मिडटर्म इलेक्शन से पहले अमेरिकियों को यूएस के सेंट्रल बैंक फेड रिजर्व से बड़ी राहत मिली है. सितंबर के महीने में ब्याज दरें बढ़ाने के बाद फेड रिजर्व ने एक बार फिर से पॉज बटन दबा दिया है. इसका मतलब है कि अमेरिका में पॉलिसी रेट 3.75—4 फीसदी की रेंज में ही रहेंगी. आम लोगों के लिए राहत की बात ये है कि उनकी लोन ईएमआई में लगातार दूसरी बार इजाफा नहीं होगा. इस फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. जहां नैस्डेक में मामूली गिरावट है. वहीं दूसरी ओर डाव जोंन और एसएंडपी 500 हरे निशान पर कारोबार करते हुए दिखाई दे रहे हैं. वैसे जानकारों का कहना है कि दिसंबर महीने की फेड रिजर्व की मीटिंग में पॉलिसी रेट में 0.25 फीसदी का इजाफा देखने को मिल सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर फेड चेयरमैन की ओर से किस तरह की जानकारी दी गई है.

US Federal Reserve keeps interest rates unchanged at 3.75%4%

The Fed says economic activity is expanding at a strong pace, while inflation remains elevated. https://t.co/rO5vHl90sf

— ANI October 28, 2026

नहीं बढ़ी ब्याज दरें

फेडरल रिजर्व ने अपनी अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और ब्याज दरों को 3.75% से 4% की लक्ष्य सीमा को बनाए रखा. बाज़ार को पहले से ही उम्मीद थी कि ऐसा ही होगा. फेडरल ओपन मार्केट कमिटी के दो सदस्यों ने इस फैसले से असहमति जताई. गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक दरों को 0.25% बढ़ाने के पक्ष में थीं. फेड चेयरमैन केविन वॉर्श दोपहर 2:30 बजे होने वाली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय बैंक के इस ताजा फैसले पर चर्चा करेंगे. फेड का कहना है कि आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि महंगाई का स्तर ऊंचा बना हुआ है. अब ट्रेडर्स का ध्यान दिसंबर की बैठक पर है. CME फेडवॉच टूल के अनुसार, फेड फंड्स फ्यूचर्स ट्रेडिंग से संकेत मिल रहा है कि दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 85 फीसदी है.

अब सिर्फ 6 मीटिंग में तय होंगे फेड रेट

फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने कहा कि केंद्रीय बैंक उन बैठकों की संख्या कम करेगा, जिनमें सदस्य दरों पर वोट करते हैं. वॉर्श ने कहा कि हमारा मानना ​​है कि FOMC के लिए साल में आठ बैठकें सही संख्या हैं, लेकिन 2027 में एक बैठक पूरी तरह से व्यापक मॉनेटरी पॉलिसी रणनीति पर केंद्रित होगी. इसमें फेडरल फंड दरों पर कोई वोट नहीं होगा और न ही कोई नीतिगत बयान आने की उम्मीद है. बाकी बैठकें नियमित FOMC नीतिनिर्धारण बैठकें होंगी. मुझे उम्मीद है कि 2028 में हम दो बैठकें रणनीति पर चर्चा के लिए और छह बैठकें नीति तय करने के लिए रखेंगे. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। बाद में वॉर्श ने यह भी जोड़ा कि उन्हें इन रणनीति बैठकों के दौरान कोई नीतिगत निर्णय लिए जाने की “उम्मीद नहीं” है.

बनी हुई है महंगाई

आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं. हालांकि जियो पॉलिटिकल घटनाक्रमों के कारण अनिश्चितता अभी भी काफी बनी हुई है, लेकिन घरेलू खर्च मजबूत बना हुआ है. उत्पादकता में अच्छी वृद्धि हो रही है और पूंजी निवेश भी मजबूत है. रोजगार में वृद्धि, कार्यबल में हो रही बढ़ोतरी के साथ तालमेल बिठाए हुए है, और बेरोजगारी दर में भी कोई खास बदलाव नहीं आया है. महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. जैसेजैसे और जानकारी सामने आएगी, समिति को यह तय करने में मदद मिलेगी कि महंगाई को समय रहते 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक वापस लाने के लिए कौन सी नीति अपनानी चाहिए. समिति कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करेगी.

मिडटर्म इलेक्शन से पहले आया बड़ा फैसला

फेड रिजर्व का पॉलिसी होल्ड करने का फैसला 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से एक हफ्ते से भी कम समय पहले आया है. इन चुनावों से यह तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण बना रहता है या फिर वह एक या दोनों सदनों को डेमोक्रेट्स के हाथों गंवा देती है. चूंकि दरों में बदलाव न होने की उम्मीद पहले से ही थी, इसलिए अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व और कितनी बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है, क्योंकि महंगाई अभी भी इसके 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है. यह फैसला ऐसे कठिन आर्थिक माहौल में आया है, जहां कच्चे तेल की कीमतें, टैरिफ से जुड़ी लागतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग से मजबूत मांग के कारण महंगाई का दबाव और बढ़ गया है.

