कॉलेज के पहले साल में पढ़ने वाले एक छात्र की सफलता की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. यह छात्र एक स्टार्टअप में सेल्स इंटर्न के तौर पर काम करता है और हर महीने करीब 4 लाख रुपये कमा रहा है. उसकी शानदार परफॉर्मेंस से खुश होकर कंपनी ने उसे पूरी तरह स्पॉन्सर्ड थाईलैंड ट्रिप का इनाम भी दिया है. इस घटना के बाद स्किलबेस्ड हायरिंग और युवाओं के टैलेंट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

कंपनी के CEO ने शेयर की कहानी

यह मामला तब सामने आया जब Topmate के CEO और कोफाउंडर दिनेश सिंह ने लिंक्डइन पर छात्र सिद्धार्थ दुबे की तारीफ करते हुए एक पोस्ट साझा की. उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ कंपनी के सबसे युवा कर्मचारियों में से एक हैं और पिछले महीने उन्होंने सबसे ज्यादा सेल्स की. यही वजह है कि कंपनी ने उन्हें थाईलैंड की ऑलएक्सपेंसपेड ट्रिप गिफ्ट करने का फैसला किया.

दिनेश सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सिद्धार्थ कॉलेज के पहले साल में हैं, लेकिन उन्होंने कई अनुभवी सेल्स प्रोफेशनल्स को पीछे छोड़ दिया. उनके मुताबिक, उम्र या अनुभव नहीं बल्कि काम करने की क्षमता ही असली पहचान है.

रिज्यूमे नहीं, स्किल ने दिलाई पहचान

दिनेश सिंह का कहना है कि सिद्धार्थ के पास न कोई लंबा अनुभव है और न ही बड़े संस्थानों से जुड़ा शानदार रिज्यूमे. इसके बावजूद उनमें एक ऐसी क्षमता है, जिसकी तलाश हर कंपनी करती है.

उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ किसी अनजान व्यक्ति से आसानी से बातचीत कर लेते हैं, उसकी जरूरत समझते हैं, भरोसा बनाते हैं और सफलतापूर्वक डील क्लोज कर लेते हैं. उनके अनुसार, ऐसी स्किल न किसी कॉलेज की डिग्री से मिलती है और न ही इसे केवल रिज्यूमे देखकर पहचाना जा सकता है.

Topmate ने बदला भर्ती का तरीका

दिनेश सिंह ने बताया कि सिद्धार्थ जैसे कर्मचारियों की वजह से कंपनी ने अपनी हायरिंग रणनीति भी बदल दी है. अब कंपनी बड़े कॉलेजों के नाम या आकर्षक रिज्यूमे की बजाय उन लोगों को प्राथमिकता देती है जो वास्तविक काम करके नतीजे दिखा सकें.

उन्होंने कहा कि अब उनकी टीम ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करती है जिनमें सीखने की इच्छा, मेहनत करने का जज्बा और बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता हो. कंपनी के लिए अब डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण स्किल और परिणाम हैं.

युवाओं को दिया खास संदेश

दिनेश सिंह ने अपनी पोस्ट के जरिए छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स को भी आवेदन करने का न्योता दिया. उन्होंने कहा कि अगर किसी में सेल्स की अच्छी समझ है और वह मेहनत करने के लिए तैयार है, तो उसके लिए कॉलेज, अंक या डिग्री मायने नहीं रखते. कंपनी ऐसे लोगों को मौका देना चाहती है जो अपने काम से खुद को साबित कर सकें.

सोशल मीडिया पर मिली खूब सराहना

सिद्धार्थ दुबे की कहानी सोशल मीडिया पर लोगों को काफी प्रेरित कर रही है. कई यूजर्स ने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि आज के स्टार्टअप्स में केवल डिग्री नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन स्किल, आत्मविश्वास और बेहतर प्रदर्शन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. लोगों का कहना है कि सही मौका और काबिलियत मिलने पर युवा कम उम्र में भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं.