Narmada Dispute OneTime Settlement: सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण लागत और नर्मदा अवॉर्ड का 24 साल पुराना विवाद सुलझ गया है।
  
मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने मंगलवार को नई दिल्ली में वन टाइम सेटलमेंट किया। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही करीब ढाई दशक पुराना विवाद खत्म हो गया।

समझौता से एमपी को बड़ा आर्थिक नुकसान

मप्र सरकार की डिमांड थी कि प्रदेश सरकार को सरदार सरोवर डैम के मुआवजे के रूप में 7669 करोड़ रुपए मिले, लेकिन समझौते के तहत अब मप्र सरकार को 550 करोड़ रुपए गुजरात सरकार को देना होंगे। एक तरह से चारों राज्यों के बीच समझौता हुआ, लेकिन एमपी को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

आदरणीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में नर्मदा अवार्ड के मामले में गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ मप्र के सभी लंबित मामलों का ऐतिहासिक समाधान हुआ।

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में राज्यों के बीच… pic.twitter.com/ooOnUxIotj

— Dr Mohan Yadav July 7, 2026

24 साल से पेंडिंग था चार राज्यों की हिस्सेदारीभुगतान

दरअसल, 2002 से परियोजना की निर्माण लागत में चारों राज्यों की हिस्सेदारी और लंबित भुगतान पेंडिंग था। परियोजना की लागत साझेदारी और देयकों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। वन टाइम सेटलमेंट के साथ चारों राज्यों में लंबित दावों और देयों का अंतिम निपटारा करने पर सहमति बनी है।

चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नई दिल्ली में किया समझौता

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद रहे। 

एमपी, गुजरात और राजस्थान को हुआ अधिक लाभ

चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के समझौता पर हस्ताक्षर करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने कहा कि पानी का उपयोग चाहे गुजरात, मध्यप्रदेश में हो या राजस्थान या महाराष्ट्र में हो, इसका सीधा लाभ तो भारतीय किसानों को ही होगा। जल संसाधनों को राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपदा के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका सबसे अधिक लाभ मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान को हुआ है।

मप्र की 5 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन हो गई जलमग्न

मप्र के 178 गांव की 15 हजार 625.6 हेक्टेयर भूमि 2002 में सरदार सरोवर बांध के डूब में थी। 2019 में बांध पहली बार पूरी क्षमता से भरा, जिससे उसकी वास्तविक स्थिति सामने आई। अब 192 गांवों की 20 हजार 822 हेक्टेयर भूमि डूब में है। बांध की हाइट बढ़ने से एमपी की करीब 5 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन जलमग्न हो गई।

मप्र ने 7669 करोड़ तो गुजरात ने 5516 करोड़ का दावा किया

मप्र ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून व 201920 के बाजार भाव के आधार पर 7 हजार 669 करोड़ रुपए का संशोधित दावा किया था। जबकि गुजरात 2001 की दरों के मुताबिक, 281 करोड़ रुपए देने पर अड़ा रहा। साथ ही, बांध निर्माण और रखरखाव लागत का हिस्सा बताकर मप्र पर 5 हजार 516.50 करोड़ रुपए की देनदारी का दावा ​किया था, लेकिन मप्र सरकार ने नकार दिया था।