीज बनीं। यह न सिर्फ डेंगू होने से रोकती है, बल्कि बीमारी के गंभीर होने और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत को भी काफी हद तक टाल देती है।

किसे लगेगी और कैसे दी जाएगी?

  • उम्र: CDSCO की गाइडलाइंस के मुताबिक, 4 साल के छोटे बच्चों से लेकर 60 साल तक के वयस्कों को यह वैक्सीन लगाई जा सकती है।
  • खुराक का नियम: इसके कुल दो डोज लगाए जाते हैं। पहला इंजेक्शन लगने के ठीक 3 महीने बाद इसका दूसरा डोज दिया जाएगा। इसे सबकटेनियस इंजेक्शन के रूप में बांह में लगाया जाता है।

क्या इसके कोई साइड इफेक्ट्स हैं?

दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल हो रही इस वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी मान्यता मिल चुकी है।

किसी भी अन्य आम टीके की तरह, इससे घबराने की कोई बात नहीं है। इसके साइड इफेक्ट्स बहुत ही मामूली हैं। इंजेक्शन लगने के बाद आपको हल्का बुखार आ सकता है, सिरदर्द हो सकता है या फिर सुई वाली जगह पर थोड़ा दर्द और सूजन महसूस हो सकती है। गंभीर मामले बेहद दुर्लभ हैं।

कितनी रहेगी कीमत?

अभी इसकी पक्की कीमत का ऐलान होना बाकी है, लेकिन क्योंकि यह हमारे अपने देश में ही बनेगी, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि यह आम लोगों की जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ेगी। बाजार में लॉन्च होने के बाद, एहतियात के तौर पर शुरुआती 6 महीनों तक लोगों पर इसके असर की पूरी निगरानी भी की जाएगी।

बचाव के पुराने तरीके अब भी हैं जरूरी

वैक्सीन आ गई है, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप मच्छरों को दावत देने लगें। डॉक्टर्स साफ चेतावनी देते हैं कि वैक्सीन एक मजबूत ‘अतिरिक्त सुरक्षा चक्र’ जरूर है, लेकिन यह साफसफाई और मच्छरदानी का विकल्प नहीं है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के अपने बुनियादी तरीके पहले की तरह ही पूरी सख्ती से लागू रखें।