News Just Abhi यूपी में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन के ऑफर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है. उनको डर है कि ओवैसी अकेले लड़ कर या फिर चंद्रशेखर या फिर बसपा से गठबंधन करके इंडिया गठबंधन को डैमेज कर सकते हैं. इसलिए मजबूर सपा ने शुरुआती तौर पर बयान का स्वागत कर दिया. वहीं ओवैसी को बीजेपी की बी टीम बताने वाली कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है.

AIMIM चीफ ओवैसी ने बकाएदा ऑफर देते हुए कहा कि हमारी पार्टी बीजेपी को उत्तर प्रदेश में आने से रोकने के लिए अलायंस करने के लिए तैयार है. बशर्ते कि उस अलायंस में हमको इज्जत की निगाहों से देखा जाए, बराबरी का रुतबा दिया जाए. माना जा रहा है कि ओवैसी ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए सपा और बसपा दोनों ऑफर दे दिया है. हालांकि बसपा की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन सपा ने ओवैसी के इस बयान का स्वागत किया है.
जानें यूपी में कितनी मुस्लिम आबादी
यूपी में योगी के हिंदुत्व के सामने मुस्लिम वोटर की धार कम हुई है, पर विपक्ष के लिए वो अब भी सबसे बड़ा वोट बैंक है. यूपी में मुस्लिम आबादी करीब 19% है. 403 में से 57 सीटों पर मुस्लिम वोटर फैसला करते हैं. करीब 130 सीटों पर असर है. पश्चिमी यूपी, अवध और पूर्वांचल में मुस्लिम वोट किंगमेकर है. लोकसभा की 80 में से 34 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक हैं. ओवैसी की नजर इन्हीं सीटों पर है. इससे पहले बिहार के किशनगंज में 5 सीट जीत चुके ओवैसी अब यूपी के बॉर्डर वाले इलाकों में पैठ बना रहे हैं. महाराष्ट्र में भी ओवैसी इंडिया ब्लॉक का नुकसान कर चुके हैं.
ओवैसी को लेकर कांग्रेस ने साधी चुप्पी
ऐसे में ओवैसी के बयान से सपा सीधेसीधे किनारा नहीं कर पाई. तो वहीं ओवैसी को बीजेपी की बी टीम बताने वाली कांग्रेस गठबंधन की ऊहापोह में फंसकर फिलहाल चुप्पी साधने को मजबूर है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इसे लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि उन्हें ओवैसी के बयान नहीं सुना है. कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि हर राज्य में ओवैसी पर हमारा केन्द्रीय नेतृत्व संविधान की रक्षा के लिए फैसला करता आया है, आगे भी संविधान सम्मत फैसला लेगा.
ओवैसी की एंट्री और ऑफर से सपाकांग्रेस बैचेन
उत्तर प्रदेश की सियासत में योगी आक्रामक हिंदुत्व पर सवार होकर लगातार दो बार से सत्ता में है. ऐसे में सपाकांग्रेस गठबंधन मुस्लिम वोट को अपने पाले में गोलबंद करना चाहता है. लेकिन ओवैसी की एंट्री और नए ऑफर ने सपा और कांग्रेस को बेचैन कर दिया है. अब सपा और कांग्रेस के लिए फिलहाल ओवैसी वो गले की हड्डी है जो न ही निगली जा रही है और न ही उगली जा रही है.