मंगलवार को होने वाली टाटा संस की AGM को कोरम की कमी के कारण स्थगित और आगे के लिए टाल दिया गया है. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. यह AGM बॉम्बे हाउस में बुलाई गई थी, जिसमें कुछ स्टेकहोल्डर्स ऑनलाइन शामिल हुए. टाटा संस के दो मुख्य कंट्रोलिंग ट्रस्टों में से एक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने कंपनी को बताया था कि सर रतन टाटा ट्रस्ट के लिए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की मंजूरी न होने की वजह से कोई संयुक्त प्रतिनिधि AGM में शामिल नहीं हो सकता, जिससे बैठक के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया. टाटा संस के दूसरे मुख्य कंट्रोलिंग ट्रस्ट, SDTT ने पहले ही टाटा संस को बता दिया था कि ट्रस्टों के पास AGM के लिए जरूरी कोरम नहीं है. चैरिटी कमिश्नर ने SRTT पर लगी रोक नहीं हटाई है. SRTT उन दो मुख्य ट्रस्टों में से एक है जिनकी टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी है.

चंद्रशेखरन को लेकर अपडेट
टाटा ट्रस्ट्स के करीबी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने टाटा संस को कोरम की कमी के बारे में बता दिया था, लेकिन वे कंपनी को AGM न करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते थे. घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि वे कानून के तहत इसे बुला तो सकते हैं, लेकिन उन्हें इसे स्थगित करना ही पड़ेगा. AGM को लेकर अनिश्चितता ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की स्थिति पर भी ध्यान खींचा है, जिन्हें रोटेशन के आधार पर रिटायर होना है. आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि अगर कोरम की कमी के कारण 18 अगस्त की बैठक सही तरीके से नहीं हो पाती है, तो चंद्रशेखरन तब तक डायरेक्टर बने रहेंगे जब तक कि कोई सही AGM न हो जाए, जिसमें उनकी दोबारा नियुक्ति पर विचार किया जा सके.
कितनी है टाटा संस में हिस्सेदारी?
अधिकारियों ने बताया कि टाटा ट्रस्ट्स के कुछ ट्रस्टियों ने व्यक्तिगत तौर पर राहत पाने के लिए चैरिटी कमिश्नर से संपर्क किया है. माना जा रहा है कि यह कदम इस सोच के कारण उठाया गया है कि SDTT, SRTT की ओर से ऐसी राहत नहीं मांग सकता. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। SRTT और SDTT के पास मिलकर टाटा संस की 51.54 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें SRTT के पास लगभग 23.5 फीसदी और SDTT के पास लगभग 28 फीसदी हिस्सेदारी है. चैरिटी कमिश्नर ने SRTT बोर्ड के गठन और एक्ट की धारा 30A का कथित तौर पर पालन न करने की शिकायतों के बाद महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 36A के तहत यह रोक लगाई थी. धारा 30A बोर्ड में हमेशा रहने वाले या जीवन भर के लिए नियुक्त ट्रस्टियों की स्वीकार्य संख्या से संबंधित है. कानून में हाल ही में हुए एक संशोधन के तहत, पब्लिक ट्रस्ट बोर्ड में काम करने वाले हमेशा रहने वाले ट्रस्टियों की संख्या पर कानूनी सीमा तय की गई है.
चंद्रशेखरन की स्थिति
कंपनीज एक्ट के तहत, रोटेशन से रिटायर होने वाले डायरेक्टर तब तक अपने पद पर बने रहते हैं जब तक कि संबंधित AGM न हो जाए, जहां शेयरहोल्डर्स को या तो डायरेक्टर को फिर से नियुक्त करना होता है या खाली पद को भरना होता है. हालांकि, कानून में साफ तौर पर यह नहीं बताया गया है कि अगर कोरम की कमी के कारण AGM ही सही तरीके से नहीं हो पाती है, तो क्या नतीजे होंगे.
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि इसलिए टाटा संस के आर्टिकल्स की व्याख्या और तय कोरम पूरा न कर पाने वाली AGM के कानूनी नतीजों की जांच की जा रही है. चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में टाटा संस बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में चेयरमैन बने. बोर्ड में बने रहने के लिए उन्हें डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त किए जाने की जरूरत है, क्योंकि चेयरमैन के तौर पर उनका पद कानूनी रूप से उनके डायरेक्टर बने रहने पर निर्भर करता है. चंद्रशेखरन पहले ही बता चुके हैं कि फरवरी 2027 में उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर वे फिर से नियुक्ति नहीं चाहेंगे.



