समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त रास्तों में गिने जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव गहराता जा रहा है. जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों और जेबेल अली पोर्ट पर बढ़ते दबाव ने दुनिया भर के व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे मुश्किल दौर में संयुक्त अरब अमीरात के तीसरे सबसे बड़े अमीरात शारजाह ने एक बड़ा दांव चला है. शारजाह अपने रणनीतिक खोरफक्कन पोर्ट के जरिए भारतीय मैन्युफैक्चरर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अपने यहां खींचने में जुट गया है. अमीरात का लक्ष्य अगले दो वर्षों यानी 2026 और 2027 के दौरान भारत से कुल 3 अरब डॉलर का भारीभरकम निवेश जुटाना है.

शारजाह को 3 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद
इस पूरे प्लान की कमान शारजाह की आधिकारिक निवेश एजेंसी ‘इन्वेस्ट इन शारजाह’ के हाथों में है. एजेंसी के सीईओ मोहम्मद जुमा अल मुशर्रख ने बताया कि वे इस साल भारत से करीब 1.5 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद कर रहे हैं. इसके बाद अगले साल भी लगभग 1.5 अरब डॉलर का निवेश आने का अनुमान है. ये आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले लगभग 15 फीसदी की मजबूत बढ़त को दर्शाता है.
शारजाह का मानना है कि भारतीय कंपनियां यहां अपनी प्रोडक्शन यूनिट्स लगाने के साथ अपने एक्सपोर्ट बेस तैयार करेंगी. ये कदम भारतीय कंपनियों को सिर्फ यूएई ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे बड़े खाड़ी देशों के बाजारों में सीधी और आसान पहुंच देगा.
खोरफक्कन पोर्ट के जरिए खाड़ी देशों में पैठ बनाएगा भारत
इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र खोरफक्कन कमर्शियल टर्मिनल है. ये यूएई का इकलौता ऐसा पूरी तरह कमर्शियल बंदरगाह है जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य के अशांत दायरे से बाहर ओमान की खाड़ी पर स्थित है.
अल मुशर्रख के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव के कारण जहाजों के सामान्य रास्ते प्रभावित हुए हैं, लेकिन खोरफक्कन पोर्ट इस खतरे से पूरी तरह सुरक्षित है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। ये पोर्ट प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पूर्वपश्चिम समुद्री रास्तों से सीधे जुड़ा हुआ है. इसी वजह से भारतीय कारोबारियों के बीच इस लोकेशन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है. उनका मानना है कि इससे भारत और यूएई के बीच आपसी कारोबार में तेजी आएगी और भारतीय कंपनियां शारजाह को पूरे क्षेत्र के गेटवे के तौर पर इस्तेमाल करेंगी.
दुबई छोड़ शारजाह की तरफ कंपनियों का रुख
शिपिंग संकट का असर अब कारोबारी फैसलों पर साफ दिखने लगा है. इन्वेस्ट इन शारजाह के मुताबिक, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की पूछताछ तेजी से बढ़ गई है. सबसे ज्यादा मांग खोरफक्कन पोर्ट के पास मौजूद इंडस्ट्रियल जमीन की देखने को मिल रही है. कंपनियां पोर्ट के करीब अपनी फैक्ट्रियां और वेयरहाउस बनाने के लिए जमीन तलाश रही हैं.
दिलचस्प बात ये भी है कि कई कंपनियां दुबई और अबू धाबी से अपना कारोबार पूरी तरह समेटे बिना शारजाह की तरफ अपने काम का विस्तार कर रही हैं. अल मुशर्रख ने बताया कि कंपनियां यूएई के भीतर अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं और खोरफक्कन पोर्ट के पास जगह चुन रही हैं, ताकि माल भेजने में किसी भी तरह की रुकावट न आए.
कंटेनर क्षमता बढ़ाने की मेगा तैयारी
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए खोरफक्कन बंदरगाह के 2 अरब डॉलर के विस्तार का काम तेज कर दिया गया है. पोर्ट ऑपरेटर कंपनी ‘गल्फटेनर’ चरणबद्ध तरीके से इस बंदरगाह की क्षमता बढ़ा रही है.
मौजूदा समय में इस पोर्ट की क्षमता सालाना 35 लाख टीईयू कंटेनर संभालने की है, जिसे बढ़ाकर 50 लाख टीईयू किया जा रहा है. लंबी अवधि में इसे 1 करोड़ टीईयू से पार ले जाने का लक्ष्य रखा गया है. एक टीईयू का पैमाना 20 फीट लंबे मानक शिपिंग कंटेनर के बराबर होता है. विस्तार की ये योजना शारजाह को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा लॉजिस्टिक्स केंद्र बनाएगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को बिना किसी समुद्री रुकावट के अरब देशों तक अपना माल पहुंचाने का एक सुरक्षित जरिया मिलेगा.



