
उत्तर प्रदेश में लखनऊ से सुल्तानपुर कोर्ट जाते समय कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के काफिले के साथ बड़ा हादसा हो गया। राहुल गांधी के काफिले में शामिल कई गाड़ियां आपस में एक-दूसरे से टकरा गईं। इस दुर्घटना में कांग्रेस पार्टी के कई कार्यकर्ता और स्थानीय पदाधिकारी घायल हो गए हैं। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर पांच गाड़ियां और एम्बुलेंस आपस में टकराने के बाद क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालांकि राहुल की गाड़ी और वह खुद सुरक्षित कोर्ट के लिए चले गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, राहुल गांधी मानहानि के एक मामले में सुल्तानपुर स्थित कोर्ट में पेशी के लिए जा रहे थे। काफिला जैसे ही शहर के करीब पहुंचा, अचानक आगे चल रही एक गाड़ी ने इमरजेंसी ब्रेक लगी दी। इसके बाद पीछे चल रही गाड़ियां एक-दूसरे से पीछे से टकराते चली गईं। वाहनों की रफ्तार तेज होने के कारण टक्कर इतनी तेज थी कि कई गाड़ियों के अगले और पिछले हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
कार्याकर्ताओं और पदाधिकारियों को चोटें
हादसे से मौके पर अफरातफरी मच गई। काफिले में मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता तुरंत क्षतिग्रस्त वाहनों से बाहर आए। गाड़ियों में सवार कई स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को चेहरे, हाथ और पैर में चोटें आई हैं। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और सुरक्षा बलों की मदद से क्षतिग्रस्त गाड़ियों को किनारे किया गया।
राहुल गांधी सुरक्षित, कोर्ट के लिए रवाना
राहत की बात यह रही कि राहुल गांधी की अपनी मुख्य गाड़ी इस दुर्घटना से सुरक्षित बच गई और उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई है। सुरक्षा दस्ते ने तुरंत स्थिति को संभाला और राहुल गांधी के वाहन को सुरक्षित निकालकर सुल्तानपुर कोर्ट परिसर के लिए रवाना कराया। पुलिस प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
राहुल गांधी को बड़ी राहत
राहुल गांधी अमित शाह मानहानि मामले में पेश होने के लिए सुल्तानपुर जा रहे थे। वहां भी राहुल गांधी को राहत मिल गई है। मानहानि केस में कोर्ट ने राहुल गांधी को बरी कर दिया है।एमपी -एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने फैसले में लिखा कि याची विजय मिश्र की मानहानि का कोई ठोस सबूत नहीं साबित हो सका। न्यायालय के फैसले को राहुल गांधी ने सत्य की जीत बताया। कहा सत्ता पक्ष ऐसे आरोप लगाकर उन पर कई मुकदमे दर्ज कराए हैं जिनकी कोई सत्यता नहीं है। मामला 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान का है। राहत को कांग्रेस की संजीवनी माना जा रहा है।



