अपनी जिंदगी भर की कमाई और संपत्ति बच्चों के नाम करना मातापिता के लिए बड़ा फैसला होता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि संपत्ति वसीयत के जरिए बच्चों को दी जाए या जीवनकाल में ही गिफ्ट कर दी जाए. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जीवनकाल में सरप्लस संपत्ति गिफ्ट करना एक विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे मातापिता अपने फैसले और उसकी वजह बच्चों के सामने साफ कर सकते हैं. हालांकि, ऐसा करने से पहले अपनी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है.

पहले अपनी आर्थिक सुरक्षा पक्की करें

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को संपत्ति या पैसा गिफ्ट करने से पहले वरिष्ठ नागरिकों को अपनी वित्तीय सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नियमित खर्च, जीवनस्तर, भविष्य के इलाज और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त रकम अलग रखनी चाहिए. अचानक आने वाले खर्चों और इमरजेंसी के लिए भी रिजर्व होना जरूरी है. ऐसा इसलिए ताकि संपत्ति गिफ्ट करने के बाद मातापिता को अपने बच्चों पर आर्थिक रूप से निर्भर न होना पड़े. दिल्ली हाई कोर्ट की वकील विनीता सेजवाल के मुताबिक, लाइफटाइम गिफ्टिंग की नींव ही अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित रखने पर टिकी होनी चाहिए.

जीवनकाल में गिफ्ट करने का क्या फायदा?

जीवनकाल में संपत्ति ट्रांसफर करने का बड़ा फायदा यह है कि मातापिता खुद मौजूद रहकर अपने फैसले की वजह समझा सकते हैं. खासतौर पर जब बच्चों को अलगअलग मूल्य या अलगअलग तरह की संपत्तियां दी जा रही हों, तब यह पारदर्शिता विवाद की संभावना कम करने में मदद कर सकती है. दिल्ली हाई कोर्ट की वकील गुडीपति गायत्री कश्यप के मुताबिक, मृत्यु के बाद पूरी संपत्ति के बंटवारे के बजाय जीवनकाल में गिफ्ट करना उत्तराधिकार की प्रभावी योजना हो सकती है. इससे मातापिता बच्चों की चिंताओं को समझकर अपनी मौजूदगी में मतभेद सुलझा सकते हैं.

कैश, शेयर या प्रॉपर्टी में क्या बेहतर?

जीवनकाल में संपत्ति देने के लिए कोई एक एसेट सबसे बेहतर नहीं माना जा सकता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि मातापिता को खुद कितनी लिक्विडिटी चाहिए, टैक्स के नियम क्या हैं और संबंधित संपत्ति से उन्हें आय या व्यक्तिगत उपयोग की जरूरत है या नहीं. कैश ट्रांसफर करना आसान होता है और पाने वाले को तुरंत लिक्विडिटी मिल जाती है. लिस्टेड शेयर और म्यूचुअल फंड भी ट्रांसफर किए जा सकते हैं. जमीन, मकान और सोना जैसी संपत्तियां भविष्य में मूल्य बढ़ने के लिहाज से दी जा सकती हैं, लेकिन अचल संपत्ति को ट्रांसफर करने में वैल्यूएशन, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च आता है.

प्रॉपर्टी गिफ्ट में कानूनी दस्तावेज जरूरी

बड़ी संपत्ति को गिफ्ट करते समय सिर्फ पारिवारिक सहमति पर निर्भर रहना सही नहीं है. गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहिल पटेल के मुताबिक, अचल संपत्ति जैसे मकान और जमीन के लिए रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड की जरूरत होती है. इसके साथ राज्य के नियमों के अनुसार स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी देना पड़ सकता है. खासकर जब बच्चों के बीच संपत्ति बराबर नहीं बांटी जा रही हो, तब दस्तावेजीकरण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। सही लिखापढ़ी नहीं होने पर भविष्य में दबाव डालकर संपत्ति ट्रांसफर कराने या जबरदस्ती संपत्ति लेने जैसे आरोपों से विवाद पैदा हो सकता है.

वसीयत या गिफ्ट, फैसला कैसे लें?

जीवनकाल में संपत्ति गिफ्ट करने का मतलब यह नहीं है कि मातापिता अपनी पूरी संपत्ति बांट दें. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पहले अपने रहने के खर्च, स्वास्थ्य, आपात स्थिति और लंबी उम्र से जुड़ी वित्तीय जरूरतों के लिए पर्याप्त संपत्ति सुरक्षित रखना जरूरी है. इसके बाद जो संपत्ति वास्तव में सरप्लस है, उसे योजना बनाकर ट्रांसफर करने पर विचार किया जा सकता है. अगर गिफ्ट किया जा रहा है तो पारदर्शिता और सही कानूनी दस्तावेज जरूरी हैं. इस तरह वित्तीय रिजर्व और स्पष्ट उत्तराधिकार योजना के साथ किया गया ट्रांसफर भविष्य में पारिवारिक विवाद की संभावना कम करने में मदद कर सकता है.