महंगाई सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है

फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना, ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर’ प्राइस इंडेक्स, हाल के महीनों में केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य की दिशा में बहुत कम आगे बढ़ा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में हेडलाइन महंगाई और कई अन्य महंगाई इंडीकेटर्स में बढ़ोतरी हुई है, और इनकी सालाना दर 3% या उससे ऊपर बनी हुई है.

सितंबर के लिए आधिकारिक PCE महंगाई रिपोर्ट गुरुवार को जारी होने वाली है, जो फेड की नीतिगत घोषणा के एक दिन बाद आएगी. कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे यह चिंता पैदा हो गई है कि महंगाई का दायरा अब काफी बढ़ गया है—यह केवल एनर्जी या सप्लाई से जुड़ी समस्याओं तक ही सीमित नहीं रह गई है.

उपभोक्ता खर्च अभी भी मजबूत बना हुआ है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के कारण अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में मांग बढ़ी है. इन हालात को देखते हुए यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि महंगाई को काबू में लाने के लिए फेड को शायद लंबे समय तक सख्त मॉनेटरी पॉलिसी बनाए रखनी पड़े.

महंगाई अभी भी चिंता का विषय

ऊर्जा की कीमतें अमेरिकी पॉलिसी मेकर्स के लिए एक और बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं. ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो सितंबर की शुरुआत से अब तक करीब 20 फीसदी बढ़ी हैं.यह बढ़ोतरी ईरान के साथ अमेरिकाइजरायल के टकराव से जुड़ी बाधाओं के कारण हुई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिससे कृषि, परिवहन, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों से जुड़े व्यवसायों पर कॉस्ट का अतिरिक्त दबाव पड़ गया है.

एनर्जी की अधिक कॉस्ट पूरी इकोनॉमी में कीमतों को बढ़ा सकती है, जिससे महंगाई को कंट्रोल करने के फेड के प्रयासों में मुश्किलें आ सकती हैं. इस बीच, ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर भी कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि महंगाई लंबे समय तक बनी रह सकती है. इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और कंज्यूमर्स की लगातार मजबूत मांग ने महंगाई के भविष्य को और अधिक अनिश्चित बना दिया है.

क्या फेड फिर से ब्याज दरें बढ़ाएगा?

बाजार के जानकारों का मानना ​​है कि अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक फिर से ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर सकता है. कुछ अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आने वाली बैठकों में 2525 बेसिस पॉइंट की तीन और बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार के अनुमानों के मुताबिक, जून 2027 तक हर तिमाही में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं. भविष्य में ब्याज दरों में कितनी और कब बढ़ोतरी होगी, यह महंगाई के नए आंकड़ों, लोगों के खर्च करने के रुझान और देश की व्यापक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा.

फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही इस बात पर जोर दे चुके हैं कि महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य तक तेजी से वापस लाना बहुत जरूरी है. मई में कार्यभार संभालने के बाद से, वॉर्श को ऐसे आर्थिक माहौल का सामना करना पड़ा है, जहां महंगाई कम करने वाले कई कारक अभी तक कोई खास राहत नहीं दे पाए हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पादकता बढ़ने की जो उम्मीद थी, उसका असर अभी तक पूरी इकोनॉमी में महंगाई को कम करने के रूप में नहीं दिखा है. वहीं, टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के तेजी से विस्तार ने अल्पकालिक मांग को और बढ़ा दिया है. फेड को यह भी देखना होगा कि क्या ऊर्जा की ऊंची कीमतें और टैरिफ पूरी इकोनॉमी में फैल रहे हैं, जिससे महंगाई को काबू में लाना और भी मुश्किल हो सकता है. फाइनेंशियल मार्केट्स की नजर अब गुरुवार को आने वाली PCE महंगाई रिपोर्ट और उसके बाद के आर्थिक संकेतकों पर है, जिनसे केंद्रीय बैंक के अगले नीतिगत कदम के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं.

भारत पर क्या होगा असर?

अब जब फेड की ओर से पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है. अब सवाल ये उठता है कि आने वाली आरबीआई एमपीसी किस तरह का फैसला लेगी. अक्टूबर के महीने में आरबीआई एमपीसी ने करीब 4 साल के बाद पॉलिसी रेट में 0.25 फीसदी का इजाफा किया गया. सितंबर के महीने में महंगाई में इजाफा हुआ. जोकि अक्टूबर के महीने में भी बढ़ने के आसार दिखाई दे रहे हैं. जिसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल कीमतें और फूड इंफ्लेशन होने की संभावना है. ऐसे में कुछ जानकारों का कहना है कि दिसंबर की पॉलिसी मीटिंग आरबीआई ब्याज दरों में 0.25 फीसदी इजाफा कर सकता है. वहीं कुछ धड़ों का ये भी कहना है कि आरबीआई भी ब्याज दरों में इजाफे पर ब्रेक लगा सकता है, जैसे कि फेड रिजर्व ने किया है.