अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने से भारत में सोना खरीदने वालों को कुछ राहत मिल सकती है, क्योंकि आने वाले हफ्तों में सोने की कीमतें बड़े उतारचढ़ावा की संभावना कम हो गई है. हालांकि, बाजार में लगातार सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम होती हैं. दूसरी ओर भारत में फेस्टिव सीजन के दौरान बढ़ रही मांग और ग्लोबल टेंशन कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है.

कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने से सोने की कीमतों में स्थिरता आ सकती है. इससे खरीदारों को कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन कीमतों में स्थिरता आने और लगातार तेजी शुरू होने के बीच अंतर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,120 डॉलर प्रति औंस और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 10 ग्राम सोने की कीमत 1.46 लाख रुपये के स्तर से नीचे रहने पर दबाव बना हुआ है.

अगर घरेलू बाजार में कीमतें 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आती हैं, तो खरीदारों को खरीदारी का मौका मिल सकता है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। हालांकि, रुपये और डॉलर की एक्सचेंज रेट भी भारतीय बाजार में सोने की कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.

दिसंबर में ब्याज दरों पर फैसले से तय होगी आगे की चाल

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फेड के फैसले से सोने की कीमतों की दिशा में ज्यादा बदलाव नहीं आया है, क्योंकि बाजार को पहले से ही ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद थी. अब दिसंबर में अमेरिकी फेड के ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 78% बताई जा रही है. इससे सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. दरअसल, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं. दूसरी ओर, सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता. ऐसे में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका सोने की मांग और कीमतों को प्रभावित कर सकती है.

भारत में त्योहारी मांग से मिल रहा सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के बावजूद भारत में पिछले कुछ दिनों से सोने की खरीदारी बढ़ी है. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले 5 दिनों में देशभर में सोने की अच्छी खरीदारी देखने को मिली है. त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. मांग बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में सोने पर मिलने वाली छूट भी कम हुई है.