‘एक छोटे लड़के’ ने उड़ा दी पूरे भारत की नींद, दुनिया में भी बढ़ी हलचल!


नई दिल्ली: एक छोटे बच्चे ने इन दिनों भारत समेत पूरी दुनिया की नींद उड़ा रखी है। उसका यह ‘खेल’ सबको भारी पड़ने वाला है। 2026 में लोग इस छोटे लड़के की वजह से परेशान रहने वाले हैं। यह छोटा लड़का है ‘अल नीनो’, जिसे स्पेनिश में ‘द लिटिल बॉय’ कहा जाता है। इसके बारे में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी चिंता जताई है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। मौसम विभाग ने 2026 में मानसून के औसत से भी नीचे रहने का अनुमान जताया है। इसके पीछे यही छोटा लड़का यानी अल नीनो ही है, जो इन दिनों प्रशांत महासागर के एक छोटे से हिस्से में विकसित हो रहा है। इस बीच, गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया था।

मौसम विभाग ने जताई अल नीनो की चिंता
भारतीय मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 2026 में जून से लेकर सितंबर तक मानसूनी बारिश औसत से भी कम हो सकती है, क्योंकि अल नीनो विकसित हो रहा है। अल नीनो एक ऐसी मौसमी परिघटना है, जिससे दुनिया के दूसरे हिस्से में बारिश कम होती है। सूखा पड़ता है। इससे फसलें खराब हो जाती है। दानें कम पड़ते हैं। कुल मिलाकर अन्न का उत्पादन कम रह सकता है।

क्या है यह अल नीनो, कहां बनता है
अल नीनो को ‘द लिटिल बॉय’ के साथ-साथ ‘क्राइस्ट चाइल्ड’ भी कहा जाता है। अल नीनो पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर में होने वाली मौसमी परिघटना है, जिससे पर्यावरणीय चक्र गड़बड़ा जाता है और बारिश लाने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती है। इससे मानसूनी सीजन के दौरान पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में बहुत कम बारिश होती है। अल नीनो हर 2 से 7 साल के बीच विकसित होता है।

अल नीनो का भारत पर क्या पड़ता है असर
आम तौर पर महासागरों से गर्म हवाएं उठती हैं और अपने साथ पानी को सोखकर किसी दूसरे हिस्से में बारिश करती हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में जुलाई से लेकर सितंबर तक भारी बारिश करती हैं।
मगर, जब अल नीनो विकसित होता है तो ये गर्म हवाएं कमजोर पड़ जाती है और ठंडी हो जाती है, जिससे ये पानी कम उठा पाती हैं। और इसका असर मानसून पर पड़ता है, जो कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है।

भारत के लिए मानसून कितना महत्वपूर्ण है
भारत के लिए मानसून बेहद अहम है, क्योंकि मानसून से ही भारत में 70 फीसदी बारिश होती है। यह बारिश भारत की खेती-किसानी के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत की 4 ट्रिलियन इकनॉमी में कृषि का करीब 18 फीसदी हिस्सा है, जो भारत के 150 करोड़ लोगों का पेट भरती है।
अल नीनो हर जगह नकारात्मक नहीं होता है। भारत से हजारों किलोमीटर दूर अल नीनो भले ही छोटी सी जगह पर पैदा होता है, मगर इसका जलवायु प्रभाव बहुत बड़ा होता है और चिंता बढ़ा देता है।

भारत में अल नीनो का अच्छा नहीं रहा इतिहास
भारत ने अल नीनो से जुड़ी ऐसी बारिश कम से कम 17 घटनाएं देखी हैं, जिनमें से पांच में औसत या औसत से भी कम बारिश हुई है। आखिरी छह अल नीनो साल में भारत में औसत से भी कम बारिश हुई थी।
2009 में कमजोर अल नीनो ने भारत में लंबे समय तक 78.2 फीसदी बारिश हुई। यह 37 साल में सबसे कम था। अभी का वेदर मॉडल जो दिख रहा है, उसके मुताबिक 2026 में अल नीनो बेहद मजबूत रहने वाला है।

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