
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सड़क हादसे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के सोने की तस्करी के बहुत बड़े रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। सकरावा थाना प्रभारी भगमाल सिंह की अगुवाई में पुलिस की टीम कानून-व्यवस्था की ड्यूटी कर कन्नौज से वापस लौट रही थी। इसी दौरान एक्सप्रेसवे पर निकवा गांव के पास किलोमीटर 171 पर एक तेज रफ्तार ब्रेजा कार ने पुलिस के सरकारी वाहन को जोरदार टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि पुलिस का वाहन सेंट्रल डिवाइडर पर चढ़ गया, हालांकि गाड़ी में सवार सभी पांचों पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए और उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई। इस हादसे के बाद कार सवार दोनों व्यक्तियों ने वहां से भागने का प्रयास किया, लेकिन गाड़ी स्टार्ट न होने के कारण वे सफल नहीं हो सके।
हादसे के बाद पुलिस ने जब दोनों कार सवारों के पास जाकर पूछताछ शुरू की, तो वे बेहद घबराए हुए दिखे । उनके हाव-भाव और घबराहट को देखकर पुलिसकर्मियों को गहरा शक हुआ संदेह के आधार पर जब पुलिस ने कार की सघन तलाशी ली, तो गाड़ी के अंदर रखे एक काले रंग के बैग ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी उस बैग की तलाशी लेने पर पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए। बैग के भीतर से सोने की 10 चमचमाती हुई ईंटें (गोल्ड बार) बरामद हुईं। बरामद किए गए इस सोने का कुल वजन लगभग 10.26 किलोग्राम मापा गया है, जो कि 24 कैरेट शुद्धता का बताया जा रहा है। बाजार में इस बरामद सोने की अनुमानित कीमत लगभग 15 से 16 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार किए गए तस्करों की पहचान सरोज पंत और संदीप जयसवाल के रूप में हुई है। इनमें से सरोज पंत पड़ोसी देश नेपाल के पाल्पा जिले का निवासी है, जबकि संदीप जयसवाल उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के बरी क्षेत्र का रहने वाला है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे इस सोने की खेप को नेपाल के रास्ते भारत लाकर दिल्ली की ओर ले जा रहे थे। हैरान करने वाली बात यह है कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने इस घटना से ठीक तीन दिन पहले भी नेपाल से दिल्ली तक सोने की तीन बड़ी ईंटों की सफलतापूर्वक तस्करी की थी। इस खुलासे के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इन दोनों मामलों के तार आपस में जुड़े हुए हैं और दिल्ली में इस सोने को किसे सौंपा जाना था।
इस बड़े खुलासे के बाद कन्नौज पुलिस की तरफ से तत्काल प्रभाव से सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग और अन्य वित्तीय जांच एजेंसियों को सूचित कर दिया गया है। तालग्राम थाना प्रभारी रंजना पांडे के अनुसार, बरामद सोने की खेप और दोनों आरोपियों को आगे की कड़ाई से पूछताछ और वैधानिक कार्रवाई के लिए कस्टम विभाग के हवाले कर दिया गया है। कस्टम विभाग की टीम दोनों आरोपियों को लखनऊ लेकर रवाना हो चुकी है, जहां उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, तस्करी के रूट और इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं के बारे में गहन पूछताछ की जा रही है। स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की जांच में कस्टम विभाग को हर संभव सुरक्षात्मक और रणनीतिक मदद मुहैया करा रही है।
तस्करी के इस नए नेटवर्क के खुलासे के बाद पुलिस महानिरीक्षक और स्थानीय पुलिस कप्तानों ने एक्सप्रेसवे पर गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने के निर्देश दिए हैं। आमतौर पर एक्सप्रेसवे का उपयोग यात्री वाहनों और मालवाहक ट्रकों की आवाजाही के लिए किया जाता है, लेकिन अब तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए इन प्रमुख और सुगम रास्तों का इस्तेमाल करने लगे हैं। एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की तेज गति के कारण चेकिंग थोड़ी मुश्किल होती है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर आसानी से लंबी दूरी तय कर लेते हैं। इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे के सभी टोल प्लाजा और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि संदिग्ध वाहनों की समय रहते पहचान की जा सके।
स्थानीय खुफिया विभाग और कस्टम विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बरामद किया गया सोना नेपाल के रास्ते किसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे या समुद्री मार्ग से होते हुए वहां पहुंचा था, जहां से इसे भारतीय सीमा में प्रवेश कराया गया। सीमावर्ती इलाकों में कड़े सुरक्षा पहरे के बावजूद तस्कर विभिन्न गुप्त रास्तों का सहारा लेते हैं। इस मामले में पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या इन तस्करों के पीछे कोई बड़ा हवाला कारोबारी या देश के बड़े शहरों में सक्रिय कोई ज्वेलरी सिंडिकेट काम कर रहा है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। सोने की इन ईंटों पर बने विशिष्ट नंबरों और हॉलमार्क के जरिए इनकी मूल उत्पत्ति (ओरिजिन) का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
खबर का बैकग्राउंड:
उत्तर प्रदेश का भारत-नेपाल सीमा से सटा होना लंबे समय से तस्करों के लिए एक संवेदनशील मार्ग रहा है। महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती जिलों से सोने की तस्करी की घटनाएं पूर्व में भी कई बार सामने आई हैं। इन मामलों में सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचकर विदेशी सोने को नेपाल के रास्ते भारत के प्रमुख महानगरों में खपाने की योजना बनाई जाती है। इस बार पुलिस के सरकारी वाहन से हुई अप्रत्याशित टक्कर ने तस्करों के इस पूरे नेटवर्क की पोल खोल कर रख दी।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय सोने की तस्करी देश की आर्थिक संप्रभुता को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। कर चोरी के जरिए होने वाली यह तस्करी बाजार की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बिगाड़ती है और अवैध धन के प्रवाह को तेज करती है। इस तरह के कड़े एक्शन से न केवल अवैध गतिविधियों पर लगाम लगती है बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।
UP Prime News एनालिसिस:
यह घटना दर्शाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध व्यापार को रोकने के लिए एक्सप्रेसवे और सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त व आधुनिक चेकिंग तकनीकों का होना अनिवार्य है। पुलिस और कस्टम विभाग का यह संयुक्त समन्वय आने वाले समय में ऐसे अन्य बड़े सिंडिकेट्स पर नकेल कसने में कारगर सिद्ध होगा।



