पेट्रोलडीजल की बढ़ती कीमतों और E20 की चिंताओं के बीच कार को CNG में कन्वर्ट कराने का चलन बढ़ रहा है. बाजार में कई ऐसी कारें हैं, जिनमें कंपनी की ओर से CNG का विकल्प नहीं मिलता. ऐसे में लोग आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाकर खर्च कम करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, CNG किट लगवाने से पहले इंश्योरेंस और वारंटी पर होने वाले असर को समझना जरूरी है.

आफ्टरमार्केट CNG किट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मदद से उन कारों को भी CNG में बदला जा सकता है, जिनमें कंपनी की ओर से CNG का विकल्प नहीं दिया जाता. आमतौर पर आफ्टरमार्केट CNG लगाने का खर्च कंपनी की फैक्ट्रीफिटेड CNG कार के पेट्रोल वर्जन की तुलना में मिलने वाले एक्स्ट्रा प्रीमियम से 2530 प्रतिशत कम हो सकता है. इसके अलावा पुरानी पेट्रोल कारों में अच्छे माइलेज के लिए ऐसा कर सकते हैं.

मान लीजिए, अगर किसी SUV का CNG वर्जन कंपनी नहीं बेचती है, तो उसका मालिक आफ्टरमार्केट किट लगवा सकता है. इसके अलावा पुरानी या सेकेंड हैंड पेट्रोल कार को भी CNG में बदलकर रोजाना के ईंधन खर्च को कम किया जा सकता है. हालांकि, हर कार CNG कन्वर्जन के लिए फिट नहीं होती. केवल पेट्रोल कारों को ही सामान्य तौर पर CNG में बदला जा सकता है.

आफ्टरमार्केट CNG का सबसे बड़ा नुकसान

CNG किट लगवाने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात कार की कंपनी वारंटी है. भले ही किट सरकार से अप्रूव्ड हो और अथॉराइज्ड इंस्टॉलर से लगवाई गई हो, आफ्टरमार्केट CNG किट लगाने से कंपनी की पावरट्रेन वारंटी खत्म हो सकती है. कुछ कंपनियां इंजन से अलग हिस्सों पर वारंटी जारी रख सकती हैं, लेकिन यह पूरी तरह कंपनी और उसके नियमों पर निर्भर करता है. कुछ इंस्टॉलर थर्डपार्टी वारंटी भी देते हैं. हालांकि, इसके लिए ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं. आमतौर पर CNG किट पर 12 साल की वारंटी मिलती है.

एक और समस्या कार की डिक्की की जगह है. फैक्ट्रीफिटेड CNG कारों में कंपनियां अंडरबॉडी या डुअलटैंक जैसे विकल्प दे रही हैं, जिससे बूट स्पेस बचा रहता है. आफ्टरमार्केट में आमतौर पर बड़ा सिंगल टैंक लगाया जाता है, जिससे डिक्की की काफी जगह चली जाती है.

क्यों इंश्योरेंस पर असर होता है?

हां, बाहर से CNG किट लगवाने से आपकी कार के इंश्योरेंस पर असर पड़ता है. इससे इंश्योरेंस प्रीमियम थोड़ा बढ़ सकता है और इंश्योरेंस कंपनी को इसकी जानकारी देकर पॉलिसी में बदलाव कराना जरूरी होता है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि CNG किट लगने से कार की कुल इंश्योर्ड वैल्यू बढ़ जाती है और आग लगने का जोखिम भी थोड़ा बढ़ जाता है. बाहर से लगवाई गई CNG किट की कीमत को कार की कुल कीमत में जोड़ा जाता है. इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी आपकी पॉलिसी में CNG किट की जानकारी और उसकी कीमत अपडेट करती है. अगर आपने CNG किट लगवाने की जानकारी अपनी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं दी और RTO से कार के RC में CNG की जानकारी अपडेट नहीं कराई, तो भविष्य में आपका इंश्योरेंस क्लेम खारिज हो सकता है. खासकर एक्सीडेंट या आग से हुए नुकसान के मामले में क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा रहता है.