कच्चे तेल के बाजार में अचानक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. जो क्रूड ऑयल महज पंद्रह दिन पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाकर दुनिया भर को डरा रहा था, वह सोमवार को धड़ाम से गिरकर 88 डॉलर पर आ गया. एक ही दिन में आई यह 9% की भारी गिरावट शेयर बाजार और महंगाई से जूझ रहे आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. आखिर यह खेल कैसे पलटा? इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के टलते बादल. अमेरिका ने ईरान पर अपने सैन्य हमले रोक दिए हैं और तेहरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अब पलटवार नहीं करेगा.

कैसे शांत हुआ अमेरिकाईरान विवाद?

पिछले दो हफ्तों से अमेरिका लगातार ईरान के ठिकानों पर हमले कर रहा था. लेकिन शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने अचानक ब्रेक लगा दिया. राजनयिकों का मानना है कि दोनों देशों ने बातचीत को थोड़ा ‘स्पेस’ देने के लिए यह कदम उठाया है. इस पूरी कूटनीतिक सुलह के पीछे चीन और पाकिस्तान का बड़ा रोल बताया जा रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों में लगातार हो रहे हमलों और दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के बंद होने से चीन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. इसलिए, बीजिंग ने पाकिस्तान पर दबाव डाला है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को दोबारा शुरू करवाए.

कूटनीतिक शतरंज में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान के लिए यह मध्यस्थता करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि उसकी स्थिति ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ वाली हो गई है. एक तरफ यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी कर रखी है. पाकिस्तान ने पिछले साल ही सऊदी के साथ रक्षा समझौता किया था और वह आर्थिक मदद के लिए रियाद पर बहुत ज्यादा निर्भर है. अगर इस्लामाबाद ईरान के प्रति थोड़ी भी नरमी दिखाता है, तो सऊदी अरब भड़क सकता है. वहीं दूसरी तरफ, चीन का भारीभरकम कर्ज और दबाव पाकिस्तान पर है. चीन चाहता है कि मिडिल ईस्ट के व्यापारिक रास्ते जल्द खुलें, जिसके लिए पाकिस्तान को इस पूरे मामले में एक अहम कड़ी बनना ही होगा.

खतरा अभी टला नहीं, समुद्री रास्तों पर सन्नाटा

भले ही दोनों देशों ने हमले रोक दिए हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हालात पूरी तरह से सामान्य हो गए हैं. जहाजों की आवाजाही अभी भी ठप पड़ी है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। शिपिंग डेटा कंपनी केप्लर के मुताबिक, दुनिया भर का 20% तेल जिस होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, वहां वीकेंड पर 10 से भी कम जहाज देखे गए. यही हाल लाल सागर तट के पास बाब अलमंडेब जलडमरूमध्य का है, जहां हूती विद्रोहियों के डर से सन्नाटा पसरा है. हालांकि, ओमान इस बीच एक संकटमोचक बनकर उभरा है. ओमान का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है ताकि जहाजों के लिए इन रास्तों को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके.

क्या और सस्ता होगा कच्चा तेल या फिर बढ़ेंगे दाम?

अब सबसे बड़ा सवाल कि आम आदमी के लिए आगे क्या होगा? बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक सप्लाई चेन पूरी तरह से बहाल नहीं होती, तेल की कीमतों पर खतरा बना रहेगा. जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट कहती है कि अगर तेल की सप्लाई में एक महीने की और रुकावट आई, तो क्रूड 7 से 8 डॉलर महंगा हो जाएगा. वहीं 3 महीने तक रास्ता बंद रहने पर भाव 114 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है.

दिग्गज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भी चेतावनी दी है कि रास्ता बंद रहने पर कीमतें 120 डॉलर को छू सकती हैं. हालांकि, उनका अनुमान है कि अगर माहौल शांत हुआ, तो साल के आखिर तक रेट 80 डॉलर और अगले साल 75 डॉलर पर आ सकते हैं. कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी भी मानते हैं कि बाजार की नजर अब सिर्फ कूटनीतिक फैसलों पर है. अगर खाड़ी के किसी प्रमुख ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई नया हमला हुआ, तो कच्चा तेल फिर से 95 से 100 डॉलर का स्तर पार कर सकता है.