
Yogi Adityanath Announcements For Teachers And Shiksha Mitra : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए पिटारा खोल दिया है। बजट सत्र के दौरान की गई ये घोषणाएं न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इसे सरकार का एक बड़ा चुनावी मास्टरस्ट्रोक भी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार प्रदेश के विकास की नींव रखने वाले शिक्षकों और शिक्षामित्रों के मान-सम्मान के साथ खड़ी है।
इस घोषणा की सबसे बड़ी बात शिक्षामित्रों के मानदेय में होने वाली ऐतिहासिक वृद्धि है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षामित्रों को अब 10 हजार रुपये के बजाय 18 हजार रुपये प्रति माह का मानदेय मिलेगा। यह सीधी 8000 रुपये की बढ़ोतरी है, जो लगभग 80% का इजाफा दर्शाती है। लंबे समय से आर्थिक तंगी और अनिश्चितता से जूझ रहे शिक्षामित्रों के लिए यह किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है। इसी तरह, अनुदेशकों (इंस्ट्रक्टर्स) के मानदेय को भी बढ़ाकर 17,000 रुपये कर दिया गया है। सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि पहले इन कर्मचारियों को कुछ हजार रुपयों में गुजारा करना पड़ता था, लेकिन भाजपा सरकार ने उनके श्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित किया है।
5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा
शिक्षकों के कल्याण के लिए यूपी सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा को मंजूरी दी है। अब सरकारी शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च नहीं करनी होगी। शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए सीएम कंपोजिट स्कूल योजना के तहत 2382 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही माध्यमिक स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में 75% खर्च सरकार खुद उठाएगी।
सैनिटरी नैपकिन वितरण के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था
महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में लड़कियों को सैनिटरी नैपकिन वितरण हेतु 300 करोड़ रुपये की विशेष व्यवस्था की गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी योगी सरकार ने मील का पत्थर गाड़ा है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि जिन छह कमिश्नरियों में पहले एक भी विश्वविद्यालय नहीं था, वहां अब विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं। ये कदम दर्शाते हैं कि योगी सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानकर मिशन मोड में काम कर रही है।