पिछले साल सरकार ने जीएसटी की दरों में कटौती की थी. जिसका असर अब देश के ऑटो सेक्टर में साफ देखने को मिल रहा है. टैक्स में राहत मिलने के बाद से सस्ती हुई ​गाड़ियों की सेल में बढ़ोतरी देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो तब से गाड़ियों की बिक्री में 20 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. जिसकी वजह से सुस्त पड़े ऑटो सेक्टर को एक बार फिर से संजीवनी मिल गई है. गाड़ियों के दाम घटने से पैसेंजर व्हीकल और टूव्हीलर दोनों ही में खरीदारी तेजी से बढ़ी है.

ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों का मानना है कि जीएसटी दरों में राहत मिलने से ग्राहकों की जेब पर बोझ कम हुआ है और शोरूम्स में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है. टैक्स में यह कटौती ऐसे समय पर आई है जब खरीदार कीमतों में नरमी का इंतजार कर रहे थे. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, सेल्स में 20 फीसदी की यह बढ़ोतरी न केवल ऑटो मेकर्स के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह देश की इकोनॉमी और कंज्यूमर स्पेंडिंग में आ रही मजबूती का भी सीधा संकेत है. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

मारुति सुजुकी में 96 फीसदी से ज्यादा उछाल

ऑटो इंडस्ट्री के बड़े अधिकारियों के मुताबिक, भारत में पिछले 11 महीनों में गाड़ियों की सेल 20% बढ़कर 3 करोड़ गाड़ियां हो गई है. इसकी वजह GST दरों में कटौती से गाड़ियों का सस्ता होना और पहली बार गाड़ी खरीदने वालों का शोरूम तक वापस आना है. यह बदलाव एक साल पहले GST 2.0 रिफॉर्म्स के लागू होने के बाद आया है, जिनसे सभी तरह की गाड़ियों पर टैक्स की दरें कम हुईं और शहरी व ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग फिर से बढ़ी.

मारुति सुजुकी में, अप्रैल और अगस्त 2026 के बीच पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 36% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें एंट्रीलेवल सेगमेंट में 96 फीसदी से ज्यादा उछाल आया. मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा कि यह भारतीय ग्राहकों की ताकत और गाड़ियों के किफायती होने की अहमियत की ओर इशारा करता है. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान को तेज कर रही है, जिससे “पूरी इकोनॉमी पर मल्टीप्लायर असर” पड़ने की उम्मीद है.

हर महीने 4 लाख से ज्यादा यूनिट्स की थोक बिक्री

हुंडई मोटर इंडिया ने भी इस ट्रेंड को दोहराया. HMIL के MD और CEO तरुण गर्ग ने कहा कि GST 2.0 रिफॉर्म भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाले साबित हुए हैं. उन्होंने बताया कि हर महीने 4 लाख से ज्यादा यूनिट्स की थोक बिक्री अब “न्यू नॉर्मल” बन गई है. गर्ग ने आगे कहा कि सितंबर 2025 और मार्च 2026 के बीच पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में सालाना 15 फीसदी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई, और अगले पांच महीनों में यह रफ्तार बढ़कर 29 फीसदी से ज्यादा हो गई.

अल्टरनेटिवफ्यूल गाड़ियों ने पेट्रोल मॉडल को पीछे छोड़ा

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के डाटा के अनुसार, भारतीय ऑटो रिटेल में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. इसमें सालदरसाल लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सुधार से पहले के इसी तरह के साल में यह बढ़ोतरी 5 फीसदी से भी कम थी. FADA के प्रेसिडेंट साई गिरिधर ने कहा कि टूव्हीलर की सेल्स 2018 के लेवल पर पहुंच गई है, पैसेंजर सेगमेंट में पहली बार अल्टरनेटिवफ्यूल वाली गाड़ियों ने पेट्रोल मॉडल को पीछे छोड़ दिया है, और रूरल मार्केट अब शहरी बाजारों से आगे निकल रहे हैं. उन्होंने कहा कि बेहतर अफोर्डेबिलिटी ने “सिर्फ डिमांड को आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि बाजार का दायरा भी बढ़ाया.

SUV की बिक्री में 17 फीसदी की बढ़ोतरी

इसका असर सिर्फ पैसेंजर गाड़ियों तक ही सीमित नहीं रहा. महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप CEO और MD अनीश शाह ने कहा कि बदलावों के बाद SUV की बिक्री में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि हल्के कमर्शियल वाहनों और ट्रैक्टरों की सेल में 20 फीसदी का उछाल आया है. उन्होंने आगे कहा कि इस सुधार से महिंद्रा फाइनेंस में लोन डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ा है और ग्रुप के हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स बिजनेस में लोगों के खर्च करने की क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है.

शाह ने कहा, GST 2.0 दिखाता है कि कैसे स्ट्रक्चरल सुधार, जब मजबूत कंज्यूमर डिमांड और बिजनेस इन्वेस्टमेंट के साथ मिलते हैं, तो अफोर्डेबिलिटी, कंजंप्शन, इन्वेस्टमेंट और ग्रोथ का एक अच्छा साइकिल बना सकते हैं. हालांकि, अधिकारियों ने आगाह किया कि घरेलू मांग बढ़ने के बावजूद, मैन्युफैक्चरर्स ग्लोबल कमोडिटी और करेंसी में उतारचढ़ाव से पैदा होने वाले कॉस्ट के दबाव को खुद ही झेल रहे हैं.